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UP Police की दरोगा अस्मिता डे ने जीता Commonwealth Games 2026 का गोल्ड, संघर्ष की कहानी करेगी प्रेरित

UP Police : गाजियाबाद की दरोगा अस्मिता डे ने शुक्रवार को कॉमनवेल्थ गेम्स-2026 में गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया। उन्होंने जूडो स्पर्धा के फाइनल में कनाडा की खिलाड़ी को मात दी। त्रिपुरा की रहने वाली अस्मिता डे फिलहाल यूपी पुलिस में सब-इंस्पेक्टर के पद पर तैनात हैं। गोल्ड जीतने के बाद अस्मिता डे ने कहा कि वह यूपी पुलिस का हिस्सा हैं और इसके लिए सीएम योगी का धन्यवाद करना चाहती हैं क्योंकि उन्हीं की वजह से उन्हें यूपी पुलिस में नौकरी मिली। उन्होंने बताया कि इसी नौकरी से उन्हें सहारा मिला और इसी की बदौलत वह यहां तक पहुंचकर गोल्ड मेडल जीत पाईं।

फाइनल मुकाबले की शुरुआत अस्मिता डे के लिए आसान नहीं रही। कनाडा की हेडी क्वाच ने पहले ही युको अंक हासिल कर बढ़त बना ली थी और अस्मिता को एक शिदो पेनल्टी भी मिल गई थी। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और शानदार वापसी करते हुए स्कोर 1-1 से बराबर कर दिया।

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तय समय तक कोई भी खिलाड़ी निर्णायक अंक हासिल नहीं कर सकी जिसके चलते मुकाबला गोल्डन स्कोर में पहुंच गया। यहां अस्मिता ने सही मौके पर दांव लगाते हुए दूसरा युको अंक हासिल किया और मैच के साथ ही गोल्ड मेडल भी अपने नाम कर लिया। फाइनल तक पहुंचने से पहले उन्होंने स्कॉटलैंड की ईवा इविंग और समर शॉ को हराकर अपना दमदार प्रदर्शन दिखाया था। अस्मिता ने बताया कि दिसंबर 2025 में उनके पिता का निधन हो गया था। उनके मुताबिक पिता ने हमेशा उनका साथ दिया था और उनके जाने के बाद उन्हें लगा था कि सब कुछ खत्म हो गया है लेकिन दो महीने बाद ही एशियन गेम्स के ट्रायल्स में उन्होंने नेशनल स्तर पर पहला स्थान हासिल किया।

गोल्ड मेडल जीतने के बाद अस्मिता ने कहा कि यह पदक उनके लिए उनके राज्य और देश के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने इसे अपने कोच और पिता को समर्पित करते हुए कहा कि यह जीत उन सभी लोगों के लिए है जिन्होंने उनका साथ दिया।

एथलेटिक्स छोड़ अपनाया जूडो

त्रिपुरा के बेलोनिया की रहने वाली अस्मिता डे पहले 800 मीटर दौड़ की एथलीट थीं। जिला स्तरीय ट्रायल के दौरान उनकी दिलचस्पी जूडो में बढ़ी जिसके बाद उन्होंने एथलेटिक्स छोड़कर जूडो को ही अपना खेल बना लिया और लगातार मेहनत करती रहीं। उन्होंने भोपाल स्थित भारतीय खेल प्राधिकरण के रीजनल सेंटर में कोच यशपाल सोलंकी की देखरेख में प्रशिक्षण हासिल किया। फिलहाल वह केंद्र सरकार की टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम के डेवलपमेंट ग्रुप का हिस्सा हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व कर रही हैं।

अस्मिता ने खिताबी मुकाबले से पहले रैंडम वेट-इन यानी वजन जांच के दौरान हुए संघर्ष को भी साझा किया। उन्होंने बताया कि उन्हें सुबह भूखा रहना पड़ा था क्योंकि रैंडम वेट-इन में वजन 50 किलो से कम होना जरूरी था। उन्होंने बताया कि जब वह सुबह उठीं तो उनका वजन 50 किलो 300 ग्राम था इसलिए उन्होंने कुछ नहीं खाया। जब उनका नाम वेट-इन के लिए पुकारा गया तब औपचारिकता पूरी होने के बाद ही उन्होंने कुछ खाया-पिया और उसके एक घंटे बाद ही उनका मुकाबला था।

डीजीपी ने दी बधाई

यूपी के पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने गोल्ड मेडल जीतने पर अस्मिता डे को बधाई दी। उन्होंने कहा कि अस्मिता डे ने महिला 48 किलोग्राम जूडो स्पर्धा में गोल्ड जीतकर यूपी पुलिस प्रदेश और पूरे देश का नाम रोशन किया है। उन्होंने कहा कि यह सफलता अनुशासन कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प का बेहतरीन उदाहरण है और यह उपलब्धि सीएम योगी की खेल प्रतिभाओं को बढ़ावा देने की नीति का भी नतीजा है। उन्होंने कहा कि खेल कोटे के जरिए खिलाड़ियों को यूपी पुलिस में नौकरी देने से उन्हें खेल और सेवा दोनों क्षेत्रों में आगे बढ़ने का मौका मिल रहा है।

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत का प्रदर्शन लगातार बेहतर होता जा रहा है। टीम अब तक कुल 19 पदक जीत चुकी है जिनमें 5 स्वर्ण 10 रजत और 4 कांस्य पदक शामिल हैं। इस शानदार प्रदर्शन के साथ भारत पदक तालिका में आठवें स्थान पर पहुंच गया है।

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