Summer Schedule : ईरान से जुड़े तनाव का असर अब सिर्फ अंतरराष्ट्रीय उड़ानों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि घरेलू हवाई सफर भी इसकी चपेट में आ गया है। 29 मार्च से शुरू हो रहे समर शेड्यूल में उड़ानों की संख्या घटने जा रही है, जिससे यात्रियों की जेब पर सीधा असर पड़ सकता है। एयरलाइंस पहले ही बढ़ती लागत से जूझ रही हैं और अब हालात और मुश्किल होते दिख रहे हैं। Directorate General of Civil Aviation (DGCA) द्वारा मंजूर नए शेड्यूल के अनुसार इस बार घरेलू उड़ानों की संख्या में करीब 10 से 12 फीसदी की कमी आई है।
जहां पिछले साल हर हफ्ते औसतन 25,000 से ज्यादा उड़ानें संचालित हो रही थीं, वहीं अब यह आंकड़ा घटकर लगभग 22,000 रह जाएगा। यानी हजारों सीटें कम हो जाएंगी, जिससे मांग और आपूर्ति का संतुलन बिगड़ सकता है।
Summer Schedule से पहले बड़ा झटका
हाल ही में सरकार ने घरेलू हवाई किराए पर लगी सीमा भी हटा दी है। दिसंबर 2025 में IndiGo की उड़ानों में व्यवधान के बाद अस्थायी रूप से अधिकतम किराया तय किया गया था। अब 23 मार्च 2026 से यह व्यवस्था खत्म हो चुकी है। ऐसे में एयरलाइंस अब पूरी तरह बाजार के हिसाब से किराए तय करेंगी, जिससे पीक सीजन में टिकटों की कीमतें तेजी से ऊपर जा सकती हैं। एविएशन सेक्टर पर सबसे बड़ा दबाव ईंधन की कीमतों का है। एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) महंगा होने से एयरलाइंस की लागत लगातार बढ़ रही है। Ram Mohan Naidu ने भी संकेत दिया है कि अप्रैल से इसका असर और साफ दिखेगा। वैश्विक तेल बाजार में उछाल के चलते एयरलाइंस के लिए परिचालन खर्च संभालना चुनौती बन गया है।
मजबूत कंपनियों को फायदा
बढ़ती लागत और सीमित उड़ानों के बीच बाजार में वही कंपनियां टिक पाएंगी जिनकी वित्तीय स्थिति मजबूत है। Air India और इंडिगो जैसी बड़ी एयरलाइंस ही मांग के हिसाब से उड़ानें चला पाने की स्थिति में हैं। छोटे या कमजोर ऑपरेटरों के लिए संचालन जारी रखना भी मुश्किल हो सकता है। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव ने अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को पहले ही प्रभावित कर रखा है। एयरस्पेस की पाबंदियों के कारण भारतीय विमानों को लंबा रास्ता लेना पड़ रहा है, जिससे ईंधन की खपत बढ़ रही है। यही दबाव अब घरेलू नेटवर्क पर भी दिखने लगा है, जहां लागत कम करने के लिए उड़ानों में कटौती की जा रही है।
यात्रियों के लिए मुश्किल समय
आने वाले महीनों में हवाई यात्रा करना पहले से महंगा पड़ सकता है। कम उड़ानें, ज्यादा मांग और बढ़ती लागत इन तीनों का असर टिकट कीमतों पर साफ दिखेगा। ऐसे में यात्रियों को पहले से योजना बनाकर टिकट बुक करना ही बेहतर विकल्प हो सकता है।
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