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UP की सत्ता में हिस्सेदारी तक, जानें कैसे बदली निषाद समाज की सियासी तस्वीर?

UP News : उत्तर प्रदेश की राजनीति में निषाद समाज अब केवल चुनाव के समय चर्चा में आने वाला सामाजिक समूह नहीं है। 2015 का कसरवल आंदोलन आज भी समुदाय की राजनीति का अहम संदर्भ है, जबकि मौजूदा दौर में निषाद पार्टी भाजपा की सहयोगी है और उसके अध्यक्ष संजय निषाद योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं। श्रृंगवेरपुर में निषादराज से जुड़ी विरासत को विकसित करने की सरकारी कोशिशों ने भी इस राजनीति को नया आयाम दिया है। 7 जून 2015 को गोरखपुर के सहजनवा क्षेत्र के कसरवल में निषाद समुदाय के लोग आरक्षण की मांग को लेकर रेलवे ट्रैक पर प्रदर्शन कर रहे थे।

पुलिस के अनुसार प्रदर्शन के दौरान हालात हिंसक हो गए और पुलिस कार्रवाई के बीच अखिलेश निषाद नाम के युवक की मौत हो गई। इसके बाद संजय निषाद और उनके समर्थकों के खिलाफ दंगा और तोड़फोड़ समेत विभिन्न आरोपों में मुकदमे दर्ज किए गए।

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कसरवल की घटना को संजय निषाद लगातार अपने राजनीतिक संघर्ष से जोड़ते रहे हैं और तत्कालीन समाजवादी पार्टी सरकार को जिम्मेदार ठहराते हैं। दूसरी तरफ इस घटना से जुड़े मुकदमे में संजय निषाद स्वयं भी आरोपी रहे और उन्होंने अदालत में आरोपों से इनकार किया। ऐसे में कसरवल को लेकर राजनीतिक दावों और कानूनी रिकॉर्ड के बीच अंतर करना जरूरी है। करीब 1 दशक बाद राजनीतिक तस्वीर काफी बदल चुकी है। निषाद पार्टी अब भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन का हिस्सा है और संजय निषाद उत्तर प्रदेश सरकार में मत्स्य विभाग के कैबिनेट मंत्री हैं।

2022 के विधानसभा चुनाव में निषाद पार्टी ने भाजपा के साथ गठबंधन में छह सीटें जीती थीं। कसरवल आंदोलन से पहचान बनाने वाले संजय निषाद का सरकार में शामिल होना निषाद राजनीति में आए बदलाव की महत्वपूर्ण कड़ी माना जाता है।

निषादराज की विरासत पर जोर

योगी सरकार ने निषाद समाज से जुड़ी सांस्कृतिक विरासत को भी अपनी राजनीतिक और विकास योजनाओं में जगह दी है। प्रयागराज के श्रृंगवेरपुर धाम में निषादराज पार्क विकसित किया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे भगवान राम और निषादराज की मित्रता का भव्य स्मारक बताया था। सरकार की तरफ से इस क्षेत्र को धार्मिक और पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की योजनाएं भी सामने आई हैं। अप्रैल 2025 में निषादराज गुहा जयंती के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्रृंगवेरपुर में प्रयागराज से जुड़ी 579 करोड़ रुपये की 181 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया था।

कार्यक्रम में निषादराज और भगवान राम से जुड़ी प्रदर्शनी भी लगाई गई। मुख्यमंत्री ने भाजपा और निषाद पार्टी के गठबंधन का उल्लेख करते हुए इसे राम और निषादराज की मित्रता से भी जोड़ा था।

सभी दलों की नजर

2027 के विधानसभा चुनाव से पहले निषाद समुदाय एक बार फिर राजनीतिक दलों के केंद्र में है। हाल में गोंडा के विनोद साहनी की मौत के बाद संजय निषाद ने अपनी ही गठबंधन सरकार से कार्रवाई की मांग करते हुए धरना दिया। समाजवादी पार्टी के नेता भी इस विरोध में शामिल हुए। इससे साफ है कि निषाद मतदाताओं तक पहुंच बनाने की कोशिश केवल भाजपा गठबंधन तक सीमित नहीं है। भाजपा जहां सत्ता में प्रतिनिधित्व, निषाद पार्टी के साथ गठबंधन और श्रृंगवेरपुर के विकास को सामने रखती है, वहीं समाजवादी पार्टी अपने पुराने राजनीतिक प्रतिनिधित्व और मौजूदा मुद्दों के जरिए समुदाय तक पहुंच बनाने की कोशिश कर रही है।

कसरवल के कुछ स्थानीय लोगों ने पहले यह भी कहा है कि आरक्षण से जुड़ी उनकी मूल मांग अब तक पूरी नहीं हुई। इसलिए 2027 में निषाद राजनीति केवल अतीत की घटनाओं पर नहीं, बल्कि प्रतिनिधित्व, आरक्षण और मौजूदा स्थानीय मुद्दों पर भी केंद्रित रहने की संभावना है।

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