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Middle East Crisis: एक तरफ तेल के रास्तों पर खतरा, दूसरी तरफ ड्रोन से दहला रूस

Middle East Crisis

Middle East Crisis : दुनिया के दो बड़े संघर्ष एक साथ नए मोड़ पर पहुंच गए हैं। पश्चिम एशिया में हूती विद्रोहियों के हमलों ने सऊदी अरब की राजधानी रियाद और उसके अहम ऊर्जा ढांचे तक खतरा पहुंचा दिया है। वहीं रूस और यूक्रेन के बीच ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने की अमेरिकी कोशिशों के बावजूद लड़ाई तेज हो गई है। यूक्रेन ने रूस पर बड़े पैमाने पर ड्रोन हमला किया है। इन घटनाओं के बीच अमेरिका के सामने दोनों मोर्चों पर तनाव कम कराने की चुनौती बढ़ गई है। सऊदी अरब ने पुष्टि की है कि हूतियों ने रियाद को बैलिस्टिक मिसाइल से निशाना बनाने की कोशिश की।

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सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के मुताबिक मिसाइल को रोक दिया गया। रियाद एयरपोर्ट के पास धुएं का बड़ा गुबार भी दिखाई दिया। इस घटना में किसी के हताहत होने या बड़े नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है। हूतियों ने रियाद में संवेदनशील ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया है।

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हूतियों ने लाल सागर के किनारे स्थित यनबू में सऊदी अरामको की सुविधाओं पर भी हमला करने का दावा किया है। यनबू सऊदी अरब के लिए बेहद महत्वपूर्ण तेल निर्यात केंद्र है। हाल के तनाव के बीच यहां से कच्चे तेल की लोडिंग प्रभावित हुई और कुछ कार्गो डिलीवरी रद्द होने की खबरें भी सामने आईं। इस घटनाक्रम ने वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा दी है। हूती और सऊदी अरब के बीच बढ़ता टकराव ऐसे समय हो रहा है, जब क्षेत्र पहले से कई संघर्षों से जूझ रहा है।

लाल सागर और बाब अल-मंदेब जैसे समुद्री रास्तों की सुरक्षा भी चिंता का विषय बनी हुई है। अमेरिका ने क्षेत्र में मौजूद अपने नागरिकों से सतर्क रहने को कहा है। वहीं हूती नेतृत्व ने अमेरिकी जहाजों को निशाना नहीं बनाने की बात कही है।

यूक्रेन ने किया ड्रोन हमला

पश्चिम एशिया से अलग यूरोप में भी तनाव कम होने के बजाय बढ़ रहा है। यूक्रेन ने रूस और मॉस्को क्षेत्र पर बड़े पैमाने पर ड्रोन हमला किया। फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक रूस के रक्षा मंत्रालय ने देशभर में 1,110 ड्रोन रोकने का दावा किया, जबकि मॉस्को के मेयर ने राजधानी की ओर आए 450 ड्रोन इंटरसेप्ट किए जाने की बात कही। हमले के कारण मॉस्को के प्रमुख एयरपोर्ट पर उड़ानें भी प्रभावित हुईं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 14 सितंबर को दावा किया था कि रूस और यूक्रेन एक-दूसरे के ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने पर सहमत हो गए हैं।

अगले ही दिनों दोनों तरफ से ऊर्जा और ईंधन से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाए जाने की घटनाएं सामने आईं। रूस ने कीव में पेट्रोल स्टेशनों समेत कई जगह हमले किए, जबकि यूक्रेन ने रूसी तेल रिफाइनरी को निशाना बनाया।

अमेरिकी कूटनीति के सामने बढ़ी मुश्किल

इन घटनाओं से ट्रंप प्रशासन की मध्यस्थता की कोशिशों के सामने चुनौती बढ़ी है। एक तरफ रूस और यूक्रेन के बीच सीमित युद्धविराम जैसी व्यवस्था जमीन पर टिकती नहीं दिख रही है, दूसरी तरफ पश्चिम एशिया में ईरान, अमेरिका, सऊदी अरब और हूतियों से जुड़ा तनाव कई मोर्चों तक फैल चुका है। ऐसे में वॉशिंगटन के लिए अलग-अलग पक्षों को बातचीत की मेज तक लाना और संघर्ष को आगे बढ़ने से रोकना मुश्किल होता जा रहा है। तनाव के बीच ईरान ने अमेरिका के साथ बातचीत दोबारा शुरू करने के संकेत दिए हैं, लेकिन इसके लिए शर्तें रखी हैं।

रिपोर्टों के मुताबिक, तेहरान ने कतर के जरिए सात शर्तें अमेरिका तक पहुंचाई हैं। सार्वजनिक रूप से सामने आई मांगों में सभी मोर्चों पर लड़ाई रोकना, फ्रीज किए गए ईरानी फंड को जारी करना और अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी समाप्त करना शामिल है।

टिकी दुनिया की नजर

रियाद और यनबू पर हमलों से लेकर रूस पर बड़े ड्रोन अटैक तक, हालिया घटनाएं बताती हैं कि दोनों क्षेत्रों में तनाव तेजी से बदल रहा है। ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत आगे बढ़ती है या नहीं और रूस-यूक्रेन ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाना रोकते हैं या नहीं, आने वाले दिनों में इन दोनों सवालों पर खास नजर रहेगी। फिलहाल, सैन्य कार्रवाई के साथ कूटनीतिक कोशिशें भी जारी हैं।

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Will the middle class get relief from the first general budget of Modi 3.0?