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Nobel Prize in Economics 2026: चर्चा में भारतीय मूल के राज चेट्टी समेत 7 नाम, आज किसे मिलेगा अर्थशास्त्र का नोबेल?

Nobel Prize in Economics 2026 : किसी देश की अर्थव्यवस्था कितनी मजबूत है, इसका अंदाजा केवल वहां की बड़ी कंपनियों या कुल कमाई से नहीं लगाया जा सकता। आम लोगों को रोजगार के कितने अवसर मिल रहे हैं, गरीब परिवारों के बच्चे कितनी तरक्की कर पा रहे हैं और नई तकनीक से लोगों की जिंदगी में क्या बदलाव आ रहा है, ये सवाल भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। दुनिया भर के अर्थशास्त्री वर्षों से इन विषयों पर शोध कर रहे हैं। इसी बीच सोमवार (12 अक्टूबर) को अर्थशास्त्र के नोबेल पुरस्कार की घोषणा होने वाली है। संभावित दावेदारों की चर्चाओं में भारतीय मूल के अमेरिकी अर्थशास्त्री राज चेट्टी सहित सात प्रमुख शोधकर्ताओं के नाम सामने आ रहे हैं।

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से जुड़े अर्थशास्त्री राज चेट्टी ने सामाजिक और आर्थिक अवसरों में असमानता को समझने के लिए व्यापक शोध किया है। उन्होंने सरकारी आंकड़ों और अन्य बड़े डेटा सेट की मदद से यह जानने का प्रयास किया कि किसी गरीब परिवार में जन्म लेने वाले बच्चे के भविष्य पर उसके आसपास का माहौल कितना असर डालता है।

Nobel Prize in Economics 2026

उनके अध्ययन से यह समझने में मदद मिलती है कि कुछ इलाकों में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों के लिए आगे बढ़ने के अवसर अधिक क्यों होते हैं। राज चेट्टी के शोध में इस बात पर विशेष ध्यान दिया गया है कि व्यक्ति की आर्थिक प्रगति केवल उसकी मेहनत या शिक्षा पर निर्भर नहीं करती। वह किस इलाके में रहता है, वहां स्कूलों की स्थिति कैसी है और समाज में उसे किस तरह के अवसर मिलते हैं, इन बातों का भी प्रभाव पड़ सकता है। उनके काम का उपयोग ऐसी सरकारी नीतियों पर विचार करने में किया जा सकता है, जिनसे कम आय वाले परिवारों के बच्चों को बेहतर भविष्य बनाने में मदद मिले।

एरियल पेक्स का शोध

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के अर्थशास्त्री एरियल पेक्स भी संभावित दावेदारों की चर्चाओं में शामिल हैं। उन्होंने बाजार में प्रतिस्पर्धा और कंपनियों के विलय के आर्थिक प्रभावों पर काम किया है। स्टीवन बेरी और जेम्स लेविनसोहन के साथ अमेरिकी कार बाजार पर उनका 1995 का शोध विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। इस अध्ययन से यह आकलन करने के तरीके विकसित करने में मदद मिली कि कंपनियों के एक होने से बाजार में प्रतिस्पर्धा और वस्तुओं की कीमतों पर क्या प्रभाव पड़ सकता है। स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की अर्थशास्त्री सुसान एथी ने अर्थशास्त्र में आधुनिक तकनीक और आंकड़ों के इस्तेमाल को नई दिशा देने में योगदान दिया है। उनके शोध में मशीन लर्निंग की मदद से आर्थिक नीतियों और कार्यक्रमों के प्रभाव को समझने पर जोर दिया गया है।

उदाहरण के तौर पर, किसी रोजगार प्रशिक्षण योजना से लोगों की आय में वास्तव में कितना बदलाव आया, इसका विश्लेषण इन तरीकों से किया जा सकता है। वर्ष 2007 में एथी जॉन बेट्स क्लार्क मेडल पाने वाली पहली महिला बनी थीं।

