Delhi Building Collapse : दिल्ली के सत्य निकेतन में रविवार दोपहर एक हॉस्टल की इमारत अचानक भरभराकर गिर गई। हादसे में अब तक छह लोगों की मौत की सूचना है। घटना के वक्त इमारत में मौजूद रहे या कुछ देर पहले वहां से निकले छात्रों ने जो बताया, उससे हादसे से पहले की स्थिति को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। कुछ छात्रों का कहना है कि गिरने से पहले इमारत की दीवारों से दरकने जैसी आवाजें सुनाई दे रही थीं। हादसे के बाद हॉस्टल से सुरक्षित बाहर निकले छात्रों के लिए यह घटना किसी डरावने अनुभव से कम नहीं थी। कुछ छात्रों ने बताया कि वे इमारत गिरने से महज 10 से 20 मिनट पहले बाहर निकले थे। जब वे वापस लौटे तो जिस जगह कुछ देर पहले कमरे और गलियां थीं, वहां मलबे का ढेर पड़ा था।
हॉस्टल के आसपास रहने वाले मोहम्मद यासीन ने बताया कि वह घटना से एक रात पहले अपने दोस्त वारिस के साथ हॉस्टल में रुके थे। उनके मुताबिक दोपहर करीब 12 बजे उठने के बाद वारिस ने इमारत की दीवारों में दरारें आने और दरकने जैसी आवाजें सुनाई देने की बात कही थी।
Delhi Building Collapse
यासीन ने बताया कि इसके बाद दोनों कुछ देर के लिए बाहर चले गए। करीब 20 मिनट बाद लौटे तो इमारत ढह चुकी थी। उन्होंने बताया कि उनके कुछ दोस्त भी मलबे में दब गए थे और घायल अवस्था में अस्पताल ले जाए गए। यासीन के मुताबिक, अगर वे उस समय हॉस्टल में ही रुक जाते तो उनके साथ भी बड़ा हादसा हो सकता था। वारिस के मुताबिक वह करीब एक महीने पहले ही इस हॉस्टल में रहने आया था। उसके अनुसार इमारत में करीब 13 से 14 लोग रहते थे। पांच मंजिला इमारत के प्रत्येक फ्लोर पर दो कमरे थे और कमरों में दो से तीन छात्र रहते थे।
वारिस ने बताया कि हादसे से पहले करीब एक घंटे तक दीवारों से दरकने जैसी आवाजें आ रही थीं। उसने बताया कि वहां लगभग एक सप्ताह से निर्माण कार्य भी चल रहा था। उसके मुताबिक, उस समय कुछ छात्र बाहर निकल गए थे और इसके थोड़ी देर बाद ही इमारत गिर गई।
जन्माष्टमी की छुट्टी से बच गए कई छात्र
हबीब खान ने बताया कि जन्माष्टमी की छुट्टी के चलते कॉलेज तीन दिन से बंद था, इसलिए वह शाहीन बाग चला गया था। उसे रविवार शाम वापस हॉस्टल लौटना था। हादसे की जानकारी मिलने के बाद उसने कहा कि अगर वह उस समय हॉस्टल में मौजूद होता तो स्थिति बेहद खतरनाक हो सकती थी। उसके मुताबिक हॉस्टल में करीब 14 छात्र रह रहे थे। नीचे निर्माण कार्य चल रहा था और कुछ मजदूरों के भी मलबे में फंसे होने की जानकारी सामने आई। आसपास के कुछ लोग भी हादसे की चपेट में आए।
आर.के. पुरम की अत्यंत दुखद घटना में घायल छात्रों के उपचार और स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी एम्स ट्रॉमा सेंटर में डॉक्टरों से ली।
सभी छात्र एम्स के चिकित्सकों की देखरेख में हैं और उनका उपचार जारी है। डॉक्टरों की टीम को हर आवश्यक चिकित्सा सहायता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।…
— Rekha Gupta (@gupta_rekha) September 6, 2026
चिंता का विषय
सत्य निकेतन की संकरी गलियों में बड़ी संख्या में हॉस्टल और पीजी संचालित होते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई पुराने मकानों को समय के साथ कई मंजिल तक बढ़ाकर छात्रों के लिए इस्तेमाल किया जाने लगा है। हादसे के बाद इलाके में रहने वाले लोगों ने ऐसी इमारतों की सुरक्षा और निर्माण की निगरानी पर सवाल उठाए हैं। स्थानीय निवासी प्रियंका के मुताबिक इलाके में कई पुराने मकानों को पांच-छह मंजिल तक बढ़ाकर पीजी में बदला गया है। उनका दावा है कि कई मकान मालिक खुद यहां नहीं रहते और किराये के जरिए संपत्ति से आय लेते हैं। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
#WATCH | दिल्ली | दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन के पास एक इमारत ढह गई है। फायर डिपार्टमेंट को दोपहर करीब 1:30 बजे सूचना मिली; आशंका है कि मलबे के नीचे कई लोग फंसे हो सकते हैं। फायर डिपार्टमेंट की टीमें मौके पर पहुंच गई हैं और बचाव कार्य जारी है। स्थिति स्पष्ट होने पर और… pic.twitter.com/ZHeJ8nj4rd
— ANI_HindiNews (@AHindinews) September 6, 2026
स्थानीय लोगों ने स्ट्रक्चरल ऑडिट की मांग की
हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने सत्य निकेतन की पुरानी और बहुमंजिला इमारतों का स्ट्रक्चरल ऑडिट कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि रिहायशी इलाके में संचालित पीजी और हॉस्टल वाली इमारतों की सुरक्षा जांच नियमित रूप से होनी चाहिए। भाजपा विधायक अनिल शर्मा ने बताया कि मलबे में फंसे लोगों की ओर से फोन आने की जानकारी मिली थी और राहत दल उनके संपर्क में थे। पुलिस ने लोगों से घटनास्थल से दूरी बनाए रखने की अपील की, ताकि बचाव दल और एंबुलेंस को आने-जाने में परेशानी न हो।
छात्रों का बड़ा ठिकाना
सत्य निकेतन दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के करीब स्थित प्रमुख छात्र इलाकों में शामिल है। आसपास कई कॉलेज होने के कारण यहां बड़ी संख्या में देश के अलग-अलग हिस्सों से छात्र रहने आते हैं। वेंकटेश्वर कॉलेज, आर्यभट्ट कॉलेज, मोतीलाल नेहरू कॉलेज और मैत्रेयी कॉलेज जैसे संस्थान इसके आसपास हैं। इसी वजह से इलाके में पीजी, हॉस्टल, कैफे और रेस्तरां का कारोबार तेजी से बढ़ा है। दुर्गाबाई देशमुख साउथ कैंपस मेट्रो स्टेशन की नजदीकी भी इसे छात्रों के लिए सुविधाजनक बनाती है। अब हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि ऐसे इलाकों में छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पुराने भवनों और अनधिकृत निर्माण पर कितनी सख्ती से निगरानी की जाती है।
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