Gateway to Hell : World Tour पर निकलने वाले लोगों के लिए दुनिया में ऐसी कई जगहें हैं, जहां पहुंचकर उन्हें अपनी आंखों पर भरोसा करना मुश्किल हो जाता है। कुछ जगहें प्राकृतिक खूबसूरती के कारण सुकून देती हैं तो कुछ अपने अजीबोगरीब नजारों और रहस्यों से रोमांच पैदा करती हैं। अगर आपको भी सामान्य पर्यटन स्थलों से अलग कुछ देखने का शौक है, तो तुर्कमेनिस्तान का एक स्थान आपको हैरान कर सकता है। यहां रेगिस्तान के बीच जमीन में बना एक विशाल गड्ढा लगातार आग उगलता नजर आता है। दिन हो या रात, यहां से उठती लपटें ऐसा दृश्य बनाती हैं, मानो धरती के भीतर कोई दूसरी दुनिया मौजूद हो। तुर्कमेनिस्तान में स्थित दरवाजा गैस क्रेटर को दुनियाभर में ‘गेटवे टू हेल’ यानी ‘नरक का दरवाजा’ कहा जाता है।
यह काराकुम रेगिस्तान के दरवेज गांव के पास मौजूद है और राजधानी अश्गाबात से करीब 260 किलोमीटर की दूरी पर बताया जाता है। रात के अंधेरे में क्रेटर से निकलती नारंगी रंग की लपटें दूर से ही दिखाई देने लगती हैं, जिससे इसका नाम और भी रहस्यमयी लगने लगता है।
Gateway to Hell
इस गड्ढे के बनने की सबसे प्रचलित कहानी 1971 की मानी जाती है। उस समय सोवियत भूवैज्ञानिक क्षेत्र में प्राकृतिक गैस की तलाश कर रहे थे। ड्रिलिंग के दौरान जमीन का एक हिस्सा धंस गया और उसके नीचे मौजूद गैस बाहर निकलने लगी। जहरीली गैस के फैलाव को रोकने के लिए गड्ढे में आग लगा दी गई। वैज्ञानिकों को उम्मीद थी कि कुछ समय बाद गैस खत्म हो जाएगी और आग अपने आप बुझ जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। दरवाजा क्रेटर में आग लंबे समय तक जलने की वजह इसके नीचे मौजूद प्राकृतिक गैस को माना जाता है।
▪️69 m genişliğinde ve 30 m derinliğinde.
▪️Türkmenistan’ın %70’ini kaplayan Karakum Çölü’nün tam ortasında.
▪️Doğalgaz arama çalışmaları sırasında ateşe verilen bir mağaranın çökmesi nedeniyle oluştuğu sanılıyor.🔥 48 yıldır hiç sönmeden yanan Darvaza Krateri’ni izleyin. pic.twitter.com/rkITPhvZvT
— Tıkla HABER (@TiklaHaber_com) April 17, 2019
इसकी उत्पत्ति और आग के लगातार जलने को लेकर कई दावे किए जाते हैं। तुर्कमेनिस्तान के कुछ स्थानीय लोगों के मुताबिक क्रेटर के बनने और आग पकड़ने की समय-सीमा अलग रही है। यही वजह है कि इसके इतिहास को लेकर आज भी पूरी तरह एकमत जानकारी नहीं मिलती।
हैरान करने वाला जीवन
इतने ज्यादा तापमान में किसी जीव के जिंदा रहने की कल्पना करना मुश्किल है, लेकिन इस जगह पर हुई वैज्ञानिक जांच ने दिलचस्प संकेत दिए। क्रेटर की मिट्टी से लिए गए नमूनों में ऐसे सूक्ष्मजीवों की मौजूदगी सामने आई, जो बेहद कठिन परिस्थितियों में भी जीवित रह सकते हैं। इस खोज ने वैज्ञानिकों के लिए भी इस जगह को और महत्वपूर्ण बना दिया। 2013 में एडवेंचर एक्सप्लोरर जॉर्ज कौरौनिस ने दरवाजा गैस क्रेटर के अंदर उतरकर दुनिया का ध्यान खींचा।
इतनी खतरनाक जगह पर जाने के लिए उन्होंने विशेष सुरक्षा पोशाक और सांस लेने के उपकरणों का इस्तेमाल किया। अंदर का अनुभव बताते हुए उन्होंने इसकी तुलना दूसरे ग्रह जैसे माहौल से की थी। वह वहां से मिट्टी के नमूने भी लेकर आए, जिनकी बाद में वैज्ञानिकों ने जांच की।
पर्यटकों के लिए आकर्षण
कभी गैस दुर्घटना के बाद बने इस गड्ढे को आज तुर्कमेनिस्तान की पहचान से जोड़कर देखा जाता है। यहां आने वाले पर्यटकों की सुरक्षा के लिए क्रेटर के आसपास सुरक्षा व्यवस्था की गई है और देखने के लिए निर्धारित स्थान भी बनाए गए हैं। आग की लपटों से घिरा यह विशाल गड्ढा अब दुनिया की उन अनोखी जगहों में शामिल है, जहां प्राकृतिक गैस, विज्ञान और रहस्य एक साथ नजर आते हैं। दरवाजा गैस क्रेटर को लेकर सबसे दिलचस्प बात यही है कि इसके बनने और आग के लगातार जलते रहने की कहानी में आज भी कई सवाल बाकी हैं।
यही रहस्य इसे सामान्य पर्यटन स्थल से अलग बनाता है। काराकुम रेगिस्तान के बीच धधकता यह गड्ढा इस बात की याद दिलाता है कि हमारी पृथ्वी के भीतर अब भी ऐसे कई रहस्य छिपे हैं, जिन्हें विज्ञान लगातार समझने की कोशिश कर रहा है।
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