रॉबर्ट बैरो की रिसर्च

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के रॉबर्ट बैरो ने सरकारी कर्ज, कर नीति और आर्थिक विकास जैसे विषयों पर महत्वपूर्ण अध्ययन किए हैं। उनके शोध से जुड़ी प्रमुख चर्चाओं में रिकार्डियन इक्विवेलेंस का विचार शामिल है। इसके अनुसार, यदि सरकार आज कर्ज लेकर करों में राहत देती है, तो कुछ लोग भविष्य में कर बढ़ने की आशंका के कारण अतिरिक्त आय खर्च करने के बजाय बचाकर रख सकते हैं। हालांकि वास्तविक अर्थव्यवस्था में यह सिद्धांत किस हद तक लागू होता है, इसे लेकर अर्थशास्त्रियों के बीच मतभेद रहे हैं। फ्रांस के अर्थशास्त्री थॉमस पिकेटी और कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, बर्कले के इमैनुएल साएज ने आर्थिक असमानता को लेकर व्यापक शोध किया है।

उनके अध्ययन में यह समझने का प्रयास किया गया कि किसी देश की कुल आय और संपत्ति का कितना हिस्सा सबसे अमीर वर्ग के पास केंद्रित होता है। समय के साथ इस बंटवारे में होने वाले बदलावों ने कर व्यवस्था, संपत्ति और सामाजिक असमानता पर अंतरराष्ट्रीय बहस को प्रभावित किया है।

असर को समझाते हैं डेविड ऑटोर

मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के अर्थशास्त्री डेविड ऑटोर ने तकनीकी बदलाव और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के रोजगार पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन किया है। उनके शोध में यह देखा गया कि कंप्यूटर और स्वचालित तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल से अलग-अलग तरह की नौकरियों की मांग कैसे बदलती है। उन्होंने चीन से बढ़ते आयात के अमेरिकी उद्योगों और श्रमिकों पर प्रभाव का भी अध्ययन किया है। AI के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल के बीच उनका काम और अधिक प्रासंगिक हो गया है। अर्थशास्त्री जेनेट करी ने बचपन की परिस्थितियों और व्यक्ति के भविष्य के बीच संबंधों को समझने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

उनके शोध में गरीबी, प्रदूषण, स्वास्थ्य सेवाओं और बच्चों के विकास जैसे विषय शामिल हैं। उन्होंने यह अध्ययन किया कि बचपन में खराब स्वास्थ्य या प्रतिकूल वातावरण का असर व्यक्ति की शिक्षा, रोजगार और कमाई पर आगे चलकर किस तरह पड़ सकता है। ऐसे अध्ययन बच्चों के स्वास्थ्य और कल्याण से जुड़ी नीतियां तैयार करने में उपयोगी माने जाते हैं।

अलग है अर्थशास्त्र का पुरस्कार

अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार अल्फ्रेड नोबेल की मूल वसीयत में शामिल पांच पुरस्कारों में नहीं था। इसकी स्थापना स्वीडन के केंद्रीय बैंक स्वेरिग्स रिक्सबैंक ने 1968 में की थी। इसका आधिकारिक नाम ‘अल्फ्रेड नोबेल की स्मृति में आर्थिक विज्ञान में स्वेरिग्स रिक्सबैंक पुरस्कार’ है। यह सम्मान ऐसे शोधकर्ताओं को दिया जाता है, जिनके काम ने आर्थिक गतिविधियों, नीतियों या लोगों के आर्थिक व्यवहार को समझने में महत्वपूर्ण योगदान दिया हो।

अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार किसी एक वर्ष के चर्चित विषय के आधार पर नहीं दिया जाता। चयन में शोध की मौलिकता, उसकी वैज्ञानिक उपयोगिता और लंबे समय में उसके प्रभाव को महत्व दिया जाता है। राज चेट्टी सहित जिन अर्थशास्त्रियों के नाम चर्चा में हैं, उन्हें फिलहाल संभावित दावेदार ही माना जा सकता है। वास्तविक विजेता का नाम आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगा।

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