H-1B Visa Fee : अमेरिका में नौकरी करने का सपना देख रहे भारतीय IT और टेक प्रोफेशनल्स के लिए बड़ा झटका लग सकता है। डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन ने H-1B वीजा को लेकर नया प्रस्ताव जारी किया है। इसके तहत हर H-1B वीजा पर 1,03,265 डॉलर यानी करीब 98 लाख रुपए की अतिरिक्त फीस लगाने की बात कही गई है। अगर यह प्रस्ताव लागू होता है तो अमेरिकी कंपनियों के लिए विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करना पहले की तुलना में काफी महंगा हो जाएगा।
H-1B एक गैर-आप्रवासी वीजा है, जिसके जरिए अमेरिकी कंपनियां विदेशों से उच्च कौशल वाले कर्मचारियों को कुछ अवधि के लिए अमेरिका में काम करने के लिए बुलाती हैं। अभी अलग-अलग परिस्थितियों में H-1B वीजा से जुड़ी फीस आमतौर पर करीब 2,000 से 5,000 डॉलर तक होती है। नई प्रस्तावित रकम इससे कई गुना अधिक है।
H-1B Visa Fee
H-1B वीजा का इस्तेमाल बड़ी संख्या में भारतीय IT और टेक प्रोफेशनल्स करते हैं। ऐसे में नई फीस लागू होने पर भारतीय कर्मचारियों और उन्हें अमेरिका बुलाने वाली कंपनियों पर इसका बड़ा वित्तीय असर पड़ सकता है। कंपनियां अतिरिक्त लागत को देखते हुए विदेशों से कर्मचारियों की भर्ती के फैसले पर दोबारा विचार कर सकती हैं। ट्रम्प प्रशासन ने पिछले साल एक अस्थायी आदेश के जरिए इतनी ही राशि की अतिरिक्त फीस लागू करने की कोशिश की थी। हालांकि जून में एक अमेरिकी फेडरल कोर्ट ने इसे गैरकानूनी करार देते हुए सरकार को फीस वसूलने से रोक दिया था। फिलहाल इस फैसले की समीक्षा बोस्टन की एक अपीलीय अदालत में चल रही है। वहीं वॉशिंगटन डीसी की दूसरी अदालत में भी इस मामले से जुड़ी याचिका पर सुनवाई हो रही है।
स्थायी बनाने की तैयारी
नए प्रस्ताव के जरिए अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी विभाग को इस अतिरिक्त फीस को स्थायी बनाने के लिए नियम तैयार करने का निर्देश दिया गया है। यानी प्रशासन अब अस्थायी व्यवस्था के बजाय इसे लंबे समय के लिए लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। ट्रम्प प्रशासन H-1B आवेदनों की जांच पहले से ज्यादा सख्त करने की तैयारी में है। प्रस्तावित नई व्यवस्था में अधिक कुशल और ज्यादा वेतन पाने वाले विदेशी कर्मचारियों को प्राथमिकता देने की बात कही गई है। पिछले साल करीब 3.44 लाख H-1B वीजा के लिए रजिस्ट्रेशन हुए थे, जो 2024 की तुलना में 25 प्रतिशत से ज्यादा कम थे।
30 दिन में देनी होगी राय
DHS ने प्रस्ताव को सोमवार को फेडरल रजिस्टर की वेबसाइट पर जारी किया है। इसे मंगलवार को औपचारिक रूप से प्रकाशित किया जाएगा। इसके बाद आम लोगों, कंपनियों और अन्य संगठनों को प्रस्ताव पर अपनी प्रतिक्रिया देने के लिए 30 दिनों का समय मिलेगा। प्रस्ताव पर मिली प्रतिक्रियाओं के बाद आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी।
Read More : UP Politics: राहुल गांधी के मनुस्मृति बयान पर रायबरेली में बरसे CM योगी, कांग्रेस- सपा पर भी साधा निशाना




