Airlines : पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर अब भारतीय एयरलाइंस पर साफ दिखने लगा है। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतें बढ़ी हैं। इसके साथ ही कई एयरस्पेस बंद होने से उड़ानों की लागत भी तेजी से बढ़ गई है। इस स्थिति से निपटने के लिए नागरिक उड्डयन मंत्रालय नए विकल्प तलाश रहा है। सरकार विमान ईंधन यानी एटीएफ पर टैक्स कम करने पर विचार कर रही है। इसके लिए राज्यों के साथ बातचीत शुरू की गई है, ताकि एयरलाइंस को कुछ राहत मिल सके।
नागरिक उड्डयन मंत्री K. Ram Mohan Naidu ने इस मुद्दे पर राज्यों और मुख्यमंत्रियों से बात शुरू की है। दरअसल, अलग-अलग राज्यों में एटीएफ पर वैट की दर अलग होती है, जिससे एयरलाइंस की लागत पर सीधा असर पड़ता है।
Airlines को राहत
एयरलाइंस की कुल परिचालन लागत में एटीएफ का हिस्सा करीब 40 फीसदी तक होता है। ऐसे में ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी कंपनियों के लिए बड़ा बोझ बन जाती है। टैक्स में कमी से इस दबाव को कुछ हद तक कम किया जा सकता है। पश्चिम एशिया के कई हिस्सों में एयरस्पेस बंद होने के कारण एयरलाइंस को यूरोप और उत्तरी अमेरिका के लिए लंबा रास्ता अपनाना पड़ रहा है। इससे ईंधन की खपत बढ़ रही है और यात्रा समय भी लंबा हो रहा है। कुछ रूट्स पर उड़ानों में कटौती भी की गई है।
डीजीसीए भी रख रहा नजर
Directorate General of Civil Aviation (डीजीसीए) लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है। अंतरराष्ट्रीय नियामकों के साथ संपर्क में रहकर स्थिति की समीक्षा की जा रही है, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत फैसले लिए जा सकें। इस बार समर शेड्यूल को मंजूरी देते समय अधिकारियों ने सतर्क रुख अपनाया है। एयरलाइंस को उतनी ही उड़ानों की अनुमति दी गई है, जितनी उनकी क्षमता है। इसका मकसद पिछले साल जैसी अव्यवस्था से बचना है।
उड़ानों की संख्या में कमी
29 मार्च से 24 अक्टूबर तक लागू शेड्यूल में उड़ानों की संख्या करीब 10 फीसदी कम कर दी गई है। पिछले साल जहां हर हफ्ते 25,610 उड़ानें थीं, इस बार यह संख्या घटकर करीब 23,049 रह जाएगी। दिसंबर 2025 में IndiGo में बड़े स्तर पर परिचालन बाधाएं आई थीं। कई उड़ानें रद्द करनी पड़ी थीं। इसी अनुभव को देखते हुए इस बार सरकार और नियामकों ने पहले से ही सख्ती बरती है।
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