UP Traffic Challan Update 2026 : उत्तर प्रदेश में वाहन चालकों को एक बार फिर ट्रैफिक चालानों को लेकर झटका लग सकता है। सरकार ने साल 2017 से 2021 के बीच माफ किए गए करीब 13 लाख वाहनों के चालानों की फिर से जांच कराने का फैसला लिया है। इन चालानों को दोबारा एक्टिव किए जाने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है, जिससे संबंधित वाहन मालिकों पर फिर से कार्रवाई हो सकती है।
बताया जा रहा है कि यह कदम सुप्रीम कोर्ट की उस चिंता के बाद उठाया गया है, जिसमें गंभीर ट्रैफिक उल्लंघनों पर चालान माफी को लेकर सवाल उठाए गए थे। इसके बाद राज्य सरकार ने परिवहन विभाग को निर्देश दिए हैं कि सभी माफ किए गए चालानों की समीक्षा की जाए और गंभीर मामलों को दोबारा सक्रिय किया जाए।
UP Traffic Challan Update 2026
परिवहन विभाग ने चालानों को तीन अलग-अलग श्रेणियों में बांटने की प्रक्रिया तय की है। इनमें गैर-शमनीय (non-compoundable) अपराध, लगातार ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन और ऐसे मामले शामिल हैं जिनमें जुर्माना या सजा पहले से तय हो चुकी है। इन श्रेणियों के आधार पर तय किया जाएगा कि किन चालानों को दोबारा लागू किया जाएगा। इस पूरे मामले की जांच के लिए हर जिले में विशेष समितियों का गठन किया जाएगा। ये समितियां माफ किए गए चालानों की समीक्षा करेंगी और यह तय करेंगी कि कौन से चालान नियमों के अनुसार दोबारा सक्रिय किए जाने योग्य हैं। इसके बाद संबंधित वाहन मालिकों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
लाखों चालानों पर पड़ सकता है असर
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 2017 से 2021 के बीच करीब 30 लाख से अधिक ई-चालान बनाए गए थे। इनमें से लगभग 17.59 लाख चालानों का निपटारा कर दिया गया था, जबकि करीब 13 लाख चालान माफ कर दिए गए थे। अब इन्हीं माफ किए गए चालानों की दोबारा जांच की जाएगी, जिससे बड़ी संख्या में वाहन चालकों पर असर पड़ सकता है। सरकारी अधिकारियों के अनुसार, जिन मामलों में गंभीर उल्लंघन पाए जाएंगे, उन्हें दोबारा एक्टिव कर जुर्माना या अन्य कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। इसमें उन मामलों को प्राथमिकता दी जाएगी जिनमें बार-बार नियम तोड़े गए या जिनमें सजा का प्रावधान था।
वाहन चालकों के लिए बढ़ी चिंता
इस फैसले के बाद वाहन चालकों में चिंता बढ़ सकती है, क्योंकि पुराने माफ किए गए चालानों की फिर से जांच होने से अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ने की संभावना है। परिवहन विभाग का कहना है कि पूरी प्रक्रिया नियमों के अनुसार और पारदर्शिता के साथ की जाएगी, ताकि केवल गंभीर मामलों पर ही कार्रवाई हो।
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