Nirmala Sitharaman : आंध्र प्रदेश के मदनपल्ले में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के एक कार्यक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है. वीडियो में सीतारमण भाषण देती नजर आती हैं, तभी भीड़ की तरफ से तेज आवाजें आने लगती हैं. कुछ देर के लिए उन्हें अपना भाषण रोकना पड़ता है और मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू खुद उठकर लोगों से शांत रहने को कहते हैं. इस घटना को कांग्रेस ने रोजगार को लेकर लोगों की नाराजगी से जोड़ दिया, जबकि सीतारमण और नायडू का कहना है कि भीड़ विरोध नहीं कर रही थी.
उनके मुताबिक वहां मौजूद टीडीपी और जनसेना समर्थक अपने नेताओं से मिलने के लिए उत्साहित थे. उपलब्ध रिपोर्टों में भी यह साफ तौर पर स्थापित नहीं हुआ है कि भीड़ वास्तव में रोजगार की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रही थी.
Nirmala Sitharaman
यह मामला 2 अक्टूबर का है. मदनपल्ले में करीब एक लाख करोड़ रुपये की प्रस्तावित ग्लोबल हॉर्टिकल्चर हब परियोजना और इंडियन स्कूल ऑफ एग्रीकल्चर की आधारशिला रखने के लिए कार्यक्रम आयोजित किया गया था. इसमें वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू, उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण और अनंत अंबानी समेत कई लोग मौजूद थे. कार्यक्रम के दौरान निर्मला सीतारमण जैसे ही संबोधन कर रही थीं, भीड़ के एक हिस्से से तेज आवाजें आने लगीं. वायरल वीडियो में वह लोगों को शांत कराने की कोशिश करती नजर आती हैं. शोर जारी रहने पर उन्होंने कुछ देर के लिए बोलना रोक दिया.
चंद्रबाबू नायडू ने संभाला माइक
स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू अपनी जगह से उठे और लोगों को शांत कराया. इसके बाद कार्यक्रम सामान्य तरीके से आगे बढ़ा और सीतारमण ने अपना संबोधन पूरा किया. इसलिए सोशल मीडिया पर किया गया यह दावा सही नहीं है कि विरोध के कारण वित्त मंत्री अपना भाषण पूरा ही नहीं कर सकीं. वीडियो सामने आने के बाद कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने इसे सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए घटनाक्रम को जनता की नाराजगी से जोड़ा. इसके बाद सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स ने दावा किया कि कार्यक्रम में मौजूद लोग रोजगार की मांग को लेकर नारे लगा रहे थे. यहीं से विवाद ने राजनीतिक रूप ले लिया.
‘Give Jobs First’ के दावे पर सवाल
सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट में दावा किया गया कि भीड़ की तरफ से ‘Give Jobs First’ जैसे नारे लगाए गए. हालांकि उपलब्ध वीडियो और रिपोर्टों के आधार पर यह निर्णायक रूप से साबित नहीं होता कि शोर का कारण रोजगार से जुड़ा विरोध ही था. इसी मुद्दे पर सरकार और विपक्ष की अलग-अलग व्याख्या सामने आई है. जयराम रमेश के दावे के बाद निर्मला सीतारमण ने भी सीधे जवाब दिया. उन्होंने कांग्रेस नेता के निष्कर्ष को गलत बताते हुए कहा कि कार्यक्रम में मौजूद टीडीपी और जनसेना कार्यकर्ता चंद्रबाबू नायडू और पवन कल्याण से बात करना चाहते थे. उनके मुताबिक इसी उत्साह के कारण कार्यक्रम के दौरान शोर हुआ था. मामला बढ़ने के बाद मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने भी जयराम रमेश के दावे का जवाब दिया.
उन्होंने कहा कि जिस घटनाक्रम को जनता की नाराजगी बताया जा रहा है, वह वास्तव में कार्यक्रम में मौजूद लोगों का उत्साह था. नायडू के मुताबिक कार्यक्रम व्यवस्थित तरीके से चलता रहे, इसलिए उन्हें बीच में हस्तक्षेप करना पड़ा.
विरोध के दावे को नकारा
अन्नमय्या जिला प्रशासन की तरफ से भी घटना को रोजगार से जुड़ा प्रदर्शन बताए जाने से इनकार किया गया. प्रशासन का पक्ष रहा कि कार्यक्रम में हुआ शोर नेताओं के प्रति मौजूद लोगों के उत्साह से जुड़ा था, न कि कोई संगठित नौकरी विरोध प्रदर्शन. वीडियो से इतना स्पष्ट है कि निर्मला सीतारमण के भाषण के दौरान भीड़ की तरफ से शोर हुआ, उन्हें कुछ देर रुकना पड़ा और चंद्रबाबू नायडू ने लोगों को शांत कराया. इसके बाद वित्त मंत्री ने अपना संबोधन पूरा किया. लेकिन शोर करने वाले लोगों का मकसद क्या था, इसी पर राजनीतिक विवाद है.
कांग्रेस इसे रोजगार और जनता की नाराजगी से जोड़ रही है, जबकि सीतारमण, चंद्रबाबू नायडू और स्थानीय प्रशासन इसे समर्थकों का उत्साह बता रहे हैं इसलिए वायरल क्लिप को अकेले आधार बनाकर इसे निश्चित रूप से ‘नौकरी के लिए विरोध’ या ‘सरकार के खिलाफ प्रदर्शन’ बताना फिलहाल पुष्ट तथ्य नहीं माना जा सकता.




