Supreme Court Aadhaar Case : सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को उस याचिका पर केंद्र सरकार, सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से जवाब तलब किया है, जिसमें आधार कार्ड के उपयोग को लेकर सवाल उठाए गए हैं। याचिका में आरोप लगाया गया है कि आधार का इस्तेमाल नागरिकता, मूल निवास और पते के प्रमाण के रूप में गलत तरीके से किया जा रहा है, जबकि कानून में इसे केवल पहचान सत्यापन तक सीमित बताया गया है। याचिकाकर्ता की ओर से मांग की गई है कि आधार का उपयोग केवल पहचान की पुष्टि तक सीमित किया जाए।
इसमें केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और चुनाव आयोग को निर्देश देने की भी मांग की गई है कि आधार को नागरिकता, निवास, जन्मतिथि या पते के प्रमाण के रूप में स्वीकार न किया जाए। याचिका में यह भी कहा गया है कि विभिन्न सेवाओं में आधार के व्यापक उपयोग से कई तरह की प्रशासनिक और सुरक्षा संबंधी समस्याएं पैदा हो रही हैं।
Supreme Court Aadhaar Case
याचिका में आधार अधिनियम, 2016 की धारा 9 का उल्लेख किया गया है, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि आधार नागरिकता या डोमिसाइल का प्रमाण नहीं है। इसके अलावा UIDAI की 22 अगस्त 2023 की अधिसूचना का भी हवाला दिया गया है, जिसमें यह साफ कहा गया है कि आधार केवल पहचान का प्रमाण है, न कि जन्मतिथि, पता या नागरिकता का। याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि आधार का उपयोग कई जगहों पर उम्र, पते और नागरिकता के प्रमाण के रूप में किया जा रहा है। इसके आधार पर स्कूलों में दाखिला, संपत्ति खरीद, राशन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस और अन्य दस्तावेज आसानी से जारी हो रहे हैं। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि इस स्थिति का फायदा उठाकर कुछ मामलों में अवैध प्रवासियों द्वारा भी अन्य पहचान दस्तावेज प्राप्त किए जा रहे हैं।
प्रक्रिया पर सवाल
याचिका में चुनावी प्रक्रिया से जुड़े फॉर्म-6 और वोटर रजिस्ट्रेशन सत्यापन प्रणाली पर भी सवाल उठाए गए हैं। इसमें कहा गया है कि मौजूदा दस्तावेज सत्यापन प्रणाली पर्याप्त मजबूत नहीं है, जिसके कारण बिना उचित जांच के भी नाम मतदाता सूची में शामिल हो सकते हैं। इस प्रक्रिया में सुधार की मांग के साथ एक उच्चस्तरीय निगरानी समिति बनाने का सुझाव दिया गया है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश, साइबर सुरक्षा और फॉरेंसिक विशेषज्ञ शामिल हों। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 26 सितंबर 2018 के अपने ऐतिहासिक फैसले में आधार अधिनियम को संवैधानिक रूप से वैध माना था। हालांकि कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि बैंक खाते, मोबाइल सिम और स्कूल एडमिशन जैसी सेवाओं के लिए आधार अनिवार्य नहीं किया जा सकता। वहीं सरकारी सब्सिडी और कल्याणकारी योजनाओं में इसके उपयोग को वैध ठहराया गया था।
आधार कानून की स्थिति
आधार (वित्तीय और अन्य सब्सिडी, लाभ एवं सेवाओं की लक्षित डिलीवरी) अधिनियम, 2016 के तहत UIDAI को आधार नंबर जारी करने और उसके संचालन का अधिकार दिया गया है। कानून में यह स्पष्ट रूप से कहा गया है कि आधार नागरिकता का प्रमाण नहीं है, बल्कि यह केवल पहचान का एक साधन है।
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