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Middle East Tension: तेल संकट के बीच सऊदी पहुंचे NSA अजीत डोभाल, ऊर्जा सुरक्षा पर अहम बैठकें

Middle East Tension
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Middle East Tension : मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार Ajit Doval सऊदी अरब के दौरे पर हैं। यह दौरा ऐसे समय पर हो रहा है जब Strait of Hormuz के आसपास हालात संवेदनशील बने हुए हैं और वैश्विक तेल सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। इस वजह से भारत ने अपनी कूटनीतिक सक्रियता तेज कर दी है। रविवार को Riyadh पहुंचने पर अजीत डोभाल का स्वागत सऊदी अरब के उप मंत्री Saud Al-Sati ने किया। इसके बाद उन्होंने ऊर्जा मंत्री Abdulaziz bin Salman, विदेश मंत्री Faisal bin Farhan और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार Musaed Al-Aiban से मुलाकात की। इन बैठकों में द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ क्षेत्रीय हालात पर विस्तार से चर्चा हुई।

इस दौरे का सबसे बड़ा मुद्दा भारत की ऊर्जा सुरक्षा रहा। भारत अपनी तेल जरूरतों का करीब 40 फीसदी हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है। ऐसे में अगर Strait of Hormuz में किसी तरह की रुकावट आती है, तो इसका सीधा असर भारत पर पड़ सकता है।

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इसी वजह से भारत हालात पर नजर रखते हुए अपने प्रमुख साझेदार देशों के साथ लगातार बातचीत कर रहा है। इस बीच United States और Iran के बीच तनाव और बढ़ गया है। हाल ही में अमेरिका ने एक ईरानी जहाज को जब्त किया, जिससे हालात और गंभीर हो गए। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा कि जहाज ने चेतावनी के बावजूद रुकने से इनकार किया था, जिसके बाद यह कार्रवाई की गई। इस घटनाक्रम का असर सीधे वैश्विक बाजार पर पड़ा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में Brent Crude की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई है। वहीं, West Texas Intermediate में भी तेजी दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तनाव जारी रहा तो कीमतें और बढ़ सकती हैं।

भारत की रणनीति पर नजर

तेल कीमतों में बढ़ोतरी और आपूर्ति पर खतरे को देखते हुए भारत अपनी रणनीति मजबूत करने में जुटा है। सरकार लगातार यह कोशिश कर रही है कि किसी भी आपात स्थिति में देश की ऊर्जा जरूरतें प्रभावित न हों। इसके लिए वैकल्पिक सप्लाई और कूटनीतिक बातचीत दोनों पर जोर दिया जा रहा है। तनाव के बीच एक राहत की खबर यह है कि अमेरिका और ईरान के बीच फिर से बातचीत की संभावना बन रही है। इससे पहले दोनों देशों के बीच पाकिस्तान में पहली दौर की वार्ता हो चुकी है। अब दूसरे दौर की बातचीत जल्द होने की उम्मीद जताई जा रही है, जिससे क्षेत्र में तनाव कम हो सकता है।

फिलहाल, मिडिल ईस्ट के हालात पर पूरी दुनिया की नजर है। भारत के लिए यह दौर बेहद अहम है, क्योंकि ऊर्जा सुरक्षा सीधे देश की अर्थव्यवस्था से जुड़ी है। ऐसे में अजीत डोभाल का यह दौरा आने वाले समय की रणनीति तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

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