Rajasthan Civic Election : राजस्थान के नगर निकाय चुनाव के नतीजों और रुझानों ने प्रदेश की सियासत में नई हलचल पैदा कर दी है। 10 नगर निगमों के 835 वार्डों में हुए मुकाबले में कहीं भारतीय जनता पार्टी ने मजबूत पकड़ बनाई तो कहीं कांग्रेस ने अपनी स्थिति संभालने में कामयाबी हासिल की। जयपुर, उदयपुर, अजमेर, कोटा, अलवर और भीलवाड़ा में बीजेपी बढ़त के साथ आगे नजर आई, जबकि पाली, बीकानेर और जोधपुर में कांग्रेस ने बढ़त बनाई। सबसे अलग तस्वीर भरतपुर से सामने आई, जहां निर्दलीय प्रत्याशियों ने दोनों बड़े दलों को पीछे छोड़ दिया।
इन नतीजों को सिर्फ स्थानीय चुनाव के तौर पर नहीं देखा जा रहा, बल्कि इन्हें राजस्थान की जमीनी राजनीतिक स्थिति का संकेत भी माना जा रहा है। चुनाव में बड़ी संख्या में उम्मीदवार मैदान में थे और अब वार्ड स्तर के नतीजों ने अलग-अलग शहरों में राजनीतिक समीकरणों को काफी हद तक स्पष्ट कर दिया है।
Rajasthan Civic Election
मतगणना के दौरान सामने आए आंकड़ों के मुताबिक बीजेपी छह नगर निगमों में कांग्रेस से आगे रही। जयपुर में 150 वार्डों में बीजेपी 95 सीटों पर आगे रही, जबकि कांग्रेस 43 और अन्य 12 सीटों पर रहे। उदयपुर में बीजेपी 36, कांग्रेस 17 और अन्य एक सीट पर आगे रहे। अजमेर में बीजेपी ने 31 सीटों के साथ बढ़त बनाई, जबकि कांग्रेस 27 सीटों पर रही। कोटा में बीजेपी 26 और कांग्रेस 18 सीटों पर आगे रही। अलवर में बीजेपी 23 और कांग्रेस 16 सीटों पर रही। भीलवाड़ा में भी बीजेपी 19 सीटों के साथ आगे रही।
कांग्रेस ने दिखाई ताकत
दूसरी तरफ कांग्रेस ने पाली, बीकानेर और जोधपुर में अपनी बढ़त कायम रखी। पाली के 65 वार्डों में कांग्रेस 29 सीटों के साथ आगे रही, जबकि बीजेपी 21 सीटों पर रही। बीकानेर में कांग्रेस 23 और बीजेपी 16 सीटों पर आगे रही। जोधपुर के 100 वार्डों में कांग्रेस 22 सीटों के साथ बढ़त में रही, जबकि बीजेपी 16 सीटों पर रही। इन आंकड़ों से साफ है कि शहरी निकाय चुनाव में कांग्रेस को भी कुछ इलाकों में मजबूत समर्थन मिला है।
निर्दलीयों ने बदला पूरा खेल
भरतपुर नगर निगम का परिणाम दोनों प्रमुख दलों से अलग रहा। यहां कुल 65 वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशियों ने सबसे ज्यादा 33 सीटों पर जीत दर्ज की। बीजेपी को 19 और कांग्रेस को 11 वार्ड मिले। इसके अलावा बसपा और आरएलपी ने भी एक-एक सीट पर कब्जा किया। इस नतीजे ने भरतपुर में स्थानीय उम्मीदवारों और व्यक्तिगत समीकरणों की मजबूत भूमिका को सामने ला दिया। उदयपुर नगर निगम में बीजेपी का प्रदर्शन खास तौर पर चर्चा में रहा। अलग-अलग वार्डों में पार्टी के कई प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की। वार्ड 76 से कविता जोशी, 41 से सोहन गमेती, 77 से दुर्गालाल गमेती, 12 से बाबूलाल नागौरी, 27 से निधि गोधा, 78 से अतुल चण्डालिया और 25 से लोकेश साहू विजयी रहे। वहीं वार्ड 42 में कांग्रेस की खुशी गमेती और वार्ड 11 में निर्दलीय कमलेश बोराना ने जीत हासिल की। वार्ड 65 से कांग्रेस के किशन गमेती और वार्ड 49 से बीजेपी के दीपक नागदा भी विजयी घोषित हुए।
दौसा में कांग्रेस का प्रदर्शन मजबूत
दौसा विधानसभा क्षेत्र के निकाय चुनाव में कांग्रेस ने बीजेपी को पीछे छोड़ते हुए बेहतर प्रदर्शन किया। दौसा नगर परिषद के 55 वार्डों में कांग्रेस ने 24 सीटें जीतीं, जबकि बीजेपी को 17 और निर्दलीयों को 14 सीटें मिलीं। लवाण नगर पालिका के 20 वार्डों में भी कांग्रेस 10 सीटों के साथ सबसे आगे रही। यहां बीजेपी को 7 और निर्दलीयों को 3 सीटें मिलीं। कांग्रेस ने इस प्रदर्शन को स्थानीय संगठन और नेताओं की मेहनत से जोड़कर देखा है। राजस्थान के अलग-अलग शहरी निकायों में हुए चुनाव में हजारों उम्मीदवारों की किस्मत दांव पर लगी थी। सामने आए आंकड़ों में 3657 सीटों के परिणामों में बीजेपी ने 1502 सीटें जीतीं, जबकि कांग्रेस के खाते में 1397 सीटें आईं। निर्दलीयों ने भी 725 सीटों पर जीत दर्ज की। अब इन नतीजों के बाद राजनीतिक दलों की नजर नगर निगमों में बोर्ड गठन और स्थानीय स्तर पर नए समीकरण बनाने पर रहेगी।
Read More : MP Politics: नरोत्तम मिश्रा से 11 दिन में 7 बड़े नेताओं की मुलाकात, UP चुनाव से पहले बड़ा सियासी संकेत!




