Kanpur Zoo : विश्व सिंह दिवस (World Lion Day) के मौके पर कानपुर प्राणी उद्यान ने एशियाई शेरों का कुनबा बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है। जू प्रशासन अब यहां मौजूद वयस्क एशियाटिक शेर ‘शंकर’ के लिए नई शेरनी लाने की कवायद में जुटा है। इसके लिए एनिमल एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत अनुमति मिलने का इंतजार किया जा रहा है। मंजूरी मिलते ही नई शेरनी को कानपुर जू लाया जाएगा। कानपुर जू के वरिष्ठ वन्यजीव चिकित्सक डॉ. नासिर ने बताया कि चिड़ियाघर में शेरों का इतिहास काफी पुराना है।
वर्ष 2014 में हैदराबाद जू से ‘लक्ष्मी’ और ‘विष्णु’ नाम की शेरों की जोड़ी कानपुर लाई गई थी। करीब एक साल बाद दोनों को शासन के आदेश पर इटावा लायन सफारी भेज दिया गया। वहां पहुंचने के कुछ महीने बाद दोनों कैनाइन डिस्टेंपर वायरस की चपेट में आ गए और इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
Kanpur Zoo
शेरों का बाड़ा खाली होने के बाद वर्ष 2015 में कानपुर जू ने रायपुर के नंदनवन जू से टाइगर ‘बादशाह’ और ‘चित्रा’ दिए। बदले में कानपुर को शेर ‘अजय’ और शेरनी ‘नंदिनी’ मिले। दोनों के आने के बाद जू में शेरों का कुनबा बढ़ा। नंदिनी ने पहले एक मादा शावक को जन्म दिया, जिसे हाथ से देखभाल कर बड़ा किया गया और बाद में तिरुपति जू भेज दिया गया। इसके बाद नंदिनी ने दो और शावकों को जन्म दिया, जिनके नाम ‘उमा’ और ‘शंकर’ रखे गए। दोनों आज भी कानपुर जू में मौजूद हैं। हालांकि, नर शेर अजय की 18 साल 5 महीने की उम्र में मौत हो चुकी है। वहीं शेरनी नंदिनी 16 साल से अधिक उम्र की हो चुकी है और अब वृद्ध अवस्था में है।
अलग रखे जाते हैं शंकर और उमा
जू प्रशासन के मुताबिक नंदिनी की संतान उमा और शंकर भाई-बहन हैं। ऐसे में आपसी ब्रीडिंग यानी इनब्रीडिंग को रोकने के लिए दोनों को अलग रखा जाता है। इसी वजह से शंकर के लिए अब दूसरे चिड़ियाघर से नई शेरनी लाने की योजना बनाई जा रही है। डॉ. नासिर के मुताबिक कानपुर जू में मौजूद शेर एशियाटिक प्रजाति के हैं। नई शेरनी आने के बाद शंकर के साथ ब्रीडिंग प्लान को आगे बढ़ाया जाएगा। यदि नए जोड़े से शावकों का जन्म होता है, तो उनका नाम इंटरनेशनल स्टडबुक में दर्ज कराने का प्रयास किया जाएगा। इससे कानपुर जू की एशियाई शेरों के संरक्षण और प्रजनन कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय पहचान मजबूत होने की उम्मीद है।
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