Donald Trump : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खाड़ी क्षेत्र में चल रहे तनाव के बीच एक अहम फैसला लेते हुए ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ को फिलहाल रोकने का आदेश दिया है। यह कदम ईरान के साथ जारी बातचीत को अंतिम रूप देने के उद्देश्य से उठाया गया है। ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि अगर वार्ता सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ती है, तो हालात को शांत करने की संभावना बन सकती है।

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि पाकिस्तान समेत कई देशों की पहल के बाद ईरान के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। इसी को ध्यान में रखते हुए दोनों पक्षों ने अस्थायी तौर पर इस अभियान को रोकने पर सहमति जताई है, ताकि समझौते की संभावनाओं को परखा जा सके।
Donald Trump ने रोका प्रोजेक्ट फ्रीडम
‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ को रोका गया है, लेकिन अमेरिका ने साफ कर दिया है कि क्षेत्र में उसकी नौसैनिक गतिविधियां और सुरक्षा उपाय जारी रहेंगे। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण जलमार्गों पर नियंत्रण और निगरानी में कोई ढील नहीं दी जाएगी। इस फैसले से पहले खाड़ी क्षेत्र में हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए थे। संघर्ष-विराम के बावजूद अमेरिका और ईरान के बीच हमले की घटनाएं सामने आई थीं। कई व्यापारिक जहाजों ने विस्फोट और आग लगने की सूचना दी थी, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई थी।
सैन्य कार्रवाई
अमेरिका ने दावा किया कि उसने ईरान की छह सैन्य नौकाओं को नष्ट किया, जबकि दूसरी ओर संयुक्त अरब अमीरात के एक तेल बंदरगाह पर आगजनी की घटना भी सामने आई। इस घटना में कुछ विदेशी नागरिकों के घायल होने की खबर है। इन घटनाओं ने क्षेत्र में अस्थिरता को और बढ़ा दिया। ईरान की ओर से संकेत दिया गया है कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी पकड़ ढीली करने को तैयार है, लेकिन इसके बदले अमेरिका से प्रतिबंध हटाने की मांग की गई है। ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को इस बातचीत से अलग रखते हुए सिर्फ आर्थिक और समुद्री मुद्दों पर समझौते की बात कही है।
ईरानी विदेश मंत्री का बयान
अब्बास अराघची ने ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ की आलोचना करते हुए इसे ‘प्रोजेक्ट डेडलॉक’ करार दिया है। उनका कहना है कि हालिया घटनाओं ने साबित कर दिया है कि इस संकट का समाधान सैन्य कार्रवाई से संभव नहीं है। उन्होंने कूटनीतिक रास्ते को ही बेहतर विकल्प बताया। ईरान ने यह भी बताया कि पाकिस्तान की मध्यस्थता से दोनों देशों के बीच बातचीत आगे बढ़ रही है। साथ ही उन्होंने अमेरिका और संयुक्त अरब अमीरात को चेतावनी दी कि वे किसी भड़काऊ रणनीति में न उलझें। अब वैश्विक स्तर पर नजर इस बात पर है कि यह वार्ता किस दिशा में जाती है और क्या इससे क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित हो पाती है।
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