Mashik kalashtami:- कालाष्टमी को काल भैरव भगवान को समर्पित किया गया है। इस दिन भगवान काल भैरव को पूजा जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान काल भैरव की पूजा आराधना करने से कई लाभ प्राप्त होते हैं। जीवन की कई समस्याएं समाप्त होती है और अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता है। काल भैरव भगवान की पूजा आराधना करने से जीवन में कहीं बदलाव आते हैं और अगर आप इस दिन व्रत और पूजा आराधना करते हैं तो ऐसे में आपके जीवन में कई शुभ बदलाव होते हैं।
कब मनाई जाएगी मासिक कालाष्टमी?
मासिक कालाष्टमी इस बार वैदिक पंचांग के मुताबिक 10 अप्रैल यानी कि शुक्रवार के दिन मनाई जाएगी। यानी कि कालाष्टमी आज ही के दिन मनाई जाएगी। कालाष्टमी हर महीने के कृष्ण पक्ष में आने वाली अष्टमी है जिसे कालाष्टमी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन खास तौर पर कालाष्टमी का दिन तंत्र-मंत्र की साधना करने वाले लोगों के लिए बहुत ही खास माना जाता है लेकिन गृहस्थ लोगों के लिए इस दिन काल भैरव की पूजा आराधना करना और उनके मंत्रों का जाप करना बहुत ही शुभ माना जाता है।
काल भैरव अष्टकम्
देवराजसेव्यमानपावनांघ्रिपङ्कजं
व्यालयज्ञसूत्रमिन्दुशेखरं कृपाकरम्।
नारदादियोगिवृन्दवन्दितं दिगंबरं
काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे॥॥
भानुकोटिभास्वरं भवाब्धितारकं परं
नीलकण्ठमीप्सितार्थदायकं त्रिलोचनम्।
कालकालमंबुजाक्षमक्षशूलमक्षरं
काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे॥॥
शूलटङ्कपाशदण्डपाणिमादिकारणं
श्यामकायमादिदेवमक्षरं निरामयम्।
भीमविक्रमं प्रभुं विचित्रताण्डवप्रियं
काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे॥॥
भुक्तिमुक्तिदायकं प्रशस्तचारुविग्रहं
भक्तवत्सलं स्थितं समस्तलोकविग्रहम्।
विनिक्वणन्मनोज्ञहेमकिङ्किणीलसत्कटिं
काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे॥॥
धर्मसेतुपालकं त्वधर्ममार्गनाशकं
कर्मपाशमोचकं सुशर्मदायकं विभुम्।
स्वर्णवर्णशेषपाशशोभिताङ्गमण्डलं
काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे॥॥
रत्नपादुकाप्रभाभिरामपादयुग्मकं
नित्यमद्वितीयमिष्टदैवतं निरंजनम्।
मृत्युदर्पनाशनं करालदंष्ट्रमोक्षणं
काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे॥॥
अट्टहासभिन्नपद्मजाण्डकोशसंततिं
दृष्टिपातनष्टपापजालमुग्रशासनम्।
अष्टसिद्धिदायकं कपालमालिकाधरं
काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे॥॥
भूतसंघनायकं विशालकीर्तिदायकं
काशिवासलोकपुण्यपापशोधकं विभुम्।
नीतिमार्गकोविदं पुरातनं जगत्पतिं
काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे॥॥
करें इन मंत्रों का जप
1. ॐ भैरवाय नमः
2. ॐ कालभैरवाय नमः
3. ॐ भ्रां कालभैरवाय फट्
4 ॐ ह्रीं बटुक भैरवाय नमः
5. ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं
6. ॐ हं षं नं गं कं सं खं महाकाल भैरवाय नमः
7. भैरव गायत्री मंत्र – ॐ कालकालाय विद्महे कालतितयाय धीमहि तन्नो भैरवः प्रचोदयात्
Read More:- छत्तीसगढ़ के कांकेर में भयानक सड़क हादसा, हादसे में 6 लोगों की मौत और कई लोग गंभीर रूप से घायल





