IND vs NZ : क्रिकेट के मैदान पर भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुकाबला हमेशा रोमांचक रहता है। दोनों टीमों के खिलाड़ी जीत हासिल करने के लिए पूरी ताकत लगाते हैं, लेकिन इस बार मैदान पर खेल के साथ दोनों देशों की संस्कृति भी देखने को मिलेगी। न्यूजीलैंड क्रिकेट ने भारत के खिलाफ आगामी वनडे सीरीज के लिए एक विशेष जर्सी तैयार करवाई है। इस जर्सी में भारतीय कला और न्यूजीलैंड की पारंपरिक माओरी संस्कृति को एक साथ जगह दी गई है। कीवी खिलाड़ी वनडे सीरीज के दौरान इसी खास जर्सी में मैदान पर उतरेंगे।
न्यूजीलैंड क्रिकेट ने इस लिमिटेड एडिशन जर्सी का नाम ‘कोटाहितांगा ODI शर्ट’ रखा है। माओरी भाषा में कोटाहितांगा का संबंध एकता और साथ मिलकर आगे बढ़ने की भावना से है। जर्सी तैयार करने के पीछे भी यही सोच रखी गई है।
IND vs NZ
इसके डिजाइन में ऐसे प्रतीकों का इस्तेमाल हुआ है, जो भारत और न्यूजीलैंड की सांस्कृतिक पहचान को दर्शाते हैं। इस पहल के जरिए दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे संबंधों को सम्मान देने की कोशिश की गई है। इस जर्सी को तैयार करने में न्यूजीलैंड और भारत के तीन कलाकारों ने काम किया है। इनमें न्यूजीलैंड के बेन थॉमसन और गुजरात के शिव नारंदास तथा जय पंचा शामिल हैं। तीनों कलाकारों ने अपनी-अपनी कला परंपराओं से प्रेरणा लेकर जर्सी को नया रूप दिया है। डिजाइन तैयार करते समय इस बात का विशेष ध्यान रखा गया कि दोनों देशों की पहचान अलग-अलग नजर आने के साथ एक साझा संदेश भी दे।
पारंपरिक पैटर्न को मिली जगह
न्यूजीलैंड के कलाकार बेन थॉमसन ने जर्सी में माओरी कला के कोवाईव्हाई पैटर्न को शामिल किया है। यह पारंपरिक डिजाइन अपनी घुमावदार आकृतियों और विशेष कलात्मक शैली के लिए पहचाना जाता है। इसके जरिए न्यूजीलैंड की सांस्कृतिक विरासत को दर्शाने की कोशिश की गई है। साथ ही डिजाइन उन लोगों के योगदान को भी सम्मान देता है, जिन्होंने समय के साथ भारत और न्यूजीलैंड के संबंधों को मजबूत बनाने में भूमिका निभाई।
तीन प्रतीक भी शामिल
जर्सी के भारतीय हिस्से को तैयार करने में शिव नारंदास और जय पंचा ने योगदान दिया है। उन्होंने डिजाइन में कमल, भारतीय वास्तुकला से प्रेरित दोहराव वाले पैटर्न और मंडला को जगह दी है। कमल भारत का राष्ट्रीय फूल है, जबकि मंडला भारतीय कला परंपराओं में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। इन तीनों तत्वों को माओरी डिजाइन के साथ मिलाकर जर्सी को एक अलग पहचान दी गई है।
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इस खास जर्सी को तैयार करने की एक बड़ी वजह भारत और न्यूजीलैंड के बीच खेल संबंधों के 100 वर्ष पूरे होना है। साल 1926 में भारतीय सेना की हॉकी टीम ने न्यूजीलैंड का दौरा किया था। उस यात्रा ने दोनों देशों के खिलाड़ियों और स्थानीय समुदायों को एक-दूसरे के करीब आने का अवसर दिया था। अब एक सदी बाद न्यूजीलैंड क्रिकेट इसी ऐतिहासिक जुड़ाव को अपनी विशेष वनडे जर्सी के जरिए यादगार बनाने जा रहा है।
डिजाइन की सराहना
न्यूजीलैंड क्रिकेट के चीफ मार्केटिंग और कॉमर्शियल ऑफिसर ग्लेन क्रिचली ने इस पहल को लेकर खुशी जताई है। उन्होंने कलाकारों के काम की सराहना करते हुए कहा कि जर्सी में माओरी और भारतीय कलात्मक परंपराओं के बीच अच्छा संतुलन बनाया गया है। उनके मुताबिक, यह डिजाइन दोनों देशों के आपसी संबंधों को खूबसूरती से सामने लाता है। जर्सी तैयार करने वाले बेन थॉमसन ने बताया कि इस परियोजना के केंद्र में एकता की भावना रही है। उनका उद्देश्य ऐसा डिजाइन बनाना था, जो अलग-अलग संस्कृतियों को एक साथ जोड़ सके। इसी सोच के तहत जर्सी में भारत और न्यूजीलैंड की कलात्मक पहचान को शामिल किया गया। इस तरह खिलाड़ियों की पोशाक के जरिए दोनों देशों की दोस्ती का संदेश देने की कोशिश की गई है।
भारत का न्यूजीलैंड दौरा
भारतीय क्रिकेट टीम का न्यूजीलैंड दौरा 22 अक्टूबर से शुरू होना निर्धारित है। दौरे की शुरुआत पांच मैचों की टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज से होगी। इसके बाद दोनों देशों के बीच पांच वनडे मुकाबले खेले जाएंगे। न्यूजीलैंड की टीम वनडे सीरीज में विशेष रूप से तैयार की गई कोटाहितांगा जर्सी पहनकर मैदान पर उतरेगी। भारत और न्यूजीलैंड की टीमें मैदान पर एक-दूसरे को कड़ी चुनौती देती रही हैं। हालांकि इस बार वनडे सीरीज में खिलाड़ियों के प्रदर्शन के अलावा न्यूजीलैंड की विशेष जर्सी भी आकर्षण का केंद्र रहने वाली है। इस पहल के जरिए क्रिकेट प्रशंसकों को दोनों देशों के पुराने खेल संबंधों और सांस्कृतिक परंपराओं के बारे में जानने का अवसर मिलेगा।
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