Former PM H. D. Deve Gowda : राजनीतिक गलियारों में उस समय हलचल मच गई जब पूर्व प्रधानमंत्री H. D. Deve Gowda ने कांग्रेस के साथ अपने पुराने गठबंधन को ‘जबरन शादी’ करार दिया। यह बयान उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge की एक टिप्पणी के जवाब में दिया। संसद में चर्चा के दौरान खरगे ने मजाकिया लहजे में कहा था कि देवेगौड़ा को कांग्रेस से प्यार था, लेकिन उन्होंने अंततः प्रधानमंत्री Narendra Modi और भाजपा के साथ ‘शादी’ कर ली।
खरगे की टिप्पणी के बाद देवेगौड़ा ने बयान जारी कर कहा कि अगर राजनीतिक रिश्तों को शादी की भाषा में समझाया जाए, तो कांग्रेस के साथ उनका गठबंधन एक मजबूरी का रिश्ता था।
Former PM का तगड़ा जवाब
उन्होंने कहा कि यह संबंध समय के साथ खराब होता गया और आखिरकार उन्हें इससे अलग होना पड़ा। उनके मुताबिक यह रिश्ता टिकाऊ नहीं रहा और हालात ऐसे बन गए कि अलग होना ही बेहतर विकल्प था। देवेगौड़ा ने यह भी स्पष्ट किया कि जब संसद में यह टिप्पणी की गई, उस समय वह सदन में मौजूद नहीं थे। उन्होंने बताया कि वह उगादी पर्व मनाने के लिए बेंगलुरु गए हुए थे। बाद में उन्हें इस टिप्पणी की जानकारी मिली, जिसके बाद उन्होंने सार्वजनिक तौर पर अपनी प्रतिक्रिया दी।
2018 के कर्नाटक चुनाव का जिक्र
अपने बयान में देवेगौड़ा ने 2018 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव के बाद की राजनीतिक परिस्थितियों को भी याद किया। उन्होंने कहा कि चुनाव के बाद कांग्रेस नेतृत्व ने जेडी(एस) से संपर्क किया था। उस समय वरिष्ठ कांग्रेस नेता Ghulam Nabi Azad ने प्रस्ताव रखा था कि H. D. Kumaraswamy को मुख्यमंत्री बनाया जाए। देवेगौड़ा के अनुसार, उन्होंने उस बैठक में सुझाव दिया था कि मुख्यमंत्री पद के लिए खरगे को आगे किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि उस समय कर्नाटक के नेता भी बैठक में मौजूद थे, लेकिन अंततः कांग्रेस की ओर से कुमारस्वामी को मुख्यमंत्री बनाने पर जोर दिया गया।
गठबंधन सरकार के पतन पर आरोप
2019 में कर्नाटक की गठबंधन सरकार गिरने के मामले को लेकर भी देवेगौड़ा ने कांग्रेस पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कई विधायक दल बदलकर भाजपा में शामिल हो गए, लेकिन कांग्रेस नेतृत्व उन्हें रोकने में नाकाम रहा। उनके मुताबिक अगर उस समय कड़ी कार्रवाई होती, तो राजनीतिक हालात अलग हो सकते थे। देवेगौड़ा ने यह भी कहा कि जेडी(एस) ने कांग्रेस का साथ नहीं छोड़ा, बल्कि परिस्थितियां ऐसी बनीं कि कांग्रेस के नेता ही दूर चले गए। उन्होंने कहा कि जब रिश्ता टिक नहीं पाया तो उनके पास दूसरा विकल्प नहीं था और उन्हें नया राजनीतिक रास्ता तलाशना पड़ा।
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