Punjab Election Survey : पंजाब में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज होने लगी है. सत्ताधारी आम आदमी पार्टी से लेकर कांग्रेस, बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल तक अपनी रणनीति पर काम कर रहे हैं. इसी बीच Matrize के हालिया सर्वे में राज्य की 117 विधानसभा सीटों को लेकर मतदाताओं के मौजूदा रुझान का अनुमान पेश किया गया है. सर्वे में किसी भी एक पार्टी को 59 सीटों के बहुमत के आंकड़े तक पहुंचते नहीं दिखाया गया है. हालांकि चुनाव में अभी समय बाकी है, इसलिए इन आंकड़ों को अंतिम नतीजों के बजाय सर्वे के समय दर्ज मतदाताओं के रुझान के रूप में ही देखा जाना चाहिए.
सर्वे में आम आदमी पार्टी को 40 से 45 सीटें मिलने का अनुमान दिया गया है. पार्टी का अनुमानित वोट शेयर करीब 30 फीसदी बताया गया है. अगर सर्वे के ये आंकड़े देखें तो AAP बहुमत के लिए जरूरी 59 सीटों से पीछे रहती है.
Punjab Election Survey
कांग्रेस को सर्वे में 35 से 40 विधानसभा सीटों की रेंज में रखा गया है. पार्टी का वोट शेयर करीब 27 फीसदी रहने का अनुमान दिया गया है. इस तरह सर्वे में AAP और कांग्रेस के अनुमानित वोट शेयर के बीच तीन प्रतिशत का अंतर है. बीजेपी को लेकर दिए गए आंकड़ों में 22 से 27 सीटों और करीब 16 फीसदी वोट शेयर का अनुमान बताया गया है. हालांकि उपलब्ध विवरण में बीजेपी के लिए एक जगह 10 से 15 सीटों का अलग आंकड़ा भी दिया गया है इसलिए बीजेपी की सीटों से जुड़े इन दोनों आंकड़ों में स्पष्ट विरोधाभास है और मूल सर्वे की विस्तृत रिपोर्ट के बिना किसी एक रेंज को निश्चित मानना उचित नहीं होगा.
15 से 25 सीटों का आंकड़ा
शिरोमणि अकाली दल को सर्वे की दी गई तालिका में 15 से 25 सीटों के बीच दिखाया गया है. पार्टी का अनुमानित वोट शेयर 19 फीसदी बताया गया है. वहीं बसपा को 0 से 3 और अन्य दलों या उम्मीदवारों को 5 से 10 सीटों का अनुमान दिया गया है. सर्वे की दी गई सीट रेंज को लेकर एक महत्वपूर्ण बात ध्यान देने वाली है. अलग-अलग दलों की अधिकतम सीट संख्या को जोड़ने पर कुल आंकड़ा पंजाब विधानसभा की 117 सीटों से काफी ज्यादा हो जाता है. ऐसा अलग-अलग पार्टियों के लिए स्वतंत्र अनुमानित रेंज देने की वजह से हो सकता है इसलिए इन रेंज को एक साथ किसी एक संभावित विधानसभा संरचना के रूप में नहीं जोड़ा जाना चाहिए.
नशा और कानून व्यवस्था बड़े मुद्दे
पंजाब की राजनीति में नशे का मुद्दा लंबे समय से चर्चा में रहा है. इसके साथ कानून व्यवस्था, रोजगार और राज्य की आर्थिक स्थिति भी राजनीतिक बहस का हिस्सा हैं. सत्ताधारी AAP अपने कार्यकाल के कामकाज को सामने रख रही है, जबकि विपक्ष इन्हीं मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है. कृषि प्रधान पंजाब में किसानों से जुड़े मुद्दों का राजनीतिक महत्व भी काफी ज्यादा है. फसलों की कीमत, एमएसपी, कृषि लागत और किसान आंदोलनों से जुड़े विषय चुनावी बहस को प्रभावित कर सकते हैं. हालांकि इन मुद्दों का वास्तविक मतदान व्यवहार पर कितना असर पड़ेगा, यह अभी तय नहीं किया जा सकता.
चुनाव परिणाम नहीं
Matrize के आंकड़े पंजाब के मौजूदा राजनीतिक माहौल का सर्वे आधारित अनुमान हैं. इन्हें आगामी विधानसभा चुनाव का नतीजा नहीं माना जा सकता. उम्मीदवारों का चयन, चुनावी गठबंधन, प्रचार अभियान और आने वाले महीनों के राजनीतिक घटनाक्रम मतदाताओं के रुख को बदल सकते हैं. ऐसे में पंजाब में अगली सरकार किसकी बनेगी या विधानसभा की तस्वीर कैसी होगी, इसका अंतिम फैसला मतदाता चुनाव में ही करेंगे.




