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UP Politics: तीन चुनाव और हर बार बदला विधायक, क्या इस बार हुसैनगंज तोड़ेगा अपना सियासी ट्रेंड?

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UP Politics : उत्तर प्रदेश की राजनीति में कुछ सीटें किसी एक दल का मजबूत गढ़ मानी जाती हैं, लेकिन फतेहपुर की हुसैनगंज विधानसभा सीट की कहानी इसके ठीक उलट रही है। 2008 के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई इस सीट पर अब तक तीन विधानसभा चुनाव हुए और हर बार मतदाताओं ने अलग पार्टी को मौका दिया। 2012 में बसपा, 2017 में भाजपा और 2022 में सपा ने यहां जीत दर्ज की। अब 2027 के चुनाव से पहले एक बार फिर इस सीट पर राजनीतिक गतिविधियां बढ़ रही हैं। हुसैनगंज विधानसभा सीट का चुनावी रिकॉर्ड दिलचस्प रहा है।

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2012 में बसपा के मोहम्मद आसिफ ने 44,757 वोट हासिल कर जीत दर्ज की थी। 2017 में भाजपा के रणवेंद्र प्रताप सिंह उर्फ धुन्नी भैया ने 73,595 वोट के साथ सीट अपने नाम की। इसके बाद 2022 में समाजवादी पार्टी की उषा मौर्या ने 91,884 वोट हासिल कर भाजपा से यह सीट छीन ली।

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2022 के विधानसभा चुनाव में उषा मौर्या को 48.78 प्रतिशत वोट मिले थे। उनके सामने भाजपा के रणवेंद्र प्रताप सिंह थे, जिन्हें 66,703 वोट मिले। दोनों उम्मीदवारों के बीच जीत-हार का अंतर 25,181 वोट रहा था। बसपा उम्मीदवार फरीद अहमद 21,009 वोट के साथ तीसरे स्थान पर रहे थे। मौजूदा विधायक उषा मौर्या 2027 से पहले अपने कार्यकाल के विकास कार्यों को प्रमुखता से सामने रख रही हैं। उनका दावा है कि विधानसभा क्षेत्र के गांवों में सड़क, बिजली, पानी और प्रकाश व्यवस्था से जुड़े काम कराए गए हैं। इसके अलावा हथगाम में महिला अस्पताल के प्रस्ताव और पेयजल सुविधाओं से जुड़े कार्यों को भी वह अपनी उपलब्धियों में गिना रही हैं।

तैयार कर रहे अपनी जमीन

दूसरी तरफ 2017 में इस सीट से विधायक रह चुके रणवेंद्र प्रताप सिंह उर्फ धुन्नी भैया भी सक्रिय हैं। 2022 में उन्हें 66 हजार से अधिक वोट मिले थे। उनका दावा है कि पिछले चुनाव में मुस्लिम, यादव और कुशवाहा मतदाताओं की गोलबंदी ने चुनावी परिणाम को प्रभावित किया था। अब भाजपा की तरफ से वह अपने पुराने जनसंपर्क और संगठन के सहारे राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कोशिश में हैं। हुसैनगंज में अलग-अलग सामाजिक समूहों के वोट चुनावी नतीजे को प्रभावित करते रहे हैं। पिछले परिणाम बताते हैं कि किसी एक पार्टी का यहां लगातार वर्चस्व नहीं रहा।

2012 में बसपा को 26.11 प्रतिशत वोट के साथ जीत मिली थी, जबकि 2017 में भाजपा ने करीब 42 प्रतिशत वोट हासिल किए। 2022 में सपा का वोट शेयर बढ़कर 48.78 प्रतिशत पहुंच गया।

टिकी रहेंगी निगाहें

2027 के चुनाव के लिए अभी उम्मीदवारों की आधिकारिक तस्वीर स्पष्ट नहीं है। ऐसे में सपा मौजूदा विधायक उषा मौर्या पर दोबारा भरोसा करती है या नया चेहरा सामने लाती है, इस पर निगाह रहेगी। भाजपा की ओर से भी प्रत्याशी की औपचारिक घोषणा का इंतजार है। दोनों दलों की अंतिम रणनीति टिकट वितरण के बाद ही स्पष्ट होगी। हुसैनगंज में अब तक कोई भी पार्टी लगातार दो विधानसभा चुनाव नहीं जीत सकी है। तीन चुनावों में बसपा, भाजपा और सपा को एक-एक बार जीत मिली है। ऐसे में 2027 में यह सिलसिला जारी रहेगा या पहली बार कोई पार्टी लगातार दूसरी जीत दर्ज करेगी, इसका फैसला मतदाता करेंगे। फिलहाल पुराने चुनावी आंकड़े और दोनों प्रमुख खेमों की बढ़ती सक्रियता इस सीट को फतेहपुर की चर्चित चुनावी लड़ाइयों में शामिल कर रही है।

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