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Noida Jewar Airport का सपना साकार, अल्ट्रा मॉडर्न टेक्निक से होगा लैस; जानें किन शहरों तक शुरुआती उड़ान

Noida Jewar Airport
Noida Jewar Airport

Noida Jewar Airport : लंबे इंतजार के बाद आखिरकार Noida International Airport का सपना हकीकत में बदल गया। 28 मार्च को प्रधानमंत्री Narendra Modi ने इसका लोकार्पण किया, जिसके साथ ही जेवर से देश के कई बड़े शहरों के लिए उड़ान सेवाएं शुरू होने का रास्ता साफ हो गया। यह उद्घाटन सिर्फ एक एयरपोर्ट की शुरुआत नहीं, बल्कि पूरे NCR की कनेक्टिविटी को नई दिशा देने वाला कदम माना जा रहा है। इस एयरपोर्ट की कहानी करीब 25 साल पुरानी है।

साल 2001 में तत्कालीन मुख्यमंत्री Rajnath Singh ने जेवर में ग्रीनफील्ड इंटरनेशनल एयरपोर्ट का प्रस्ताव रखा था। इसके बाद Atal Bihari Vajpayee की सरकार ने इसकी तकनीकी रिपोर्ट को मंजूरी दी। हालांकि बीच के वर्षों में यह योजना कई बार अटकी, लेकिन 2014 के बाद इसे नई रफ्तार मिली।

Noida Jewar Airport का सपना साकार

केंद्र में सरकार बदलने के बाद इस परियोजना ने तेजी पकड़ी। प्रधानमंत्री मोदी ने आम लोगों तक हवाई सफर पहुंचाने की बात कही और उसी दिशा में यह एयरपोर्ट एक अहम कदम बनकर उभरा। 26 नवंबर 2021 को इसकी नींव रखी गई और करीब साढ़े चार साल में इसका पहला चरण तैयार कर लिया गया। जिस जमीन पर आज एयरपोर्ट खड़ा है, वहां कभी किसान बैलगाड़ी और ट्रैक्टर से सफर करते थे। 1334 हेक्टेयर जमीन पर बने इस प्रोजेक्ट के पीछे हजारों परिवारों का योगदान है। स्थानीय लोगों का मानना है कि उनके त्याग से आने वाली पीढ़ियों के लिए विकास के नए रास्ते खुलेंगे।

एशिया का सबसे बड़ा एयरपोर्ट

जेवर एयरपोर्ट को कुल चार चरणों में विकसित किया जाएगा। पूरा प्रोजेक्ट 5100 हेक्टेयर में फैला होगा, जो इसे एशिया का सबसे बड़ा एयरपोर्ट बनाएगा। पहले चरण में 3900 मीटर लंबा रनवे तैयार हो चुका है, जबकि भविष्य में यहां कुल छह रनवे बनाए जाएंगे। इस एयरपोर्ट का निर्माण पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल के तहत किया जा रहा है। Zurich Airport International AG की सहायक कंपनी यमुना इंटरनेशनल इस प्रोजेक्ट का संचालन और रखरखाव 40 साल तक करेगी। कुल लागत करीब 29 हजार करोड़ रुपये आंकी गई है, जिसमें हर चरण पर अलग-अलग निवेश किया जाएगा।

ग्रीन एनर्जी पर खास फोकस

पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए एयरपोर्ट को ग्रीन एनर्जी से जोड़ने की कोशिश की गई है। इसकी 55 प्रतिशत ऊर्जा जरूरतें हरित स्रोतों से पूरी होंगी। सोलर पैनल के जरिए बिजली उत्पादन शुरू हो चुका है, वहीं पवन ऊर्जा से भी योगदान देने का लक्ष्य रखा गया है। यह एयरपोर्ट आधुनिक तकनीकों से पूरी तरह सुसज्जित है। रनवे पर इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम लगाया गया है, जिससे खराब मौसम में भी विमान आसानी से उतर सकेंगे। इसके अलावा यहां मल्टी-मॉडल कार्गो हब, मेंटेनेंस और रिपेयरिंग जैसी सुविधाएं भी एक ही जगह उपलब्ध होंगी।

सुरक्षा और ऑपरेशन की तैयारी

एयरपोर्ट की सुरक्षा की जिम्मेदारी Central Industrial Security Force को दी गई है, जहां पहले चरण में 1000 से ज्यादा जवान तैनात किए जाएंगे। एयरक्राफ्ट रेस्क्यू और फायरफाइटिंग की हाई कैटेगरी सुविधा भी यहां मौजूद होगी, जिससे बड़े विमानों का संचालन संभव हो सकेगा। पहले चरण में IndiGo, आकासा एयर और एयर इंडिया एक्सप्रेस जैसी एयरलाइंस ने ऑपरेशन की सहमति दी है। शुरुआत में वाराणसी, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई, जयपुर, पटना और श्रीनगर जैसे प्रमुख शहरों के लिए उड़ानें शुरू होंगी।

NCR के विकास को मिलेगी रफ्तार

जेवर एयरपोर्ट का उद्घाटन पूरे क्षेत्र के लिए नई संभावनाओं का द्वार है। इससे रोजगार, व्यापार और कनेक्टिविटी को नई रफ्तार मिलेगी। अब सबकी नजरें उस पल पर टिकी हैं, जब यह एयरपोर्ट आधिकारिक रूप से शुरू होगा और एनसीआर को नई उड़ान देगा।

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