Uttarakhand News:- उत्तराखंड में बिजली दरों को लेकर नया अपडेट सामने आया है। राज्य गठन होने के बाद उत्तराखंड में आयोग ने तीसरी बार ऐसा हुआ कि बिजली दरे नहीं बढ़ाई है। इससे पहले साल 2006-07 और 2014-15 में आयोग ने शून्य टैरिफ दिया था और 2003 में पहले तेरी आदेश भी जारी कर दिया गया था। उस समय आयोग द्वारा आम घरेलू उपभोक्ताओं के लिए किसी तरह का कोई फिक्स चार्ज नहीं तय किया गया था। खपत के हिसाब से बिजली दरें 1.80 से 2.50 रुपए प्रति यूनिट तक रखी गई है। कमर्शियल उपभोक्ताओं के लिए दरें तीन से साढ़े तीन रुपए और वही सरचार्ज समेत कई श्रेणियां में दरें घटाते हुए टैरिफ जारी कर दिए गए थे।
हर साल होती रही बढ़ोतरी
इसके बाद हर साल कुछ ना कुछ बढ़ोतरी देखने को मिली। साल 2006-07 में आयोग ने शून्य टैरिफ की बढ़ोतरी कर दी थी। इसके साथ ही साल 2014-15 और अब साल 2026-27 के लिए आयोग ने शून्य बढ़ोतरी का आदेश दे दिया है। वही साल 2009-10 में बिजली दरों में सर्वाधिक 17% की बढ़ोतरी दर्ज की है।
बीते 16 साल में कितनी बढ़ोतरी हुई
| वर्ष | प्रतिशत | बढ़ोतरी |
| 2010 | 10 | 17 |
| 2012 | 11 | 10 |
| 2013 | 14- | 05 |
| 2014 | 15 | 00 |
| 2015 | 16 | 7.30 |
| 2016 | 17 | 5.10 |
| 2017 | 18 | 5.80 |
| 2018 | 19 | 2.60 |
| 2019 | 20 | 3.50 |
| 2020 | 21 | 4.50 |
| 2021 | 22 | 4.30 |
| 2022 | 23 | 2.68 |
| 2023 | 24 | 9.64 |
| 2024 | 25 | 6.92 |
| 2025 | 26 | 5.62 |
| 2026 | 27 | 00 |
लगभग 2801 गांव में नहीं थी बिजली
जानकारी के मुताबिक जब आयोग ने साल 2003 में पहला टैरिफ आदेश जारी किया था। उसे दौरान लगभग 2801 गांव में बिजली नहीं थी। उस समय केवल 30% घरों में ही बिजली का कनेक्शन था। यूपीसीएल के प्रस्ताव में आयोग द्वारा स्पष्ट किया गया है कि इन गांवों तक बिजली पहुंच जानी चाहिए। आयोग द्वारा 2004-05 के अंत तक 100% मीटरिंग का लक्ष्य तय किया गया। उस टाइम 748750 घरेलू, 89605 व्यावसायिक, 8140 औद्योगिक, 17324 कृषि और 1372 स्ट्रीट लाइट और अन्य उपभोक्ता भी थे। इन सब में से 765569 उपभोक्ताओं के पास ही मीटर लगे हुए थे। बाकी 99,622 बिना मीटर वाले थे। आज टोटल बिजली उपभोक्ताओं का आंकड़ा लगभग 29 लाख पार जा चुके है।
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