Kashi Jagannath Rath Yatra 2026 : वाराणसी में भगवान जगन्नाथ की ऐतिहासिक तीन दिवसीय रथयात्रा का शुभारंभ गुरुवार तड़के धार्मिक उल्लास और पारंपरिक विधि-विधान के साथ हुआ। सुबह पांच बजे भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा का पीतांबरी शृंगार किया गया। इसके बाद मंगला आरती संपन्न हुई और मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। सुबह से ही बड़ी संख्या में भक्त दर्शन के लिए पहुंचने लगे, जिससे मंदिर परिसर और मेला क्षेत्र में आस्था का अद्भुत वातावरण देखने को मिला। रथयात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ को पारंपरिक रूप से 56 प्रकार के व्यंजनों का भोग अर्पित किया गया।
प्रसाद के रूप में श्रद्धालुओं में नानखटाई और तुलसी के पत्तों का वितरण किया गया। करीब पांच किलोमीटर की यात्रा और दो किलोमीटर में फैले मेले में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही। भक्तों ने भगवान के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और खुशहाली की कामना की।
Kashi Jagannath Rath Yatra
रथयात्रा के अवसर पर धार्मिक आयोजन के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया गया। नमामि गंगे और अन्नपूर्णा सामाजिक सेवा समिति की ओर से श्रद्धालुओं के बीच तुलसी के पौधे और कपड़े के थैले वितरित किए गए। इस दौरान लोगों से सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग नहीं करने और स्वच्छता बनाए रखने की अपील की गई। कार्यक्रम में गंगा संरक्षण और विकसित भारत के संकल्प को भी प्रमुखता से रखा गया।
नियंत्रित हुई श्रद्धालुओं की भीड़
इस वर्ष रथयात्रा मेले में पहली बार श्रद्धालुओं की आवाजाही के लिए विशेष बैरिकेडिंग व्यवस्था लागू की गई है। श्रद्धालुओं को एक निर्धारित मार्ग से मंदिर में प्रवेश कराया जा रहा है, जबकि दूसरे मार्ग से बाहर निकाला जा रहा है। इस व्यवस्था से भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा प्रबंधन पहले की तुलना में अधिक व्यवस्थित रहा। सुरक्षा के मद्देनजर तीन थानों की पुलिस, एसीपी और डीसीपी स्तर के अधिकारी पूरे आयोजन पर नजर बनाए हुए हैं। काशी की जगन्नाथ रथयात्रा धार्मिक आस्था के साथ अपने पारंपरिक स्वाद के लिए भी जानी जाती है। भगवान जगन्नाथ को नानखटाई का भोग लगाने की परंपरा के चलते मेले में इसकी बिक्री कई गुना बढ़ जाती है। सड़क किनारे लगे स्टॉलों पर श्रद्धालु प्रसाद के साथ घर ले जाने के लिए भी बड़ी मात्रा में नानखटाई खरीदते नजर आए।
सबसे ज्यादा मांग
मेले में इस बार देसी घी से तैयार नारियल-केसर, काजू-केसर, नारियल-वनीला, काजू-चॉकलेट और पंचमेवा-केसर जैसी कई विशेष किस्मों की नानखटाई उपलब्ध है। मुंह में रखते ही घुल जाने वाली यह पारंपरिक बनारसी मिठाई वर्षों से रथयात्रा मेले की पहचान बनी हुई है। बदलते समय के साथ इसमें नए स्वाद जुड़े हैं, लेकिन इसकी लोकप्रियता आज भी श्रद्धालुओं और पर्यटकों के बीच पहले जैसी ही बनी हुई है।
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