Iran US War : पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ईरान की नई चेतावनी ने एशिया के बड़े तेल आयातक देशों की चिंता बढ़ा दी है। ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई के सलाहकार याह्या रहीम सफावी ने कहा है कि अमेरिका या इजराइल की ओर से दोबारा हमला होने पर संघर्ष का दायरा हिंद महासागर और उससे आगे तक फैल सकता है। सफावी के मुताबिक लड़ाई फारस की खाड़ी और होर्मुज स्ट्रेट से निकलकर लाल सागर तक पहुंच चुकी है। हिंद महासागर पश्चिम एशिया को दक्षिण और पूर्वी एशिया से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण समुद्री क्षेत्र है।
भारत और चीन जैसे बड़े ऊर्जा आयातक देशों के लिए इस क्षेत्र से गुजरने वाले समुद्री रास्ते बेहद अहम हैं। संघर्ष का दायरा बढ़ने पर जहाजों की सुरक्षा, बीमा लागत और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर नई अनिश्चितता पैदा हो सकती है। होर्मुज पहले से ही वैश्विक तेल और गैस परिवहन के प्रमुख रास्तों में शामिल है।
Iran US War
युद्ध का असर इससे पहले हिंद महासागर में दिखाई दे चुका है। मार्च 2026 में अमेरिकी पनडुब्बी के हमले में ईरानी फ्रिगेट IRIS Dena श्रीलंका के दक्षिणी तट के पास डूब गया था। रॉयटर्स के मुताबिक इस हमले में 87 ईरानी नाविक मारे गए थे। यह जहाज भारत में हुए नौसैनिक अभ्यास में हिस्सा लेने के बाद लौट रहा था। ईरान की चेतावनी ऐसे समय आई है, जब राष्ट्रपति मसूद पजशकियान संयुक्त राष्ट्र महासभा के लिए न्यूयॉर्क पहुंचे हैं। अपने संबोधन में उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के रुख को दबाव और धमकी की राजनीति बताया। पजशकियान ने कहा कि ईरान दबाव के सामने नहीं झुकेगा, लेकिन उन्होंने संघर्ष समाप्त करने के लिए कूटनीति का रास्ता खुला रखने की बात भी कही।
ट्रम्प ने ईरान को दी चेतावनी
इससे एक दिन पहले ट्रम्प ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में ईरान को लेकर बेहद कड़ा बयान दिया था। उन्होंने कहा कि उनके सामने ईरान के साथ समझौता करने या उसके खिलाफ और विनाशकारी कार्रवाई करने का फैसला है। हालांकि इसी भाषण में उन्होंने समझौते की संभावना भी जताई। अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधियों के बीच न्यूयॉर्क में बातचीत भी हुई है। ट्रम्प के बयान के बाद ईरानी सशस्त्र बलों ने भी प्रतिक्रिया दी। ईरानी पक्ष ने आरोप लगाया कि अमेरिकी राष्ट्रपति संयुक्त राष्ट्र के मंच से ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को सही ठहराने की कोशिश कर रहे हैं। तेहरान लगातार कह रहा है कि अमेरिकी दबाव बढ़ने पर उसकी जवाबी कार्रवाई का स्वरूप भी बदल सकता है।
होर्मुज स्ट्रेट खोलने के लिए रखीं शर्तें
तनाव के बीच कूटनीतिक बातचीत भी जारी है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ के सामने होर्मुज स्ट्रेट दोबारा खोलने से जुड़ी शर्तें रखी हैं। ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक इनमें नौसैनिक नाकाबंदी हटाना, विदेशों में फ्रीज ईरानी संपत्तियों को जारी करना और दूसरे क्षेत्रीय मोर्चों पर युद्ध समाप्त करना शामिल है। होर्मुज स्ट्रेट फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और आगे हिंद महासागर से जोड़ता है। युद्ध से पहले दुनिया के तेल और एलएनजी व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री रास्ते से गुजरता था। इसलिए यहां किसी नए सैन्य टकराव या लंबे व्यवधान का असर केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि एशियाई ऊर्जा बाजार और वैश्विक सप्लाई चेन तक पहुंच सकता है।
बातचीत का रास्ता खुला
फिलहाल, ईरान की तरफ से हिंद महासागर को लेकर दिया गया बयान संभावित जवाबी कार्रवाई की चेतावनी है, न कि किसी नए सैन्य अभियान की घोषणा। दूसरी ओर न्यूयॉर्क में अमेरिका और ईरान के बीच संपर्क जारी है। ऐसे में आने वाले दिनों में नजर इस बात पर रहेगी कि दोनों देश तनाव को बातचीत से कम करते हैं या संघर्ष नए समुद्री इलाकों तक पहुंचता है।
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