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World की वो प्रथाएं जो महिलाओं के लिए बनती हैं बोझ, परंपरा के नाम पर शरीर पर नियंत्रण!

World's Unique Customs
Source: Dainik Jagran

World Unique Customs : दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में महिलाओं के शरीर को लेकर कई तरह की परंपराएं चली आ रही हैं। इन्हें अक्सर संस्कृति, सुंदरता या मर्यादा से जोड़ा जाता है, लेकिन इनका असर महिलाओं की सेहत और मानसिक स्थिति पर भी पड़ता है। आज भी कई जगहों पर ऐसी प्रथाएं मौजूद हैं, जो सवाल खड़े करती हैं। अफ्रीकी देशों जैसे Cameroon, Nigeria और Chad में ब्रेस्ट आयरनिंग की प्रथा देखने को मिलती है।

इसमें किशोरियों के स्तनों को गर्म वस्तुओं से दबाया जाता है, ताकि उनका विकास धीमा हो सके। इसका मकसद लड़कियों को यौन नजरों से बचाना बताया जाता है, लेकिन यह प्रक्रिया बेहद दर्दनाक होती है और अक्सर परिवार के लोग ही इसे करते हैं।

World Unique Customs

Myanmar और उत्तरी Thailand के कायन समुदाय में महिलाओं की लंबी गर्दन को सुंदरता का प्रतीक माना जाता है। छोटी उम्र से ही लड़कियों के गले में पीतल के छल्ले पहनाए जाते हैं। समय के साथ इनकी संख्या बढ़ाई जाती है, जिससे शरीर की बनावट बदलने लगती है और गर्दन लंबी दिखाई देती है। Female Genital Mutilation एक गंभीर और विवादित प्रथा है, जो अफ्रीका, मध्य पूर्व और कुछ एशियाई देशों में देखी जाती है। इसमें बिना चिकित्सीय कारणों के महिला जननांगों के हिस्सों को काटा या बदला जाता है। इसे शुद्धता और सामाजिक मान्यता से जोड़ा जाता है, लेकिन इससे महिलाओं के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ता है।

विधवाओं पर कठोर नियम

अफ्रीका के कुछ हिस्सों में पति की मृत्यु के बाद महिलाओं को सख्त नियमों का पालन करना पड़ता है। कई जगहों पर विधवाओं को यौन शुद्धिकरण जैसी प्रथाओं से गुजरना पड़ता है या उन्हें परिवार के किसी पुरुष सदस्य के साथ रहने के लिए मजबूर किया जाता है। यह न केवल उनके अधिकारों का उल्लंघन है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी खतरा बन सकता है।

जबरदस्ती वजन बढ़ाने की प्रथा

Mauritania में ‘लेब्लौह’ नाम की परंपरा के तहत लड़कियों को जबरदस्ती ज्यादा खाना खिलाया जाता है। यहां मोटापा सुंदरता और शादी के लिए जरूरी माना जाता है। इसके लिए लड़कियों को खास जगहों पर भेजा जाता है, जहां उन्हें भारी मात्रा में खाना खिलाया जाता है, जिससे उनकी सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है। इन प्रथाओं को परंपरा के नाम पर आज भी कई जगहों पर अपनाया जाता है, लेकिन अब इन्हें लेकर जागरूकता बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि महिलाओं की सेहत, अधिकार और सम्मान को ध्यान में रखते हुए ऐसी प्रथाओं पर पुनर्विचार जरूरी है। समाज में बदलाव के साथ ही इन परंपराओं को खत्म करने की जरूरत भी महसूस की जा रही है।

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