Rajasthan Nikay Chunav : राजस्थान की शहरी राजनीति में रविवार को सत्ता का दूसरा और बेहद दिलचस्प मुकाबला देखने को मिला। पार्षद चुनाव के बाद अब सभापति और अध्यक्ष की कुर्सी के लिए वोटिंग ने कई शहरों का गणित बदल दिया। पिछले कई दिनों से होटल और रिसॉर्ट की बाड़ेबंदी, निर्दलीय पार्षदों को साधने की कोशिश और क्रॉस वोटिंग की आशंकाओं के बीच राजनीतिक दल अपने पार्षदों को एकजुट रखने में जुटे थे। कई नगर परिषदों में किसी एक दल के पास स्पष्ट बहुमत नहीं होने से निर्दलीय सबसे अहम कड़ी बनकर उभरे। इसका असर परिणामों में भी दिखाई दिया।
कहीं ज्यादा पार्षद होने के बावजूद समीकरण बदले तो कहीं कम संख्या वाला खेमा समर्थन जुटाकर कुर्सी तक पहुंच गया। बारां में आम आदमी पार्टी ने अपनी मौजूदगी दर्ज कराई, जबकि टोंक, करौली, झालावाड़ और गंगापुर सिटी जैसे शहरों में कांग्रेस ने बढ़त बनाई।
Rajasthan Nikay Chunav
दूसरी तरफ ब्यावर, जैसलमेर और फतेहपुर में बीजेपी के खाते में सफलता आई। इससे पहले पार्षद चुनाव में भी 2,272 निर्दलीय जीते थे, जिससे कई निकायों में उनकी भूमिका निर्णायक बन गई थी। बारां नगर परिषद में आम आदमी पार्टी की शीतल राठौर सभापति चुनी गईं। उन्हें 31 वोट मिलने का दावा है, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी भारद्वाज को 20 मत मिले। बीजेपी इस मुकाबले में वोटिंग से दूर रही। इससे पहले वार्ड चुनाव में भी AAP ने बारां की 60 में से 31 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया था। ब्यावर में मुकाबला ज्यादा दिलचस्प रहा। यहां बीजेपी की पुष्पा बल्दुआ ने कांग्रेस के कैलाश गहलोत को हराया। पुष्पा को 35 और कांग्रेस प्रत्याशी को 25 मत मिलने की जानकारी सामने आई। पार्षद चुनाव में बीजेपी को 23 और कांग्रेस को 20 सीटें मिली थीं, इसलिए सभापति चुनाव में निर्दलीय और दूसरे दलों के पार्षदों की भूमिका अहम रही।
निर्दलीय खेमे ने दिखाई ताकत
हनुमानगढ़ में विधायक गणेशराज बंसल समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार मंजू रणवां ने सभापति पद पर जीत दर्ज की। उन्हें 35 मत मिले, जबकि बीजेपी के खाते में 16 और कांग्रेस को 9 वोट मिलने की जानकारी है। इस परिणाम ने एक बार फिर दिखाया कि स्थानीय चुनाव में पार्टी सिंबल से अलग व्यक्तिगत और स्थानीय समीकरण भी बड़ा असर डाल सकते हैं। झालावाड़ में कांग्रेस के राजेश गुर्जर सभापति बने। यहां पार्षद चुनाव में कांग्रेस पहले ही मजबूत स्थिति में थी और उसने 45 में से 29 वार्ड जीते थे।
झुंझुनूं में भी कांग्रेस के अब्दुल्ला अगवान ने बाजी मारी। वहीं सलूंबर में संख्या का मुकाबला बेहद नजदीकी रहा और कांग्रेस के नरेंद्र जैन ने जीत हासिल की। दौसा में भी कांग्रेस अपना बोर्ड बनाने में सफल रही।
BJP ने लहराया परचम
बीजेपी को जैसलमेर और फतेहपुर में सफलता मिली। फतेहपुर में अंजू भिंडा ने 30 वोट हासिल कर कांग्रेस की निकिता रणवा को पीछे छोड़ा। जैसलमेर में बीजेपी के विजय डांगरा को 27 मत मिलने की जानकारी सामने आई, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार को 18 वोट मिले। जैसलमेर में वार्ड चुनाव के बाद भी बीजेपी बहुमत की स्थिति में थी। टोंक के परिणाम पर भी राजनीतिक नजरें टिकी थीं। यहां कांग्रेस के 25 वर्षीय मयंक गोयल सभापति चुने गए। उन्हें 38 वोट मिले, जबकि बीजेपी के प्रह्लाद सिंह को 21 मत मिले। इस तरह कांग्रेस ने टोंक नगर परिषद में लगातार दूसरी बार अपना बोर्ड बनाने में सफलता हासिल की।
गंगापुर सिटी में कांग्रेस के कृष्ण कुमार गोयल को 37 मत मिले और उन्होंने बीजेपी के विजय कुमार गुप्ता को पीछे छोड़ा। करौली में भी कांग्रेस के सुनील सैनी ने जीत हासिल की। उन्हें 30 वोट मिलने की जानकारी है, जबकि बीजेपी प्रत्याशी वीरेंद्र शर्मा को 25 मत मिले।
हाथ में रखी सत्ता की चाबी
सभापति चुनाव के इन नतीजों ने साफ किया कि राजस्थान के निकायों की राजनीति केवल बीजेपी और कांग्रेस के सीधे मुकाबले तक सीमित नहीं रही। पार्षद चुनाव में बड़ी संख्या में निर्दलीयों की जीत ने कई जगह बोर्ड गठन का समीकरण बदल दिया। अब अलग-अलग नगर परिषदों की कमान किसके हाथ पहुंचती है, उससे आने वाले दिनों में स्थानीय राजनीति के साथ प्रदेश स्तर पर भी नए सियासी संदेश निकाले जाएंगे।
Read More : UP Politics: 2027 से पहले योगी का ‘विरासत दांव’, सुहेलदेव से ऊदा देवी तक इन नामों के सहारे संदेश




