Marine One : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के हेलिकॉप्टर मरीन वन और एक यात्री विमान के खतरनाक तरीके से करीब आने की वजह सामने आ गई है। जांच के मुताबिक, रेडियो संपर्क में आई तकनीकी खराबी के कारण एयर ट्रैफिक कंट्रोलर्स को मरीन वन के उड़ान भरने से पहले मिलने वाली जरूरी चेतावनी नहीं मिल सकी। इसी वजह से रीगन नेशनल एयरपोर्ट से एक यात्री विमान को टेकऑफ की अनुमति दे दी गई।
यह घटना 4 अगस्त को हुई थी। ट्रम्प को लेकर मरीन वन व्हाइट हाउस के पास से उड़ान भर रहा था। उसी दौरान रीगन नेशनल एयरपोर्ट से एक यात्री विमान को उड़ान भरने की अनुमति मिल गई। दोनों विमान कुछ समय के लिए बेहद करीब आ गए। हालांकि, पायलटों की सतर्कता के कारण संभावित टक्कर टल गई।
Marine One
जांच में सामने आया कि एयर ट्रैफिक कंट्रोलर्स को रेडियो संपर्क की इस समस्या के बारे में घटना से करीब एक सप्ताह पहले ही जानकारी मिल गई थी। 30 जुलाई को मरीन वन के पायलटों और एयर ट्रैफिक कंट्रोलर्स के बीच हुई बैठक में भी यह मुद्दा सामने आया था। बैठक में बताया गया था कि हेलिकॉप्टर की उड़ान से तीन मिनट पहले दी जाने वाली चेतावनी कंट्रोल टावर तक नहीं पहुंच रही थी।
बदली उड़ान की जगह
रेडियो समस्या की एक बड़ी वजह व्हाइट हाउस में चल रहा निर्माण कार्य था। इसके चलते मरीन वन के उड़ान भरने की जगह बदलकर द एलिप्स कर दी गई थी। नई जगह और रीगन एयरपोर्ट के पास मौजूद रेडियो रिसीवर के बीच सीधा संपर्क ठीक से काम नहीं कर रहा था। नतीजतन, हेलिकॉप्टर की रेडियो कॉल कंट्रोल टावर तक सही तरीके से नहीं पहुंच पा रही थी।
30 जुलाई की बैठक में तय किया गया था कि अगर रेडियो संपर्क नहीं हो पाए तो किसी दूसरे विमान या व्यक्ति के जरिए कंट्रोल टावर को मरीन वन की उड़ान की जानकारी दी जाएगी। 4 अगस्त को पायलटों ने ज्वाइंट बेस एनाकोस्टिया-बोलिंग के जरिए भी संदेश पहुंचाने की कोशिश की, लेकिन यह तरीका भी प्रभावी साबित नहीं हुआ। इसी दौरान यात्री विमान को टेकऑफ की मंजूरी दे दी गई।
250 फीट का अंतर
NTSB के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, दोनों विमानों के बीच सबसे कम क्षैतिज दूरी करीब 1.3 किलोमीटर रह गई थी। उनकी ऊंचाई में अंतर भी केवल 250 फीट था। यात्री विमान के टकराव से बचने वाले सिस्टम ने चेतावनी जारी की। मरीन वन के पायलटों ने भी यात्री विमान को देख लिया और कुछ देर रुक गए, जिससे दोनों विमान अलग हो गए।FAA के नियमों के अनुसार, ऐसे हालात में विमानों के बीच कम से कम 2.4 किलोमीटर की क्षैतिज दूरी या 500 फीट की ऊंचाई का अंतर होना चाहिए। इस घटना में दोनों मानकों से कम अंतर रह गया था।
घटना के बाद FAA की तकनीकी टीम ने रेडियो सिस्टम की जांच की और रिसीवर को रिहायशी इलाके से हटाकर रीगन एयरपोर्ट के कंट्रोल टावर के ऊपर स्थापित कर दिया। इसके बाद किए गए परीक्षणों में संचार व्यवस्था सामान्य पाई गई।
हादसे के बाद बढ़ी चिंता
यह घटना 29 जनवरी 2025 के रीगन नेशनल एयरपोर्ट हादसे के बाद सामने आई है, जिसमें एक यात्री विमान और अमेरिकी सेना के ब्लैक हॉक हेलिकॉप्टर की टक्कर में 67 लोगों की मौत हुई थी। उस हादसे के बाद एयरपोर्ट के आसपास हेलिकॉप्टर और यात्री विमानों की आवाजाही को लेकर सुरक्षा व्यवस्था और नियमों पर विशेष ध्यान दिया गया था। ऐसे में राष्ट्रपति के हेलिकॉप्टर से जुड़ी यह घटना सुरक्षा व्यवस्था पर फिर सवाल खड़े करती है।
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