Moradabad Agriculture College : मुरादाबाद मंडल के विद्यार्थियों के लिए एक अच्छी खबर सामने आई है। शासन ने मुरादाबाद में नए कृषि कॉलेज की स्थापना को मंजूरी दे दी है। स्वीकृति मिलने के बाद गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय प्रशासन ने कॉलेज शुरू करने की तैयारियां तेज कर दी हैं। फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती कॉलेज के लिए उपयुक्त भूमि का चयन करना है, जिस पर प्रशासनिक स्तर पर काम शुरू हो चुका है। वर्तमान समय में मुरादाबाद मंडल के छात्रों के पास कृषि शिक्षा के बहुत कम विकल्प उपलब्ध हैं। सरकारी स्तर पर बीएससी एग्रीकल्चर की पढ़ाई मुख्य रूप से बिजनौर जिले के धामपुर और अमरोहा में संचालित संस्थानों तक सीमित है।
मुरादाबाद, रामपुर और संभल जैसे बड़े जिलों में कृषि शिक्षा के लिए छात्रों को निजी संस्थानों या दूसरे शहरों का रुख करना पड़ता है। ऐसे में नए कृषि कॉलेज की स्थापना लंबे समय से महसूस की जा रही आवश्यकता को पूरा करेगी।
Moradabad Agriculture College
गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय प्रशासन ने कॉलेज संचालन से जुड़ी प्रारंभिक तैयारियां शुरू कर दी हैं। विश्वविद्यालय का कहना है कि शासन की मंजूरी मिलने के बाद अब सभी प्रयास भूमि चयन और आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था पर केंद्रित किए जा रहे हैं। भूमि उपलब्ध होते ही कॉलेज की स्थापना से संबंधित अन्य प्रक्रियाओं को गति दी जाएगी।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सचिन माहेश्वरी के अनुसार कृषि कॉलेज स्थापित करने के लिए पर्याप्त भूमि की आवश्यकता होती है। इसके लिए केवल भवन निर्माण ही नहीं, बल्कि प्रयोगात्मक खेती और शोध गतिविधियों के लिए भी बड़े क्षेत्र की जरूरत होती है। ऐसे में उपयुक्त जमीन की पहचान और उपलब्धता सुनिश्चित करने में जिला प्रशासन की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रहने वाली है।
मानकों को करना होगा पूरा
कृषि कॉलेज खोलने के लिए विभिन्न शैक्षणिक और तकनीकी मानकों का पालन करना अनिवार्य है। इनमें आधुनिक प्रयोगशालाएं, अनुसंधान केंद्र, कृषि फार्म, प्रशिक्षण सुविधाएं और छात्रों के लिए आवश्यक आधारभूत ढांचा शामिल है। विश्वविद्यालय इन सभी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए योजना तैयार कर रहा है ताकि भविष्य में संस्थान उच्च गुणवत्ता वाली कृषि शिक्षा प्रदान कर सके। कॉलेज शुरू होने के बाद मुरादाबाद मंडल के हजारों छात्रों को अपने क्षेत्र में ही कृषि शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। इससे न केवल उच्च शिक्षा के लिए दूसरे जिलों पर निर्भरता कम होगी, बल्कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के विद्यार्थियों को भी राहत मिलेगी। स्थानीय स्तर पर बेहतर शिक्षा उपलब्ध होने से कृषि क्षेत्र में प्रशिक्षित युवाओं की संख्या बढ़ेगी।
कृषि क्षेत्र को होगा लाभ
कृषि कॉलेज की स्थापना का लाभ केवल विद्यार्थियों तक सीमित नहीं रहेगा। आधुनिक खेती, नई तकनीकों, बीज अनुसंधान और कृषि नवाचारों को बढ़ावा मिलने से क्षेत्र के किसानों को भी फायदा होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह संस्थान भविष्य में कृषि अनुसंधान और प्रशिक्षण का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है, जिससे पूरे मंडल की कृषि व्यवस्था को नई दिशा मिलेगी।




