Ayodhya Ram Mandir Management Change : अयोध्या स्थित राम मंदिर के प्रबंधन ढांचे में बड़े बदलाव की तैयारी चल रही है। सूत्रों के अनुसार, चढ़ावा गिनने की व्यवस्था, मंदिर संपत्तियों के रखरखाव और दर्शन व्यवस्था को नए सिरे से तैयार करने पर विचार किया जा रहा है। हाल ही में सामने आए चढ़ावा से जुड़े विवाद के बाद मंदिर प्रशासन और संबंधित संस्थाओं के भीतर गंभीर मंथन शुरू हो गया है। माना जा रहा है कि प्रबंधन को और अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए नई प्रणाली लागू की जाएगी।
सूत्रों के मुताबिक, मंदिर संचालन के लिए एक नया स्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा, जिसमें हर अधिकारी और कर्मचारी की जिम्मेदारी लिखित रूप में तय होगी। किस अधिकारी को कौन-सा कार्य सौंपा जाएगा, कौन किसे रिपोर्ट करेगा और जवाबदेही कैसे तय होगी, यह सब स्पष्ट रूप से निर्धारित किया जाएगा।
Ayodhya Ram Mandir Management Change
इसके साथ ही ट्रस्ट के सदस्यों और पदेन सदस्यों की भूमिका भी औपचारिक रूप से दर्ज की जाएगी ताकि कार्यप्रणाली में पारदर्शिता बनी रहे। नई व्यवस्था के तहत चढ़ावा गिनने और वित्तीय लेन-देन का काम किसी एक व्यक्ति के भरोसे नहीं रहेगा। इसमें कई स्तरों पर निगरानी और भागीदारी तय की जाएगी ताकि किसी भी तरह की अनियमितता की संभावना समाप्त की जा सके। मंदिर में काम कर रहे लगभग 1500 कर्मचारियों की भूमिका और जिम्मेदारी भी स्पष्ट रूप से परिभाषित करने की योजना है।
SIT रिपोर्ट के बाद बनेगा SOP सिस्टम
सूत्रों का कहना है कि स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की रिपोर्ट आने के बाद मंदिर प्रबंधन, वित्तीय लेन-देन और संपत्ति सुरक्षा के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) तैयार किया जाएगा। इस SOP में जिम्मेदारियों का स्पष्ट बंटवारा होगा और किसी एक व्यक्ति को अधिक अधिकार देने की बजाय सामूहिक जवाबदेही व्यवस्था लागू की जाएगी। इस प्रक्रिया को लेकर प्रारंभिक तैयारी शुरू हो चुकी है। ट्रस्ट के भीतर चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव जैसे प्रमुख नामों की भूमिका को लेकर भी चर्चा तेज है। सूत्रों के अनुसार, भविष्य में ट्रस्ट संरचना में बदलाव या कुछ नए चेहरों को शामिल करने पर विचार किया जा सकता है। हालांकि, संगठन के कुछ लोग यह भी मानते हैं कि लंबे समय से सेवा दे रहे सदस्यों की निष्ठा पर सवाल नहीं उठाया जाना चाहिए और बदलाव संतुलित तरीके से होना चाहिए।
इतनी है फंडिंग
| बैंक / श्रेणी | राशि |
|---|---|
| स्टेट बैंक ऑफ इंडिया | 809 करोड़ |
| पंजाब नेशनल बैंक | 653 करोड़ |
| बैंक ऑफ बड़ौदा | 328 करोड़ |
| म्यूचुअल फंड | 87 करोड़ |
| ऑटो स्वीप | 59 करोड़ |
| सेविंग्स | 5 करोड़ |
वैष्णोदेवी मॉडल की तर्ज पर नया बोर्ड बनाने की चर्चा
मंदिर प्रबंधन को लेकर ब्यूरोक्रेसी भी सक्रिय हो गई है। चर्चा है कि वैष्णोदेवी श्राइन बोर्ड की तर्ज पर एक अलग प्रशासनिक ढांचा तैयार किया जा सकता है, जिसमें किसी रिटायर्ड या मौजूदा IAS अधिकारी को सीईओ की जिम्मेदारी दी जा सकती है। इससे मंदिर संचालन सीधे एक पेशेवर प्रशासनिक प्रणाली के तहत आ सकता है और प्रबंधन अधिक संगठित और पारदर्शी हो सकता है।
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