Agra Ramleela : आगरा की ऐतिहासिक रामलीला को इस वर्ष और भव्य स्वरूप देने की तैयारियां तेज हो गई हैं। श्री रामलीला कमेटी ने इस बार सिकंदरा स्थित भावना एस्टेट से जुड़े केके नगर, बाबरपुर और आसपास के क्षेत्रों में जनकपुरी सजाने का फैसला किया है। इसी के साथ बाबरपुर का नाम बदलकर ‘जनकपुरी’ करने की पहल भी शुरू हो गई है। क्षेत्रीय पार्षद की ओर से इस संबंध में नगर निगम को प्रस्ताव भेजा गया है, जिसे स्थानीय लोगों का व्यापक समर्थन मिल रहा है।
नाम परिवर्तन को लेकर क्षेत्र में कई विकल्पों पर चर्चा हुई थी। ‘सीता नगरी’ और ‘मिथिला नगरी’ जैसे नाम भी सामने आए, लेकिन अधिकांश लोगों ने ‘जनकपुरी’ को सबसे उपयुक्त बताया।
Agra Ramleela
स्थानीय निवासियों का कहना है कि जब उनके क्षेत्र में हर वर्ष भगवान श्रीराम की बारात का स्वागत और जनकपुरी महोत्सव आयोजित होता है, तो क्षेत्र की पहचान भी उसी नाम से होनी चाहिए। इसी सहमति के आधार पर पार्षद को नाम परिवर्तन का प्रस्ताव सौंपा गया। क्षेत्रीय पार्षद वेद प्रकाश गोस्वामी ने बताया कि प्रस्ताव नगर निगम को भेज दिया गया है। नगर निगम सदन की बैठक में इसे पेश किया जाएगा और मंजूरी मिलने के बाद बाबरपुर की नई पहचान ‘जनकपुरी’ के रूप में स्थापित हो जाएगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रक्रिया पूरी होने के बाद क्षेत्र का नाम आधिकारिक अभिलेखों में भी दर्ज किया जाएगा और लोग इसे बाबरपुर जनकपुरी के नाम से जानेंगे।
संगठनों ने किया स्वागत
नाम परिवर्तन के प्रस्ताव का व्यापारिक और सामाजिक संगठनों ने भी स्वागत किया है। नेशनल चैंबर ऑफ इंडस्ट्रीज एंड कॉमर्स के अध्यक्ष मनोज बंसल ने कहा कि ‘जनकपुरी’ ऐसा नाम है जो रामलीला की परंपरा से सीधे जुड़ता है और लोगों की जुबान पर आसानी से आ जाएगा। वहीं संस्था के पूर्व अध्यक्ष संजय गोयल ने कहा कि जब भगवान श्रीराम की बारात यहां पहुंचेगी तो उसका स्वागत जनकपुरी में होना इस आयोजन की गरिमा को और बढ़ाएगा। स्थानीय नागरिकों का भी मानना है कि यह नाम क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को नई मजबूती देगा।
मिलेगा नया आयाम
गणपति आशियाना के निवासी अशोक गुप्ता समेत कई लोगों का कहना है कि उनके क्षेत्र में जनकपुरी महोत्सव का आयोजन होना अपने आप में गौरव की बात है। ऐसे में क्षेत्र का नाम भी जनकपुरी होना पूरी तरह उपयुक्त है। यदि नगर निगम से प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाती है तो यह बदलाव न सिर्फ रामलीला की परंपरा को नया आयाम देगा, बल्कि आगरा की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत से इस क्षेत्र की पहचान भी स्थायी रूप से जुड़ जाएगी।
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