Flydubai Mystery Pilots : दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान में 30 सितंबर को हुई घटना के चार दिन बाद भी उन दो पायलटों की पहचान सामने नहीं आई है, जिन्होंने मुश्किल समय में विमान का कंट्रोल संभाला था। भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार पर ओमानी को-पायलट के कथित हमले के बाद दोनों पायलट कॉकपिट में पहुंचे थे। इसके बाद विमान को सुरक्षित लैंड कराने में उन्होंने अहम भूमिका निभाई। एयरलाइन ने अभी तक दोनों के नाम सार्वजनिक नहीं किए हैं। घटना के दौरान कैप्टन स्मित मच्छार पर कथित तौर पर कुल्हाड़ी से हमला किया गया था।
हमले में घायल होने के बावजूद उन्होंने कॉकपिट का दरवाजा खोलने में कामयाबी हासिल की। इसके बाद यात्रियों को स्थिति संभालने का मौका मिला। यात्रियों ने आरोपी को-पायलट को कॉकपिट से बाहर निकालकर काबू किया, जबकि गंभीर रूप से घायल कैप्टन विमान के फर्श पर पड़े थे।
Flydubai Mystery Pilots
इसी अफरा-तफरी के बीच विमान में यात्रा कर रहे दो पायलट तेजी से आगे आए। इनमें से एक भीड़ के बीच से निकलकर कॉकपिट तक पहुंचा और विमान का कंट्रोल अपने हाथ में ले लिया। कुछ ही देर बाद दूसरा पायलट भी अंदर पहुंच गया। इसके बाद दोनों ने कॉकपिट का दरवाजा अंदर से बंद कर दिया और विमान को संभालना शुरू किया।
यात्रियों के लिए ये कुछ पल बेहद तनावपूर्ण थे। उन्हें यह तो पता था कि विमान के नियमित पायलटों के साथ कॉकपिट में गंभीर घटना हुई है, लेकिन अचानक कंट्रोल संभालने वाले दोनों लोगों के बारे में उनके पास कोई जानकारी नहीं थी। इसी वजह से कुछ यात्रियों को डर था कि कहीं विमान हाईजैक तो नहीं हो गया।
पायलटों की पहचान सार्वजनिक नहीं
विमान में मौजूद यात्री डैनियल श्लिच्टर के मुताबिक, एक समय उनके मन में यह आशंका भी पैदा हुई कि विमान को ईरान की तरफ ले जाया जा सकता है। हालांकि, बाद में साफ हुआ कि कॉकपिट में पहुंचे दोनों लोग प्रशिक्षित पायलट थे और विमान को सुरक्षित जगह तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे थे। फ्लाईदुबई ने दोनों पायलटों की पहचान सार्वजनिक नहीं की है। एयरलाइन की ओर से इतना बताया गया कि वे विमान में यात्रा कर रहे क्रू मेंबर थे। दोनों उस समय फ्लाइट ऑपरेट नहीं कर रहे थे, लेकिन उन्हें आगे की उड़ान संबंधी ड्यूटी के लिए यात्रा कराई जा रही थी।
फ्लाइट में यात्रा
एविएशन इंडस्ट्री में ऐसी व्यवस्था को आमतौर पर ‘डेडहेडिंग’ कहा जाता है। इसमें पायलट या अन्य क्रू मेंबर यात्री के तौर पर एक स्थान से दूसरे स्थान तक सफर करते हैं, ताकि वहां पहुंचने के बाद दूसरी निर्धारित उड़ान में अपनी ड्यूटी संभाल सकें। हर फ्लाइट में अतिरिक्त पायलट मौजूद हों, ऐसा जरूरी नहीं है। इस उड़ान में दो प्रशिक्षित पायलटों का मौजूद होना संयोग से बेहद महत्वपूर्ण साबित हुआ। यात्रियों के मुताबिक, इन पायलटों को तेल अवीव पहुंचने के बाद विमान को वापस दुबई लाने की जिम्मेदारी निभानी थी। इसी कारण वे उस फ्लाइट में यात्रा कर रहे थे। अगर वे विमान में मौजूद नहीं होते तो घायल कैप्टन और काबू किए जा चुके को-पायलट के बाद विमान को तुरंत संभालने की स्थिति और मुश्किल हो सकती थी।
मिस्ट्री पायलट
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, यात्रियों ने आरोपी को-पायलट को कॉकपिट से बाहर खींचने और उसे काबू करने में मदद की। इसी दौरान पहले पायलट ने लोगों के बीच से रास्ता बनाकर कॉकपिट में प्रवेश किया। उसके पीछे दूसरा पायलट पहुंचा और दोनों ने मिलकर विमान का नियंत्रण संभाल लिया। घटना के चार दिन बाद भी इन दोनों पायलटों के नाम सामने नहीं आने के कारण उन्हें लेकर उत्सुकता बनी हुई है। विमान में उनकी मौजूदगी सामान्य यात्रियों की तरह थी, लेकिन आपात स्थिति पैदा होते ही उनका प्रशिक्षण काम आया। फिलहाल, एयरलाइन ने उनके नाम या व्यक्तिगत जानकारी सार्वजनिक नहीं की है, इसलिए फ्लाईदुबई की इस घटना में विमान संभालने वाले दोनों पायलट अभी भी यात्रियों और दुनिया के लिए ‘मिस्ट्री पायलट’ बने हुए हैं।
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