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India का पहला डक्टाइल आयरन पाइप प्लांट, अब तीसरी पीढ़ी संभाल रही है कमान

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India : भारत के कॉरपोरेट इतिहास में कई ऐसी कहानियां हैं, जहां छोटे स्तर से शुरू हुआ कारोबार समय के साथ बड़ी कंपनी में बदल गया। ऐसी ही कहानी डालमिया बिजनेस ग्रुप की एक छोटी फाउंड्री की है, जिसने आज वैश्विक पहचान बना ली है। इस फाउंड्री को आगे बढ़ाने का श्रेय घनश्याम केजरीवाल को जाता है, जिन्हें कंपनी में ‘बड़े साहब’ कहा जाता था। इस कंपनी की शुरुआत साल 1955 में ‘डालमिया आयरन एंड स्टील लिमिटेड’ के रूप में हुई थी। कोलकाता के पास खड़दह में यह एक छोटी स्टील फाउंड्री थी, जिसे जयदयाल डालमिया ने स्थापित किया था। उस समय इसका काम सीमित था, लेकिन आगे चलकर इसी जगह से बड़े बदलाव की शुरुआत हुई।

1960 के दशक में कंपनी की दिशा तब बदली जब घनश्याम केजरीवाल इस कारोबार से जुड़े। उन्होंने सिर्फ जिम्मेदारी नहीं संभाली, बल्कि इसे नए स्तर तक ले जाने की सोच के साथ काम शुरू किया। करीब 1965 में कंपनी का नाम बदलकर ‘इलेक्ट्रोस्टील कास्टिंग्स लिमिटेड’ कर दिया गया, जो आगे चलकर इसकी नई पहचान बना।

India का पहला डक्टाइल आयरन पाइप प्लांट

घनश्याम केजरीवाल ने कंपनी में कई बड़े फैसले लिए। साल 1994 में भारत का पहला डक्टाइल आयरन पाइप प्लांट लगाया गया, जिसने कंपनी को नई ऊंचाई दी। इससे पानी सप्लाई से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़ा बदलाव आया। इसके अलावा 1980 के दशक में नई यूनिट्स और अधिग्रहण के जरिए कंपनी का विस्तार किया गया। कंपनी को आत्मनिर्भर बनाने के लिए 2005 में हल्दिया में कोक ओवन, स्पंज आयरन और पावर प्लांट लगाए गए। इस कदम से उत्पादन लागत कम हुई और मुनाफा बढ़ा। इससे कंपनी को बाजार में मजबूती मिली और वह प्रतिस्पर्धा में आगे निकलने लगी।

दुनिया भर में फैला कारोबार

आज इलेक्ट्रोस्टील कास्टिंग्स सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। कंपनी अपने कुल उत्पादन का करीब 50 प्रतिशत हिस्सा 90 देशों में निर्यात करती है। स्पन आयरन पाइप बनाने वाली दुनिया की टॉप कंपनियों में इसका नाम शामिल है। यह कंपनी भारतीय उद्योग का मजबूत चेहरा बन चुकी है। 31 मार्च 2025 तक कंपनी का रेवेन्यू करीब 7,300 करोड़ रुपये के आसपास पहुंच गया है। शेयर बाजार में लिस्टेड इस कंपनी का मार्केट कैप भी मजबूत स्थिति में है। यह दिखाता है कि सही रणनीति और नेतृत्व से कोई भी छोटा कारोबार बड़ी सफलता हासिल कर सकता है।

घनश्याम केजरीवाल के 2019 में निधन के बाद भी कंपनी मजबूत बनी हुई है। आज इसकी कमान तीसरी पीढ़ी के हाथों में है। उमंग केजरीवाल जैसे नए नेतृत्व इसे आगे बढ़ा रहे हैं। परिवार की मजबूत पकड़ और विज़न के कारण कंपनी लगातार आगे बढ़ रही है।

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