Bilaspur News : बिलासपुर जिले के बिल्हा क्षेत्र के ग्राम बरतोरी में आवारा कुत्तों के हमले ने पूरे गांव को दहला दिया। रविवार को दो छोटे बच्चे गांव में खेल रहे थे, तभी अचानक कई आवारा कुत्तों ने उन पर हमला कर दिया। बच्चों के चीखने की आवाज सुनकर आसपास के लोग मौके की तरफ दौड़े, लेकिन तब तक दोनों बच्चे गंभीर रूप से घायल हो चुके थे।
हमले में एक बच्चे की आंख के नीचे गहरा घाव हो गया, जबकि दूसरे बच्चे का चेहरा और मुंह बुरी तरह जख्मी हो गया। घटना के बाद गांव में अफरा-तफरी मच गई और परिजन बच्चों को तुरंत अस्पताल लेकर पहुंचे।
Bilaspur में आवारा कुत्तों का आतंक!
दोनों बच्चों को इलाज के लिए तत्काल बिलासपुर के सिम्स अस्पताल पहुंचाया गया। डॉक्टरों ने शुरुआती जांच में पाया कि चोटें बेहद गंभीर हैं और चेहरे के संवेदनशील हिस्सों तक पहुंच चुकी हैं। स्थिति को देखते हुए बच्चों को तुरंत इमरजेंसी वार्ड में भर्ती किया गया। चिकित्सकों के मुताबिक, बच्चों की आंखों और पलकों के आसपास गहरे जख्म थे। संक्रमण और रेबीज के खतरे को देखते हुए इसे कैटेगरी-3 डॉग बाइट माना गया, जो सबसे गंभीर श्रेणी में आता है। अस्पताल पहुंचते ही घावों की गहन सफाई की गई और एंटी-रेबीज वैक्सीन शुरू कर दी गई।
आंख बचाने के लिए करनी पड़ी इमरजेंसी सर्जरी
डॉक्टरों ने बताया कि एक बच्चे की पलकों और आंख के आसपास के हिस्से को गंभीर नुकसान पहुंचा था। ऐसे में देरी करना खतरनाक साबित हो सकता था। विशेषज्ञ टीम ने तुरंत नेत्र रोग ऑपरेशन थिएटर में अर्जेंट लिड रिपेयर सर्जरी की। सर्जरी के दौरान क्षतिग्रस्त ऊतकों की सावधानी से मरम्मत की गई, ताकि बच्चों की आंखों की रोशनी सुरक्षित रखी जा सके। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि समय पर इलाज मिलने से स्थिति को काफी हद तक संभाल लिया गया। फिलहाल दोनों बच्चों की हालत स्थिर बताई जा रही है, लेकिन डॉक्टर लगातार निगरानी बनाए हुए हैं।
विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने संभाला मोर्चा
इस पूरे उपचार में सिम्स अस्पताल के कई विभागों की टीम एक साथ जुटी रही। नेत्र रोग विभाग की डॉ. प्रभा सोनवानी, डॉ. संजय चौधरी, डॉ. आरती और डॉ. अनिकेत ने सर्जरी में अहम भूमिका निभाई। वहीं निश्चेतना विभाग से डॉ. यशा तिवारी और डॉ. द्रोपती सहित अन्य मेडिकल स्टाफ भी मौजूद रहा। नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. सुचिता सिंह ने बताया कि बच्चों की चोटें बेहद संवेदनशील जगह पर थीं। ऐसे मामलों में तुरंत सर्जरी और सही इलाज बेहद जरूरी होता है, वरना दृष्टि जाने का खतरा बढ़ जाता है।
अंधविश्वास से बचने की सलाह
सिम्स के डीन डॉ. रमणेश मूर्ति ने कहा कि डॉग बाइट के मामलों में जरा सी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है। उन्होंने लोगों से अपील की कि कुत्ते के काटने पर झाड़-फूंक या घरेलू इलाज के भरोसे न रहें और तुरंत अस्पताल पहुंचें। मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. लखन सिंह ने भी कहा कि रेबीज एक बेहद खतरनाक बीमारी है, लेकिन समय पर वैक्सीन और वैज्ञानिक उपचार से इससे बचाव संभव है। उन्होंने लोगों से जागरूक रहने की अपील की।
बढ़ रही लोगों की चिंता
बिलासपुर शहर और आसपास के इलाकों में लगातार बढ़ रहे डॉग बाइट के मामलों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि गांव और शहर दोनों जगहों पर आवारा कुत्तों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, लेकिन नियंत्रण के लिए ठोस कदम नजर नहीं आ रहे। जानकारी के मुताबिक, बिलासपुर शहरी क्षेत्र में इस समय आठ हजार से ज्यादा आवारा कुत्ते मौजूद हैं। कोर्ट के निर्देशों के बावजूद नसबंदी और नियंत्रण अभियान अपेक्षित गति से नहीं चल पा रहा है। घटना के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द कार्रवाई और आवारा कुत्तों पर नियंत्रण की मांग की है।
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