Home » धर्म » Jyotish Niyam: महिलाओं का श्मशान घाट जाना क्यों है वर्जित, गरुड़ पुराण में छिपे हैं रहस्यमयी कारण

Jyotish Niyam: महिलाओं का श्मशान घाट जाना क्यों है वर्जित, गरुड़ पुराण में छिपे हैं रहस्यमयी कारण

Jyotish Niyam
Jyotish Niyam

Jyotish Niyam : भारतीय समाज में सदियों से कई ऐसी परंपराएं चली आ रही हैं, जिनका पालन तो लोग करते हैं, लेकिन उनके पीछे के कारणों को बहुत कम लोग जानते हैं। ऐसी ही एक परंपरा महिलाओं के श्मशान घाट जाने से जुड़ी है। अक्सर अंतिम संस्कार के समय पुरुषों को श्मशान ले जाया जाता है, जबकि महिलाओं को घर पर ही रहने की सलाह दी जाती है।

धार्मिक ग्रंथों और खासतौर पर गरुड़ पुराण में इस विषय को लेकर कई बातें बताई गई हैं। मान्यता है कि यह नियम केवल सामाजिक व्यवस्था के लिए नहीं बनाया गया था, बल्कि इसके पीछे मानसिक, आध्यात्मिक और पारिवारिक कारण भी जुड़े हुए हैं।

Jyotish Niyam

गरुड़ पुराण में महिलाओं को स्वभाव से अधिक भावुक और संवेदनशील बताया गया है। श्मशान घाट का वातावरण, परिजनों का विलाप और चिता का दृश्य मानसिक रूप से किसी को भी विचलित कर सकता है। मान्यता है कि महिलाओं पर इसका असर अधिक गहरा पड़ता है। इसी वजह से प्राचीन समय में महिलाओं को ऐसे वातावरण से दूर रखने की परंपरा बनाई गई थी, ताकि वे मानसिक आघात से बच सकें। हालांकि गरुड़ पुराण में यह भी उल्लेख मिलता है कि यदि परिवार में कोई पुरुष सदस्य मौजूद न हो, तो पत्नी, बेटी या बहन अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी निभा सकती हैं।

मृत आत्मा की शांति से भी जोड़ी जाती है मान्यता

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अंतिम संस्कार के दौरान अत्यधिक रोना या मोह प्रकट करना मृत आत्मा की शांति में बाधा बन सकता है। ऐसा माना जाता है कि जब परिवार के लोग अधिक विलाप करते हैं, तो आत्मा सांसारिक संबंधों से मुक्त नहीं हो पाती और उसकी आगे की यात्रा प्रभावित होती है क्योंकि महिलाओं को अधिक भावुक माना गया है, इसलिए यह धारणा बनी कि वे अपने आंसुओं और भावनाओं को नियंत्रित नहीं कर पाएंगी। इसी सोच के कारण उन्हें श्मशान घाट से दूर रखने की परंपरा लंबे समय तक समाज में बनी रही।

नकारात्मक ऊर्जा और सुरक्षा से जुड़ी मान्यताएं

हिंदू धर्म में श्मशान घाट को एक ऐसी जगह माना गया है, जहां नकारात्मक ऊर्जा और अधूरी आत्माओं का प्रभाव अधिक रहता है। धार्मिक दृष्टिकोण से महिलाओं की ऊर्जा को अधिक ग्रहणशील माना गया है। ऐसी मान्यता है कि श्मशान का वातावरण महिलाओं के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डाल सकता है। हालांकि आधुनिक विज्ञान इन बातों की पुष्टि नहीं करता, लेकिन पारंपरिक समाज में इन्हें गंभीरता से देखा जाता रहा है।

मुंडन संस्कार से भी जुड़ी है परंपरा

अंतिम संस्कार के बाद हिंदू रीति-रिवाजों में पुरुषों के मुंडन संस्कार की परंपरा भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसे शुद्धिकरण प्रक्रिया का हिस्सा समझा जाता है। वहीं महिलाओं के लिए बाल कटवाना परंपरागत रूप से उचित नहीं माना गया। इसी वजह से भी महिलाओं को अंतिम संस्कार की प्रक्रिया से अलग रखा गया। समय के साथ समाज में बदलाव जरूर आया है और अब कई जगहों पर महिलाएं भी अंतिम संस्कार में शामिल होने लगी हैं, लेकिन आज भी कई परिवार पुराने धार्मिक और सांस्कृतिक नियमों का पालन करते हैं।

(Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। Headlines India News किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है।)

Read More : Interesting Facts: रोटी के आटे पर उंगलियों के निशान, क्यों?

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments
Will the middle class get relief from the first general budget of Modi 3.0?