UP Rajya Sabha Election : उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 की मुख्य लड़ाई से पहले 16 अक्टूबर को एक ऐसा मुकाबला होने जा रहा है, जिसमें विधानसभा के भीतर दलों की ताकत के साथ विधायकों की राजनीतिक निष्ठा भी कसौटी पर होगी। राज्यसभा की 10 सीटों के लिए होने वाले चुनाव में मौजूदा संख्या बल बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए को मजबूत स्थिति में रखता है, जबकि समाजवादी पार्टी भी दो सीटों का गणित बना सकती है। बीजेपी के पास विधानसभा में 256 और सपा के पास 101 विधायक हैं। सहयोगियों को मिलाकर एनडीए की संख्या और बढ़ जाती है। एक राज्यसभा सीट के लिए करीब 36 विधायकों के समर्थन की जरूरत पड़ने का अनुमान है।
ऐसे में सामान्य स्थिति में एनडीए के लिए आठ और सपा के लिए दो सीटों का रास्ता बन सकता है। लेकिन अतिरिक्त उम्मीदवार उतरा या क्रॉस वोटिंग हुई तो मुकाबले में नया मोड़ आ सकता है। यही कारण है कि अब्बास अंसारी, पल्लवी पटेल और कुछ दूसरे विधायकों के संभावित रुख पर राजनीतिक नजरें टिक गई हैं।
UP Rajya Sabha Election
मऊ सदर से विधायक अब्बास अंसारी सुभासपा के टिकट पर विधानसभा पहुंचे थे। यूपी विधानसभा की आधिकारिक सूची में भी उनकी पार्टी सुभासपा दर्ज है। हालांकि पिछले वर्षों में उनके राजनीतिक रुख को लेकर सुभासपा और सपा के बीच बयानबाजी होती रही है। ऐसे में राज्यसभा चुनाव में वह किस तरफ मतदान करेंगे, इसे लेकर अटकलें हैं। फिलहाल उनकी ओर से किसी पक्ष के समर्थन की औपचारिक घोषणा सामने नहीं आई है।
बन सकता है दिलचस्प
जफराबाद से विधायक जगदीश नारायण राय भी सुभासपा के विधायक हैं। उनके रुख को लेकर भी राजनीतिक चर्चा है। पार्टी नेतृत्व पहले उनके सपा के करीब होने का दावा करता रहा है। हालांकि इस चुनाव में वह किस उम्मीदवार को वोट देंगे, यह मतदान से पहले स्पष्ट नहीं है। सिराथू विधायक पल्लवी पटेल भी इस गणित में चर्चा का बड़ा नाम हैं। आधिकारिक विधानसभा रिकॉर्ड में वह सपा विधायक के रूप में दर्ज हैं। पिछले राज्यसभा चुनाव के दौरान उनका सपा नेतृत्व से टकराव खुलकर सामने आया था। अब अखिलेश यादव के साथ उनके राजनीतिक रिश्तों में बदलाव की चर्चाओं के बीच उनके वोट पर फिर नजर रहेगी।
बाकी विधायकों पर भी नजर
सुभासपा के पास ओम प्रकाश राजभर के अलावा हंसू राम, दूध राम, जगदीश नारायण राय और अब्बास अंसारी समेत कई विधायक हैं। पार्टी एनडीए का हिस्सा है, इसलिए सामान्य स्थिति में उसके वोट एनडीए उम्मीदवारों के पक्ष में माने जाएंगे। इसके बावजूद अलग-अलग विधायकों को लेकर चल रही राजनीतिक चर्चाओं के कारण मतदान तक इनके रुख पर नजर बनी रहेगी। चायल से विधायक पूजा पाल भी सपा के टिकट पर विधानसभा पहुंची थीं और आधिकारिक विधानसभा रिकॉर्ड में उनकी पार्टी सपा दर्ज है। हालांकि बाद के राजनीतिक घटनाक्रम में उनके सपा नेतृत्व से रिश्तों में दूरी सामने आई। ऐसे विधायकों का वोट तभी खास तौर पर महत्वपूर्ण होगा, जब मुकाबला निर्धारित संख्या से आगे जाकर अतिरिक्त उम्मीदवार और क्रॉस वोटिंग तक पहुंचे।
16 अक्टूबर को खुलेगा पत्ता
राज्यसभा चुनाव में मतदान 16 अक्टूबर को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक होगा और शाम 5 बजे मतगणना शुरू हो जाएगी। यूपी की 10 सीटों में अभी आठ बीजेपी, एक सपा और एक बसपा के पास है। मौजूदा संख्या बल फिलहाल एनडीए और सपा के बीच आठ-दो का गणित दिखाता है। इसलिए असली सियासी रोमांच उम्मीदवारों की संख्या तय होने के बाद बढ़ेगा। अतिरिक्त प्रत्याशी मैदान में आया तो उन विधायकों के वोट अचानक बेहद महत्वपूर्ण हो जाएंगे, जिनके राजनीतिक रिश्ते अपनी पार्टी या गठबंधन से सहज नहीं रहे हैं।
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