Nepal Flood : नेपाल में बुधवार को अचानक आई बाढ़ ने हिमालयी क्षेत्र में प्राकृतिक आपदाओं के खतरे को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नेपाल-तिब्बत सीमा के पास हुई इस घटना में बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान हुआ है। तबाही की तस्वीरों ने भारतीय विशेषज्ञों की चिंता भी बढ़ा दी है। अब चर्चा चीन की ओर से तिब्बत में ब्रह्मपुत्र नदी पर बनाए जा रहे विशाल मेडोग डैम को लेकर हो रही है। चीन यारलुंग त्सांग्पो नदी पर यह हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट बना रहा है। यही नदी भारत में प्रवेश करने के बाद ब्रह्मपुत्र कहलाती है।
यह प्रोजेक्ट अरुणाचल प्रदेश के पास भारत-तिब्बत सीमा के करीब स्थित है। विशेषज्ञों की चिंता है कि हिमालय के भूकंप और भूस्खलन जैसे प्राकृतिक खतरों वाले इलाके में इतने बड़े बांध के निर्माण से किसी बड़े हादसे की स्थिति में भारत के पूर्वोत्तर राज्यों के साथ बांग्लादेश तक गंभीर असर पड़ सकता है।
Nepal Flood
नेपाल में हुई प्राकृतिक त्रासदी को लेकर शुरुआती रिपोर्ट्स में भूकंप, हिमस्खलन और ग्लेशियर से जुड़ी घटनाओं की आशंका जताई गई थी। भोटे कोशी और त्रिशूली नदियों में अचानक बढ़े पानी ने कई इलाकों में तबाही मचा दी। हिमालय को दुनिया की सबसे युवा और लगातार भूगर्भीय बदलावों से गुजरने वाली पर्वत श्रृंखलाओं में माना जाता है। यही वजह है कि यह क्षेत्र भूकंप और भूस्खलन के लिहाज से बेहद संवेदनशील है। इसी पृष्ठभूमि में विशेषज्ञों ने मेडोग डैम की सुरक्षा और संभावित जोखिमों पर सवाल उठाए हैं।
60,000 मेगावॉट क्षमता का डैम
चीन तिब्बत ऑटोनोमस रीजन के मेडोग या मोडॉन्ग इलाके में यारलुंग त्सांग्पो नदी पर विशाल हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट तैयार कर रहा है। इसकी प्रस्तावित क्षमता करीब 60,000 मेगावॉट बताई जाती है। चीन का लक्ष्य 2033 से इसके पूरी तरह संचालन में आने का है। मेडोग का इलाका भूकंपीय गतिविधियों के लिहाज से संवेदनशील माना जाता है। ऐसे में इतने बड़े बांध के निर्माण को लेकर पर्यावरण और सुरक्षा विशेषज्ञ पहले से चिंता जताते रहे हैं।
I had been associated with the first negotiations for Devighat project as a young officer.
As against this symbol of India’s friendship, it is sad to see the rampage descending from China.
Unfortunately, China does not care. https://t.co/NiGFudYLSX— Amb Rajiv Dogra (@AmbRajivDogra) August 26, 2026
ब्रह्मा चेलानी ने बताया ‘वॉटर बम’
स्ट्रैटजिक एक्सपर्ट ब्रह्मा चेलानी ने नेपाल की घटना का जिक्र करते हुए मेडोग डैम को लेकर गंभीर चेतावनी दी। उनका कहना है कि तिब्बत-नेपाल सीमा के पास अपेक्षाकृत हल्के भूकंपीय झटके के बाद इतनी बड़ी प्राकृतिक तबाही हुई है। ऐसे में हिमालय के संवेदनशील इलाके में दुनिया का सबसे विशाल डैम बनाना गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है। चेलानी ने इसे भारत-तिब्बत सीमा के करीब तैयार हो रहा ‘वॉटर बम’ बताया। उनके मुताबिक किसी बड़े हादसे की स्थिति में भारत का पूर्वोत्तर क्षेत्र प्रभावित हो सकता है और इसका असर आगे बांग्लादेश तक पहुंचने की आशंका है।
The Himalayas are the world’s most seismically active major mountain range, with a record of triggering devastating earthquakes. How even a moderate seismic event can trigger massive cascading effects was illustrated today when a magnitude 4.4 quake along the Tibet-Nepal border…
— Dr. Brahma Chellaney (@Chellaney) August 26, 2026
भूवैज्ञानिक सर्वे पर भी सवाल
रिपोर्ट्स के अनुसार, चीन के भूवैज्ञानिक सर्वे से जुड़े वैज्ञानिकों ने जुलाई में एक अध्ययन में मेडोग हाइड्रोपावर स्टेशन के इलाके को सक्रिय फॉल्ट लाइन से जुड़ा पाया था। इससे बांध की सुरक्षा और निर्माण क्षेत्र की भूगर्भीय स्थिति को लेकर चिंता और बढ़ गई है। नेपाल में आई बाढ़ से पहले और बाद की सैटेलाइट तस्वीरें सामने आने के बाद पूर्व राजनयिक राजीव डोगरा ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने बताया कि युवा अधिकारी के रूप में वह देवीघाट प्रोजेक्ट से जुड़ी शुरुआती चर्चाओं का हिस्सा रह चुके हैं। उन्होंने नेपाल की तबाही के संदर्भ में चीन की भूमिका और उसके प्रोजेक्ट्स को लेकर चिंता जताई।
उनका कहना था कि भारत की मित्रता और सहयोग के प्रतीक प्रोजेक्ट्स के मुकाबले चीन की ओर से होने वाली गतिविधियों को देखना दुखद है। नेपाल की इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल सामने ला दिया है कि हिमालय जैसे बेहद संवेदनशील क्षेत्र में बड़े बांधों और हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट्स के निर्माण के दौरान प्राकृतिक आपदाओं के जोखिम का आकलन कितना गंभीरता से किया जा रहा है।
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