Kanpur News : कानपुर के चमड़ा उद्योग के लिए बेहद अहम मानी जा रही रमईपुर मेगा लेदर क्लस्टर परियोजना अब दोबारा पटरी पर लौटती दिख रही है। वर्षों से विभिन्न कारणों से रुकी इस महत्वाकांक्षी योजना को मुख्यमंत्री कार्यालय की मंजूरी मिलने के बाद अब उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) के हवाले कर दिया गया है। इसके साथ ही परियोजना को आगे बढ़ाने की प्रशासनिक प्रक्रिया तेज हो गई है। उद्योग जगत को उम्मीद है कि इस फैसले से लंबे समय से ठप पड़ी योजना जल्द धरातल पर उतर सकेगी।
रमईपुर में प्रस्तावित मेगा लेदर क्लस्टर में करीब 6000 करोड़ रुपये के निवेश की संभावना जताई गई है। इस औद्योगिक परिसर में लगभग 175 टेनरियों के अलावा जूते, सैडलरी और अन्य चमड़ा उत्पाद बनाने वाली आधुनिक इकाइयां स्थापित करने की योजना है।
Kanpur के रमईपुर मेगा लेदर
परियोजना पूरी होने के बाद कानपुर का पारंपरिक चमड़ा उद्योग नई तकनीक और आधुनिक बुनियादी सुविधाओं के साथ वैश्विक बाजार में और मजबूत स्थिति हासिल कर सकेगा। करीब 13 वर्ष पहले शुरू की गई इस परियोजना के लिए स्पेशल परपस व्हीकल (एसपीवी) का गठन किया गया था। योजना के तहत 235 एकड़ क्षेत्र में आधुनिक लेदर क्लस्टर विकसित किया जाना है। इसमें लगभग 55 एकड़ भूमि पर टेनरियों की स्थापना होगी, जबकि कुल क्षेत्रफल का करीब 30 प्रतिशत हिस्सा ग्रीन बेल्ट के रूप में विकसित किया जाएगा। पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए यहां 20 एमएलडी क्षमता का कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट भी स्थापित करने का प्रस्ताव है, जिससे औद्योगिक अपशिष्ट का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया जा सके।
जमीन विवाद बना सबसे बड़ी बाधा
करीब 451 करोड़ रुपये की इस परियोजना के लिए केंद्र सरकार ने 125 करोड़ रुपये की सहायता देने का भी निर्णय लिया था। चार वर्ष पहले केंद्र से परियोजना को सैद्धांतिक मंजूरी भी मिल गई थी। इसके बाद एसपीवी के प्रमोटरों ने जमीनों की अदला-बदली की प्रक्रिया शुरू की, लेकिन करीब 27 एकड़ भूमि से जुड़ा विवाद सुलझ नहीं पाया। इसी कारण परियोजना वर्षों तक आगे नहीं बढ़ सकी और निवेशकों की उम्मीदें अधूरी रह गईं। रमईपुर मेगा लेदर क्लस्टर को प्रदेश के सबसे बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट्स में शामिल किया जा रहा है।
इसके शुरू होने के बाद प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से दो लाख से अधिक लोगों को रोजगार मिलने का अनुमान है। साथ ही इस परियोजना से हर वर्ष 13 से 15 हजार करोड़ रुपये के कारोबार की संभावना भी जताई गई है। इससे न केवल कानपुर बल्कि पूरे प्रदेश के निर्यात और औद्योगिक विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है।
तेज हुई प्रक्रिया
चर्म निर्यात परिषद के क्षेत्रीय अध्यक्ष यादवेंद्र सचान के अनुसार, 28 जून को लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात के दौरान इस परियोजना का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया था। मुख्यमंत्री ने मामले में सकारात्मक कार्रवाई का भरोसा दिया था। अब मुख्यमंत्री कार्यालय से परियोजना यूपीसीडा को सौंपे जाने के बाद उद्योग जगत को उम्मीद है कि वर्षों से लंबित यह योजना जल्द जमीन पर उतरकर कानपुर के चमड़ा उद्योग को नई पहचान देगी।
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