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Sawan 2026: आज से श्रावण मास शुरू, शिवालयों में उमड़ी भक्तों की भीड़

Sawan 2026 : भगवान शिव की आराधना का पावन महीना श्रावण आज से शुरू हो गया है। सावन के आते ही शहर के प्रमुख शिवालयों में शिवभक्तों की भीड़ जुटनी शुरू हो जाएगी। श्रद्धालु भोलेनाथ का जलाभिषेक करेंगे और विधिवत पूजा-अर्चना में जुटेंगे। मंदिरों की तरफ से सावन के पहले दिन विशेष पूजा और अभिषेक को लेकर पहले ही सारी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। श्रावण मास में भगवान शिव को जल दूध बेलपत्र धतूरा और पुष्प चढ़ाने का विशेष महत्व माना जाता है।

इस बार सावन का पहला सोमवार 3 अगस्त को पड़ रहा है जिस दिन शिवालयों में सबसे ज्यादा भीड़ रहने की संभावना जताई जा रही है। कांवड़िए भी कांवड़ लेकर मंदिरों तक पहुंचेंगे और भगवान शिव पर जल चढ़ाएंगे। पूरे महीने मंदिर परिसर हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयकारों से गूंजता रहेगा।

Sawan 2026

सावन के पहले दिन कैलाश मंदिर से एक खास धार्मिक सामग्री 12 ज्योतिर्लिंग मंदिर भेजी जाएगी। महंत गौरव गिरि ने इस बारे में बताया कि कैलाश महादेव मंदिर से ताम्रपत्र सिक्का एक रुद्राक्ष रज और शिवजी पर चढ़ाया गया जल तथा मंदिर से मिले कंकड़ को एक कलश में रखकर लाया जाएगा। इसके बाद इन सभी वस्तुओं को अभिमंत्रित करके निर्माणाधीन 12 ज्योतिर्लिंग मंदिर में विधि-विधान से स्थापित किया जाएगा।

भूलकर भी न करें ये काम

धार्मिक मान्यता है कि शिव कृपा पाने के लिए पूरे सावन में सात्विक भोजन ही करना चाहिए। इसी वजह से इस महीने मांस मदिरा प्याज और लहसुन के सेवन को वर्जित माना गया है और इसे पाप के समान बताया गया है। शास्त्रों में यह भी कहा गया है कि सावन में हरी सब्जियों का त्याग करने से पुण्य फल मिलता है। वैज्ञानिक नजरिए से देखा जाए तो इन दिनों साग में पित्त बढ़ाने वाले तत्वों की मात्रा बढ़ जाती है और साथ ही कीड़े-मकोड़े भी ज्यादा पनपते हैं जो सेहत के लिए नुकसानदायक साबित हो सकते हैं।

शिवलिंग पर ये चढ़ाना वर्जित

मान्यता के अनुसार सावन में शिवलिंग पर हल्दी नहीं चढ़ानी चाहिए। शिवलिंग को पुरुष तत्व और भगवान शिव का प्रतीक माना जाता है इसलिए हल्दी शिवलिंग की बजाय जलाधारी पर ही चढ़ाई जानी चाहिए। सावन में जहां तक हो सके दूध का सेवन नहीं करना चाहिए। यही कारण है कि इस महीने शिवजी का दूध से अभिषेक करने की परंपरा चली आ रही है। वैज्ञानिक तौर पर भी माना जाता है कि इन दिनों दूध शरीर में पित्त बढ़ाने का काम करता है।

बैंगन खाना भी नहीं माना गया उचित

सावन में बैंगन खाने की भी मनाही है। धार्मिक दृष्टि से बैंगन को अशुद्ध माना गया है वहीं वैज्ञानिक कारण यह है कि इस मौसम में बैंगन में कीड़े लगने की आशंका काफी बढ़ जाती है जिससे सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है। सावन के महीने में इस बात का खास ख्याल रखा जाना चाहिए कि बुजुर्ग गुरु भाई-बहन जीवनसाथी माता-पिता मित्र और ज्ञानी लोगों का अपमान बिल्कुल न हो। अगर घर के दरवाजे पर गाय या सांड आ जाए तो उसे भगाने की बजाय कुछ खिलाना चाहिए। सांड को मारना भगवान शिव की सवारी नंदी का अपमान करने के समान माना जाता है।

(Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। Headlines India News किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है।)

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