UP Election 2027 : उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां धीरे-धीरे तेज होने लगी हैं. करीब छह महीने बाद होने वाले चुनाव में भाजपा के सामने लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी का लक्ष्य है. योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार अपने विकास कार्यों और योजनाओं को जनता तक पहुंचाने में जुटी है, वहीं संगठन स्तर पर भी चुनावी तैयारियों को मजबूत किया जा रहा है.
403 विधानसभा सीटों वाले उत्तर प्रदेश में भाजपा उम्मीदवारों के चयन को लेकर अभी से मंथन शुरू होने की चर्चा है. माना जा रहा है कि इस बार टिकट बांटने में केवल राजनीतिक समीकरण ही नहीं, बल्कि विधायकों का प्रदर्शन, क्षेत्र में उनकी पकड़, स्थानीय नाराजगी और संगठन की रिपोर्ट भी अहम भूमिका निभा सकती है.
UP Election 2027
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की चुनावी तैयारियों में सरकारी परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास भी महत्वपूर्ण हिस्सा बनता दिख रहा है. हाल के दिनों में उन्होंने प्रदेश के 75 जिलों में से 44 से अधिक जिलों का दौरा किया है. इस दौरान 115 विधानसभा क्षेत्रों से जुड़ी 38 हजार करोड़ रुपये से अधिक की विकास और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का उद्घाटन या शिलान्यास किया गया. सरकार की कोशिश इन कामों के जरिए अपने विकास एजेंडे को चुनावी मैदान में मजबूत करने की है. इन 115 विधानसभा क्षेत्रों में से 67 सीटों पर 2024 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी-कांग्रेस गठबंधन को बढ़त मिली थी.
यही वजह है कि विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा इन क्षेत्रों के राजनीतिक समीकरणों पर खास नजर रख सकती है. लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद पार्टी के सामने उन सीटों पर संगठन को दोबारा मजबूत करने और स्थानीय स्तर की कमियों को दूर करने की चुनौती भी है.
100 से ज्यादा विधायकों पर नजर
भाजपा के कथित आंतरिक सर्वे को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि बड़ी संख्या में मौजूदा विधायकों के प्रदर्शन की समीक्षा की गई है. सूत्रों के हवाले से यह दावा किया जा रहा है कि 100 से ज्यादा विधायकों के टिकट पर खतरा मंडरा सकता है. हालांकि, इस सर्वे या संभावित टिकट कटौती के आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. ऐसे में फिलहाल इसे पार्टी के संभावित चुनावी मंथन के तौर पर ही देखा जा रहा है. बताया जा रहा है कि छह संगठनात्मक क्षेत्रों में विधायकों के प्रदर्शन और स्थानीय स्थिति की समीक्षा की गई.
पश्चिमी क्षेत्र की 71 सीटों में 23 से 25, ब्रज की 65 में 24 से 26, अवध की 82 में 26 से 28, कानपुर की 52 में 22 से 24, काशी की 71 में 19 से 21 और गोरखपुर क्षेत्र की 62 सीटों में 18 से 22 सीटों पर प्रतिकूल रिपोर्ट होने का दावा किया जा रहा है. पार्टी की ओर से इन आंकड़ों की पुष्टि नहीं की गई है.
बन सकती है आधार
भाजपा के लिए उम्मीदवार चयन में स्थानीय असंतोष अहम मुद्दा बन सकता है. किसी विधायक के खिलाफ क्षेत्र में लगातार शिकायतें, संगठन से दूरी, कमजोर जनसंपर्क या चुनावी प्रदर्शन जैसे पहलुओं को टिकट तय करते समय देखा जा सकता है. पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के स्तर पर अंतिम फैसला होने की संभावना है. हालांकि, पार्टी से जुड़े लोगों ने कथित सर्वे को लेकर आधिकारिक तौर पर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी है. 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 403 में से 255 सीटों पर जीत दर्ज की थी. अपना दल (सोनेलाल) को 12 और निषाद पार्टी को छह सीटें मिली थीं.
इस तरह भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए ने कुल 273 सीटों के साथ बहुमत हासिल किया था. विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 202 सीटों का है. अब 2027 में भाजपा के सामने न सिर्फ सत्ता बचाने बल्कि अपने पिछले प्रदर्शन को बरकरार रखने की चुनौती होगी.
चुनाव से पहले जनगणना अहम
2027 के चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश में चुनावी गतिविधियों के साथ जनगणना की प्रक्रिया भी पूरी किए जाने की तैयारी है. केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश में 1 दिसंबर 2026 से 4 जनवरी 2027 तक जनगणना-2027 कराने का निर्णय लिया है. उत्तर प्रदेश समेत पांच राज्यों में फरवरी-मार्च 2027 के दौरान विधानसभा चुनाव होने की संभावना जताई जा रही है. ऐसे में चुनावी कार्यक्रम से पहले जनगणना की प्रक्रिया पूरी करने की योजना बनाई गई है. अब आने वाले महीनों में भाजपा की संगठनात्मक तैयारियां, सरकार के विकास कार्य और टिकट वितरण को लेकर होने वाला मंथन यूपी की सियासत की दिशा तय करने में अहम हो सकता है.
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