China Border Strategy : अरुणाचल प्रदेश से सटी वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पास चीन की गतिविधियों को लेकर नई चिंताएं सामने आई हैं। एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीन सीमावर्ती इलाकों में तिब्बती आबादी को बसाकर क्षेत्र में अपनी मौजूदगी मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। इस कदम से सीमा के आसपास जनसांख्यिकीय बदलाव के साथ चीन की रणनीतिक स्थिति भी मजबूत हो सकती है।
बता दें कि इंडिया नैरेटिव में प्रकाशित रिपोर्ट भारतीय सेना की दक्षिण-पश्चिमी, पूर्वी और मध्य कमान के पूर्व कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) अभय कृष्ण के आकलन पर आधारित है। रिपोर्ट के मुताबिक, चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र (TAR) में चलाए जा रहे ‘बॉर्डर विलेज प्रोग्राम’ के तहत 2,41,835 लोगों को शामिल किया गया है।
China Border Strategy
आकलन में आशंका जताई गई है कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य केवल आर्थिक विकास नहीं, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों में चीन के दावों को मजबूत करना भी हो सकता है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीन सीमा के किनारे स्थित 628 गांवों के निवासियों को LAC के नजदीक अलग-अलग स्थानों पर बसाने की कोशिश कर रहा है। लेफ्टिनेंट जनरल अभय कृष्ण के आकलन के अनुसार, इस तरह की पहल से संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों में चीन की रणनीतिक और सैन्य मौजूदगी को मजबूती मिल सकती है।
रिपोर्ट में यह आशंका भी जताई गई है कि सीमावर्ती इलाकों के युवाओं को प्रभावित करने और उनके बीच भारत विरोधी भावनाएं बढ़ाने की कोशिश की जा सकती है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।
ढांचा बढ़ा सकते हैं चीन की पहुंच
अभय कृष्ण के आकलन में कहा गया है कि भारत के लिए चिंता केवल तिब्बती नागरिकों को बसाने तक सीमित नहीं है। इसके साथ सड़कों, परिवहन सुविधाओं और अन्य बुनियादी ढांचे का विस्तार भी महत्वपूर्ण है। ऐसे निर्माण से चीन को सीमावर्ती इलाकों तक पहुंचने, सैन्य संसाधन पहुंचाने और आपूर्ति मार्ग बेहतर करने में मदद मिल सकती है।
रिपोर्ट के अनुसार, चीन के लगभग 72 प्रतिशत ‘शियाओकांग’ सीमावर्ती गांव भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र में LAC के पास स्थित हैं। इनमें से करीब 90 प्रतिशत बस्तियां अरुणाचल प्रदेश की ओर बताई गई हैं। इन आंकड़ों के आधार पर रिपोर्ट में सीमावर्ती विकास कार्यक्रमों के संभावित रणनीतिक प्रभावों पर चिंता जताई गई है।
बढ़ रहा तैयारी
चीन की गतिविधियों के बीच भारत भी सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे और सैन्य क्षमता को मजबूत करने पर काम कर रहा है। रिपोर्ट में सीमावर्ती गांवों को विकसित करने और आबादी बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया गया है।
लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) अभय कृष्ण ने सुझाव दिया है कि केंद्र सरकार अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और लद्दाख की सरकारों के साथ मिलकर LAC के पास बस्तियां विकसित करने के लिए उपयुक्त स्थानों की पहचान करे। रिपोर्ट के मुताबिक, सीमावर्ती इलाकों में बुनियादी सुविधाओं और स्थानीय आबादी को मजबूत करना भारत की दीर्घकालिक सुरक्षा रणनीति का अहम हिस्सा हो सकता है।
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