US Military Rescue Operation Iran : ईरान की पहाड़ियों में एक अमेरिकी अफसर करीब 50 घंटे तक घायल हालत में छिपा रहा और दूसरी तरफ ईरानी सुरक्षाबल उसे खोजने में जुटे थे। अप्रैल में अमेरिकी F-15E लड़ाकू विमान गिराए जाने के बाद शुरू हुई यह कहानी अब पहली बार सामने आई है। अमेरिकी वायुसेना के वेपन सिस्टम ऑफिसर ने सीबीएस के कार्यक्रम ‘60 मिनट्स’ में अपने अनुभव साझा किए। उनके मुताबिक, चोटों और लगातार मंडराते खतरे के बावजूद वह ईरानी सेना की गिरफ्त में आने से बचते रहे। अमेरिकी F-15E स्ट्राइक ईगल को ईरान के ऊपर एक मिशन के दौरान मार गिराया गया था।
विमान में दो अमेरिकी एयरफोर्स अधिकारी थे, जिन्हें अभियान में ‘ड्यूड 44 अल्फा’ और ‘ड्यूड 44 ब्रावो’ के नाम से पहचाना गया। मिसाइल की चपेट में आने के बाद दोनों ने विमान से बाहर निकलकर पैराशूट के जरिए उतरने की कोशिश की, लेकिन दोनों अलग-अलग जगहों पर जा गिरे। ब्रावो को इस दौरान गंभीर चोटें आईं।
US Military Rescue Operation Iran
ब्रावो के लिए जमीन पर उतरना किसी दूसरी परीक्षा की शुरुआत थी। तेज रफ्तार से गिरने के दौरान उन्हें पीठ, हाथ और कंधे में गंभीर चोटें आईं। इसके बावजूद उन्होंने खुद को क्रैश साइट से दूर किया और ईरान के दुर्गम पहाड़ी इलाके में जाकर छिप गए। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक वह घायल होने के बावजूद लगातार अपनी स्थिति बदलते रहे, ताकि ईरानी सेना उन्हें ढूंढ न सके। विमान गिरने के बाद ईरानी जमीनी बलों ने दोनों अमेरिकी एयरमैन की तलाश शुरू कर दी थी। ब्रावो के लिए खतरा इसलिए और ज्यादा था क्योंकि वह घायल होने के बावजूद अकेले दुर्गम इलाके में छिपे थे। दूसरी ओर अमेरिकी सेना लगातार उनकी लोकेशन पता करने और सुरक्षित निकालने की कोशिश कर रही थी। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार ईरानी बलों का स्पष्ट लक्ष्य दोनों अधिकारियों को पकड़ना था।
पहले अल्फा को निकाला गया
F-15E के पायलट यानी ‘ड्यूड 44 अल्फा’ को विमान गिरने के कुछ ही घंटों बाद बचा लिया गया। इसके लिए अमेरिकी सेना ने दिन के उजाले में ईरानी क्षेत्र के भीतर एक बेहद जोखिम भरा अभियान चलाया। बचाव अभियान में शामिल अमेरिकी विमानों और हेलीकॉप्टरों को ईरानी गोलीबारी का सामना करना पड़ा। एक ए-10 विमान भी दुश्मन की फायरिंग में क्षतिग्रस्त हुआ, लेकिन अभियान जारी रहा।
90 से ज्यादा जवान
ब्रावो को सुरक्षित निकालना कहीं ज्यादा मुश्किल था। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर के मुताबिक, इस अभियान के लिए जमीन पर 90 से ज्यादा अमेरिकी सैनिक तैनात किए गए थे। हवा में सैकड़ों जवान और मिशन को सहयोग देने के लिए बड़ी संख्या में अन्य कर्मी शामिल थे। अमेरिकी अधिकारियों ने इसे बेहद जटिल अभियान बताया, जिसमें कई सैन्य और खुफिया इकाइयों के बीच तालमेल जरूरी था। इस रेस्क्यू में अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए की भूमिका भी अहम रही। अधिकारियों के मुताबिक ईरानी बलों को भ्रमित करने के लिए एक गुप्त धोखा अभियान चलाया गया। साथ ही अमेरिकी एजेंसियों ने ब्रावो की लोकेशन का पता लगाने के लिए विशेष तकनीक का इस्तेमाल किया। इस दौरान अमेरिकी सैन्य विमान और ड्रोन भी अभियान का हिस्सा रहे।
Wonderful to hear Bravo the F15 copilot credit God with his survival.
“I believe it was God’s provision in my life to bring me through that moment in a way that didn’t prevent injuries but prevented catastrophic injuries.”
The fall broke his back, shoulder and arm but he was… pic.twitter.com/T03uvpt1v5
— Jim Hanson (@JimHansonDC) September 14, 2026
आखिरकार ईस्टर संडे को घर लौटे ब्रावो
करीब दो दिन तक ईरानी क्षेत्र में घायल हालत में छिपे रहने के बाद ब्रावो को आखिरकार अमेरिकी बचाव दल ने सुरक्षित निकाल लिया। इस पूरे अभियान को अमेरिकी अधिकारियों ने अपनी सैन्य इतिहास की सबसे जटिल खोज और बचाव कार्रवाइयों में से एक बताया। ब्रावो की कहानी अब सामने आने के बाद इस मिशन के जोखिम, सैन्य तैयारी और ‘अपने सैनिक को पीछे नहीं छोड़ने’ की अमेरिकी नीति की एक अलग तस्वीर सामने आई है।
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