UP Stamp Duty Rule : उत्तर प्रदेश सरकार कंपनियों के मर्जर (विलय), डीमर्जर (विभाजन) और अन्य कॉरपोरेट पुनर्गठन से जुड़े लेनदेन के लिए पहली बार स्पष्ट स्टांप शुल्क व्यवस्था लागू करने जा रही है। इसके लिए भारतीय स्टांप अधिनियम, 1899 की धारा 2(10) और अनुसूची-1(ख) के संबंधित प्रावधानों में संशोधन का प्रस्ताव तैयार किया गया है। सरकार जल्द ही इस प्रस्ताव को कैबिनेट के सामने रखेगी। मंजूरी मिलने के बाद नई व्यवस्था अधिसूचना जारी होने की तारीख से प्रभावी हो जाएगी।
उत्तर प्रदेश में मर्जर, डीमर्जर, अमलगमेशन, रिकंस्ट्रक्शन, एक्विजिशन और टेकओवर जैसे आधुनिक कॉरपोरेट लेनदेन पर स्टांप शुल्क तय करने के लिए कोई स्पष्ट कानूनी प्रावधान नहीं है। इसकी वजह से कंपनियों को पुनर्गठन के दौरान शुल्क निर्धारण को लेकर अनिश्चितता और कानूनी विवादों का सामना करना पड़ता है।
UP Stamp Duty Rule
नई व्यवस्था इस समस्या को दूर करने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है। प्रस्ताव तैयार करते समय महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक और राजस्थान सहित कई राज्यों की स्टांप शुल्क व्यवस्था का अध्ययन किया गया। इन राज्यों में ऐसे कॉरपोरेट लेनदेन के लिए पहले से स्पष्ट नियम लागू हैं। इन्हीं मॉडलों को ध्यान में रखते हुए उत्तर प्रदेश के लिए संशोधन प्रस्ताव तैयार किया गया है।
ऐसे तय होगा शुल्क
प्रस्तावित नियमों के मुताबिक मर्जर और डीमर्जर के मामलों में स्टांप शुल्क दो आधारों में से जो अधिक होगा, उसी के अनुसार लिया जाएगा। पहला आधार उत्तर प्रदेश में स्थित अचल संपत्ति का मूल्य होगा, जबकि दूसरा शेयर मूल्य और प्रतिफल (कंसिडरेशन) का 0.5 प्रतिशत होगा। दोनों में जो राशि अधिक होगी, वही स्टांप शुल्क के रूप में देनी होगी।
निवेश को मिलेगा बढ़ावा
राज्य सरकार का मानना है कि नए नियम लागू होने से कॉरपोरेट लेनदेन में पारदर्शिता और कानूनी स्पष्टता आएगी। इससे मुकदमेबाजी कम होगी और कारोबार करना पहले से आसान बनेगा। सरकार को उम्मीद है कि इस संशोधन से राज्य को हर साल करीब 1,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व मिलेगा। साथ ही बड़े निवेशकों को आकर्षित करने, नई कंपनियों की स्थापना और रोजगार के नए अवसर सृजित करने में भी मदद मिलेगी।
Read More : By Election Result: बांकीपुर में प्रशांत किशोर की बढ़त, दतिया में कांग्रेस आगे; मांजलपुर में BJP मजबूत




