Madhyaprdaesh News:- मध्यप्रदेश के जिले धार में भोजशाला को लेकर विवाद मचा हुआ था। जिसको लेकर प्रदेश की राजनीति में ऐसा पहली बार हुआ है कि इस बड़े विवाद को निपटने के लिए किसी भी मंत्री या संगठन के रणनीतिकार को मोर्चे पर तैनात नहीं होने दिया। इस पूरे भोजशाला के विवाद को निपटने के लिए पूरी जिम्मेदारी प्रशासनिक अधिकारियों पर छोड़ दी गई है। इस बार इस मामले को लेकर दोनों समुदायों के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत से इस समस्या का हल निकालने की कोशिश हो रही है।
इससे पहले भी तीन बार बसंत पंचमी पर धार में विवाद की स्थिति बन चुकी है। इस दौरान भी सरकार के मंत्री की भूमिका हमेशा रही, लेकिन मामला निपट जाने के बाद हिंदू समुदाय के प्रतिनिधियों ने भूमिका निभाने वाले रणनीतिकारों के प्रति नाराजगी जताई है। जिसके कारण इस बार किसी भी रणनीतिकारों को इसमें शामिल नहीं किया गया।
साल 2006 में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को मिली जिम्मेदारी
इस विवाद को लेकर इससे पहले साल 2006 में इसकी पूरी जिम्मेदारी मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को सौंप गई थी। इस दौरान भोजशाला को खाली करने को लेकर बहुत बड़ा विवाद हो गया था। इसके बाद आंसू गैस के गोले छोड़े गए थे। इसके बाद में साल 2012 में भी हालात बिगड़े जिसकी वजह से यहां लाठी चार्ज करना पड़ा था। इस लाठी चार्ज के दौरान तत्कालीन प्रभारी मंत्री महेंद्र हल्दिया जब भोजशाला समिति के घायल पदाधिकारी से भेंट करने अस्पताल गए थे। इस दौरान पदाधिकारी ने मंत्री के गले में हरा दुपट्टा डालते हुए इस फैसले को लेकर नाराजगी जताई थी।
इसके बाद जब साल 2016 में स्थिति बिगड़ी तो सांकेतिक नमाज का रास्ता निकाला गया और भोजशाला समिति का जुलूस आते ही अफसर ने प्रवेश दिया। रणनीति तत्कालीन मंत्री नरोत्तम मिश्रा और संगठन महामंत्री रहे अरविंद मेमन ने तैयार की थी। जिसके बाद वह पूरा दिन यहां पर धार के सर्किट हाउस में रुके रहे ताकि स्थितियों का मुआयना कर सके।
इस बार कोई मंत्री शामिल नहीं
इस विवाद को लेकर इस बार धार में किसी भी मंत्री को जिम्मेदारी नहीं सौंप गई है। हालांकि धार के प्रभारी मंत्री कैलाश विजयवर्गीय है, लेकिन उनके घर में किसी का निधन हो जाने की वजह से वह अवकाश पर है। वहीं भाजपा संगठन की तरफ से भी यहां कोई पदाधिकारी नहीं आया है। इस बार पूरी जिम्मेदारी अफसर को सौंप दी गई है।
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