Lucknow News : उत्तर प्रदेश की राजधानी Lucknow स्थित Dr. Bhimrao Ambedkar Samajik Parivartan Sthal अब एक नए रूप में लोगों के सामने आ रहा है। योगी आदित्यनाथ सरकार ने यहां अत्याधुनिक लाइट एंड साउंड शो की शुरुआत की है। इस शो के जरिए डॉ. भीमराव अंबेडकर के जीवन से जुड़े अहम पड़ावों को बेहद प्रभावशाली अंदाज में पेश किया जाएगा। इसमें उनके बचपन, शिक्षा, सामाजिक संघर्ष और भारतीय संविधान निर्माण में निभाई गई भूमिका को आधुनिक तकनीक के माध्यम से दिखाया जाएगा।

इस प्रोजेक्ट को खास विजुअल इफेक्ट्स, बैकग्राउंड म्यूजिक और डिजिटल तकनीक की मदद से तैयार किया गया है ताकि दर्शक बाबा साहेब के जीवन को महसूस कर सकें। शो के दौरान उनकी जिंदगी के कई महत्वपूर्ण प्रसंगों को बड़े पर्दे और लेजर इफेक्ट्स के जरिए दिखाया जाएगा।
Lucknow में अंबेडकर स्मारक
दरअसल, सरकार का उद्देश्य नई पीढ़ी को संविधान निर्माता के संघर्ष और विचारों से जोड़ना बताया जा रहा है। इस हाईटेक प्रोजेक्ट को Lucknow Development Authority ने तैयार कराया है। बताया जा रहा है कि इस पर करीब 18.5 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। लंबे समय से इस प्रोजेक्ट पर काम चल रहा था और अब इसे आम लोगों के लिए खोल दिया गया है। प्रशासन का मानना है कि इससे स्मारक में आने वाले पर्यटकों की संख्या भी बढ़ेगी।
मायावती सरकार में बना था स्मारक
इस स्मारक का इतिहास भी राजनीतिक और सामाजिक रूप से काफी अहम माना जाता है। वर्ष 1995 में जब Mayawati पहली बार उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बनी थीं, तब इस पार्क की आधारशिला रखी गई थी। शुरुआती दौर में इसका नाम डॉ. भीमराव अंबेडकर उद्यान रखा गया था। बाद में इसे डॉ. भीमराव अंबेडकर सामाजिक परिवर्तन स्थल नाम दिया गया। वर्ष 2007 में पूर्ण बहुमत की सरकार बनने के बाद इसे और भव्य रूप दिया गया।
Grand Light and Sound Show, showcasing Dr B R Ambedkar life journey, started at the Ambedkar Memorial Park in Lucknow 🔥😍 pic.twitter.com/Gwddr72QQV
— Lucknow Index (@lucknow_index) May 6, 2026
स्मारक परिसर में सिर्फ बाबा साहेब की ही नहीं, बल्कि कई अन्य समाज सुधारकों की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं। यहां Jyotirao Phule, Narayana Guru और Shahuji Maharaj जैसी महान हस्तियों की मूर्तियां मौजूद हैं। यही वजह है कि यह स्थल सामाजिक न्याय और दलित चेतना का प्रतीक माना जाता है।
चुनावी नजरिए से भी देखा जा रहा फैसला
राजनीतिक गलियारों में सरकार के इस कदम को आगामी विधानसभा चुनावों से जोड़कर भी देखा जा रहा है। उत्तर प्रदेश में दलित वोट बैंक काफी प्रभावशाली माना जाता है। पिछले कुछ वर्षों में दलित वोटों का समीकरण तेजी से बदला है। ऐसे में भाजपा की कोशिश सामाजिक और सांस्कृतिक प्रतीकों के जरिए इस वर्ग तक अपनी पकड़ मजबूत करने की मानी जा रही है उत्तर प्रदेश में 2027 की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में सभी राजनीतिक दल अपनी रणनीति मजबूत करने में जुटे हुए हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अंबेडकर स्मारक में शुरू हुआ यह शो केवल सांस्कृतिक पहल नहीं बल्कि सामाजिक और राजनीतिक संदेश देने की भी कोशिश है।
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