Nepal Flood : नेपाल में बाढ़ के सैलाब ने जहां बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एक नेपाली श्रमिक की जान आम के पेड़ की वजह से बच गई। बिदुर क्षेत्र में काम कर रहे बिबेक कुमाल अचानक आए पानी के तेज बहाव में बह गए थे। इसी दौरान वह आम के पेड़ पर अटक गए और कुछ समय बाद पुलिस ने उन्हें सुरक्षित बाहर निकाल लिया। बिबेक बुधवार को बिदुर इलाके में नए बने एक घर के बाहर शौचालय का गड्ढा खोद रहे थे।
गड्ढा करीब पांच फीट गहरा था। वह काम में जुटे हुए थे, तभी बाहर मौजूद उनके चार साथियों ने उन्हें आवाज देकर तुरंत बाहर आने और वहां से भागने को कहा। साथियों की आवाज सुनकर बिबेक गड्ढे से बाहर निकले।
Nepal Flood
हालांकि, तब तक उनके साथी वहां से निकल चुके थे। बिबेक भी अपनी जान बचाने के लिए तेजी से भागने लगे। इसी दौरान अचानक तेज पानी का सैलाब आया और देखते ही देखते वह उसकी चपेट में आ गए। तेज बहाव इतना खतरनाक था कि बिबेक के आसपास मौजूद सामान और दूसरी चीजें भी पानी के साथ बहने लगीं। वह खुद भी पानी के बहाव में बहते चले गए। उस वक्त उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि किस तरह अपनी जान बचाई जाए। बिबेक ने बताया कि उन्हें अचानक ऐसा महसूस हुआ जैसे कोई बड़ा भूकंप आया हो। पानी का बहाव उन्हें लगातार आगे खींच रहा था। इसी दौरान उनकी किस्मत ने साथ दिया और वह एक आम के पेड़ से जा टकराए।
पेड़ ने उन्हें बहने से रोक दिया। बिबेक किसी तरह उसी पर टिके रहे और मदद का इंतजार करते रहे। कुछ देर बाद पुलिस की टीम वहां पहुंची और उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला गया।
अस्पताल में भर्ती हैं बिबेक
रेस्क्यू के बाद बिबेक को इलाज के लिए काठमांडू के नेशनल ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया है। अस्पताल के बिस्तर से उन्होंने अपने साथ हुई घटना को याद करते हुए बताया कि अगर आम का पेड़ उन्हें नहीं मिलता, तो वह पानी के साथ बह जाते। बिबेक के मुताबिक, “आम का पेड़ न होता, तो मैं बहकर मर जाता।” उन्होंने बताया कि अचानक आए सैलाब के सामने उन्हें अपनी जिंदगी खत्म होती हुई नजर आ रही थी, लेकिन पेड़ ने उन्हें संभाल लिया। बिदुर नेपाल के उस हिमालयी इलाके में स्थित है, जो चीन के तिब्बत से लगी सीमा के करीब है। इस क्षेत्र में अचानक आई बाढ़ ने लोगों के लिए हालात बेहद मुश्किल कर दिए हैं।
बिबेक की कहानी इस आपदा के बीच एक ऐसे शख्स की है, जो तेज बहाव में फंसने के बावजूद आखिरी वक्त पर एक पेड़ के सहारे बच गया। जहां सैलाब अपने रास्ते में आने वाली चीजों को बहा रहा था, वहीं आम का वही पेड़ बिबेक के लिए जिंदगी और मौत के बीच सहारा बन गया।
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