8th Pay Commission : देशभर के सरकारी कर्मचारियों और शिक्षकों के बीच 8वें वेतन आयोग को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। आयोग विभिन्न मंत्रालयों, विभागों और कर्मचारी संगठनों से सुझाव और आंकड़े जुटा रहा है। इसी बीच शिक्षक संगठनों ने वेतन संरचना में बड़े बदलाव की मांग रखते हुए एंट्री लेवल-6 के शिक्षकों की शुरुआती बेसिक सैलरी 1,34,500 रुपये तक करने का प्रस्ताव सामने रखा है। हालांकि यह फिलहाल केवल एक मांग है, इस पर सरकार या आयोग की ओर से कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है।

शिक्षक संगठनों का कहना है कि वेतन वृद्धि की सबसे बड़ी कुंजी फिटमेंट फैक्टर है। सातवें वेतन आयोग में इसे 2.57 रखा गया था, जबकि अब इसे 2.86 से 3.00 के बीच करने की मांग की जा रही है।
8th Pay Commission
विभिन्न आकलनों के अनुसार यदि फिटमेंट फैक्टर बढ़ता है, तो सरकारी कर्मचारियों का न्यूनतम मूल वेतन लगभग 41 हजार से 51 हजार रुपये तक पहुंच सकता है। हालांकि अंतिम आंकड़ा आयोग की सिफारिशों और सरकार के निर्णय पर निर्भर करेगा। शिक्षक संगठनों का तर्क है कि लगातार बढ़ती महंगाई और जीवनयापन की लागत के कारण मौजूदा वेतन संरचना पर्याप्त नहीं रह गई है। इसी वजह से कई संगठनों ने न्यूनतम वेतन 65 हजार रुपये या उससे अधिक निर्धारित करने की मांग की है। उनका कहना है कि बेहतर वेतन से शिक्षकों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और शिक्षा व्यवस्था को भी सकारात्मक लाभ मिलेगा।
वृद्धि में बदलाव की मांग
सिर्फ मूल वेतन ही नहीं, बल्कि हाउस रेंट अलाउंस (HRA) और अन्य भत्तों में भी संशोधन की मांग की जा रही है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि महानगरों और बड़े शहरों में रहने का खर्च लगातार बढ़ रहा है, इसलिए एचआरए में भी उचित बढ़ोतरी होनी चाहिए। इसके अलावा 10-20-30 करियर प्रोग्रेशन स्कीम लागू करने और वार्षिक वेतन वृद्धि को मौजूदा 3 प्रतिशत से बढ़ाकर 5 प्रतिशत करने का भी प्रस्ताव रखा गया है।
अभी प्रस्तावों पर चल रहा मंथन
ये सभी मांगें कर्मचारी और शिक्षक संगठनों की ओर से आयोग के समक्ष रखे गए सुझाव हैं। 8वें वेतन आयोग ने अभी तक वेतन, फिटमेंट फैक्टर या भत्तों को लेकर कोई अंतिम सिफारिश जारी नहीं की है। ऐसे में शिक्षकों की बेसिक सैलरी 1.34 लाख रुपये होने या अन्य मांगों पर फैसला आयोग की रिपोर्ट और उसके बाद केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद ही स्पष्ट होगा।
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