Prayagraj Controversy : प्रयागराज से शुरू हुआ धार्मिक और राजनीतिक विवाद अब काशी पहुंचकर एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के वाराणसी आगमन के बाद यह प्रकरण दोबारा चर्चा के केंद्र में आ गया है। शुक्रवार को आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर सीधा निशाना साधते हुए सरकार की नीतियों और धार्मिक मुद्दों को लेकर तीखे सवाल खड़े किए।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि जब उनसे उनके शंकराचार्य होने का प्रमाण मांगा गया, तो उन्होंने उसे सहज भाव से सौंप दिया। लेकिन अब उन्होंने मुख्यमंत्री से उनके ‘हिंदू होने’ का प्रमाण प्रस्तुत करने की मांग कर डाली।
Prayagraj Controversy के बाद काशी में फिर गरमाया मामला
दरअसल, उनका कहना था कि धर्म किसी प्रमाणपत्र का मोहताज नहीं होता, बल्कि सत्ता को अपनी धार्मिक निष्ठा और प्रतिबद्धता को कर्मों से सिद्ध करना चाहिए। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने आरोप लगाया कि आज के समय में गोमाता की रक्षा और गोहत्या पर प्रतिबंध की मांग करना सबसे बड़ा अपराध मान लिया गया है। उन्होंने इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि गोरक्षा की आवाज उठाने वालों को अतीत में भी दमन और अत्याचार का सामना करना पड़ा है। उनका कहना था कि यह लड़ाई किसी पद की नहीं, बल्कि सनातन परंपरा और आस्था की रक्षा की है।
सरकार पर सनातन विरोधी रुख का आरोप
उन्होंने सरकार पर यह आरोप लगाया कि सनातन परंपरा से जुड़े संतों और गोभक्तों को दबाने की कोशिश की जा रही है। साथ ही यह भी कहा कि धार्मिक नेतृत्व की छवि को धूमिल करने के लिए योजनाबद्ध प्रयास हो रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि इस पूरे घटनाक्रम के पीछे सत्ता से जुड़े प्रभावशाली लोगों की भूमिका है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने उत्तर प्रदेश में गोमाता को ‘राज्यमाता’ का दर्जा देने की मांग रखी। उन्होंने महाराष्ट्र और नेपाल का उदाहरण देते हुए कहा कि जब अन्य स्थानों पर गाय को विशेष सम्मान दिया जा सकता है, तो उत्तर प्रदेश में ऐसा क्यों नहीं किया जा सकता, जबकि यह भगवान राम और श्रीकृष्ण की भूमि मानी जाती है।
मांस निर्यात पर रोक लगाने की अपील
उन्होंने राज्य से मांस निर्यात पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की। उनका आरोप था कि भैंस के मांस के नाम पर गोवंश के अवैध वध का खेल चल रहा है। उन्होंने कहा कि जब तक हर वधशाला और निर्यात प्रक्रिया में वैज्ञानिक जांच अनिवार्य नहीं होती, तब तक गोवंश की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जा सकती। प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि देश के कुल मांस निर्यात में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी बड़ी है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या आर्थिक लाभ के लिए गोवंश की आहुति दी जा रही है और क्या यही ‘रामराज्य’ की परिकल्पना है।
40 दिनों का अल्टीमेटम
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने सरकार को 40 दिनों का समय देते हुए कहा कि यदि इस अवधि में गोमाता को राज्यमाता का दर्जा नहीं दिया गया और मांस निर्यात पर रोक नहीं लगी, तो संत समाज बड़े आंदोलन का रास्ता अपनाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि मार्च में लखनऊ में संतों का व्यापक सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह केवल राजनीतिक या प्रशासनिक संघर्ष नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति और धार्मिक मूल्यों की रक्षा की लड़ाई है। उनका दावा है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और व्यापक रूप ले सकता है और सत्ता के लिए नैतिक परीक्षा बन सकता है।
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