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Gangotri National Park में पहली बार कैमरे में कैद हुआ हिमालयन वीजल, वन विभाग के लिए बड़ी सफलता

Himalayan Weasel
Himalayan Weasel

Gangotri National Park : उत्तराखंड के गंगोत्री नेशनल पार्क में एक अहम वैज्ञानिक उपलब्धि सामने आई है, जहां पहली बार हिमालयन वीजल की तस्वीरें ट्रैप कैमरे में कैद हुई हैं। यह खोज वन विभाग और शोधकर्ताओं के लिए बेहद खास मानी जा रही है। लंबे समय से इस जीव की मौजूदगी के संकेत तो मिल रहे थे, लेकिन इसकी स्पष्ट तस्वीरें अब जाकर सामने आई हैं, जिससे इस क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता का एक नया पहलू उजागर हुआ है।

वन अनुसंधान रेंज की टीम ने करीब 11 हजार फीट की ऊंचाई पर इस जीव को रिकॉर्ड किया है। जानकारी के मुताबिक, गंगोत्री नेशनल पार्क के साथ-साथ माणा और बदरीनाथ की पहाड़ियों में भी इसके होने के संकेत पहले मिल चुके थे।

Gangotri National Park

इसी आधार पर वैज्ञानिकों ने यहां ट्रैप कैमरे लगाए थे। कई दिनों की निगरानी के बाद मार्च महीने के अंत में इस दुर्लभ जीव की गतिविधियां कैमरे में दर्ज हुईं। इस पूरे अभियान को वन विभाग के अधिकारियों की निगरानी में अंजाम दिया गया। कैमरा ट्रैप लगाने, निगरानी और डेटा संग्रहण का काम रिसर्च टीम ने बारीकी से किया। जांच के दौरान कैमरे में कैद हुई तस्वीरों ने इस बात की पुष्टि कर दी कि हिमालयन वीजल इस इलाके में सक्रिय रूप से मौजूद है। यह उपलब्धि कई महीनों की मेहनत का नतीजा मानी जा रही है।

कैसा होता है हिमालयन वीजल?

हिमालयन वीजल एक छोटा लेकिन बेहद फुर्तीला मांसाहारी स्तनधारी जीव है, जिसे वैज्ञानिक भाषा में Mustela sibirica कहा जाता है। यह जीव आमतौर पर हिमालयी क्षेत्रों में 2500 से 4000 मीटर की ऊंचाई पर पाया जाता है। इसका स्वभाव काफी गुप्त होता है, इसलिए इसे देख पाना बेहद मुश्किल होता है। यही वजह है कि इसकी तस्वीरें मिलना वन्यजीव अध्ययन के लिए खास महत्व रखता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, हिमालयन वीजल पारिस्थितिकी तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह छोटे जानवरों और कृन्तकों की संख्या को नियंत्रित करता है, जिससे प्राकृतिक संतुलन बना रहता है। ऐसे जीवों की मौजूदगी किसी भी क्षेत्र की जैव विविधता के स्वस्थ होने का संकेत मानी जाती है।

वन विभाग ने जताई खुशी

वन विभाग के अधिकारियों ने इस उपलब्धि को बड़ी सफलता बताया है। उनका कहना है कि गंगोत्री नेशनल पार्क में इस जीव की रिकॉर्डिंग से यह साबित होता है कि यहां का पारिस्थितिक तंत्र अभी भी मजबूत और समृद्ध है। साथ ही, यह खोज भविष्य में होने वाले शोध कार्यों के लिए भी नई दिशा प्रदान करेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की खोजें वन्यजीव संरक्षण के प्रयासों को और मजबूत बनाती हैं। अब इस क्षेत्र में हिमालयन वीजल के व्यवहार, संख्या और आवास को लेकर विस्तृत अध्ययन किया जा सकेगा। इससे न केवल इस प्रजाति की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि पूरे हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र को समझने में भी मदद मिलेगी।

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