West Asia Crisis : पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब भारत की ऊर्जा व्यवस्था पर भी दिखने लगा है। संभावित आपूर्ति बाधाओं को देखते हुए केंद्र सरकार ने कई एहतियाती फैसले किए हैं। घरेलू स्तर पर खाना पकाने के लिए केरोसिन के इस्तेमाल को अस्थायी रूप से दोबारा शुरू कर दिया गया है। इसके साथ ही होटल और रेस्तरां को कुछ समय के लिए कोयला और अन्य वैकल्पिक ईंधन उपयोग करने की अनुमति भी दे दी गई है।
सरकार के कदमों के पीछे मुख्य वजह ईरान युद्ध के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बनी गंभीर स्थिति है। यह वही समुद्री मार्ग है, जिससे होकर भारत के कच्चे तेल, एलपीजी और एलएनजी आयात का बड़ा हिस्सा गुजरता है।
West Asia Crisis
इस मार्ग पर खतरा बढ़ने से ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता पैदा हो गई है, इसलिए सरकार ने पहले से ही वैकल्पिक व्यवस्था तैयार करना शुरू कर दिया है। ऊर्जा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए राज्यों को उनके नियमित मासिक कोटे से अलग अतिरिक्त केरोसिन दिया गया है। सामान्य तौर पर लगभग एक लाख किलोलीटर का मासिक आवंटन होता है, लेकिन इसके अलावा 48 हजार किलोलीटर अतिरिक्त केरोसिन भी राज्यों को उपलब्ध कराया गया है। इसका उद्देश्य खास तौर पर घरों में खाना पकाने की जरूरतों को पूरा करना है, ताकि एलपीजी पर दबाव कुछ हद तक कम हो सके।
एलपीजी की उपलब्धता बनाए रखने के लिए सरकार ने सिलिंडर बुकिंग पर भी कुछ अस्थायी नियम लागू किए हैं। अब शहरी क्षेत्रों में नया सिलिंडर 25 दिन के अंतराल के बाद ही बुक किया जा सकेगा, जबकि ग्रामीण इलाकों में यह अवधि 45 दिन रखी गई है। इसके साथ ही कमर्शियल एलपीजी की सप्लाई पर भी सीमित नियंत्रण लगाया गया है।
घबराहट में बढ़ी बुकिंग
सरकारी अधिकारियों का कहना है कि एलपीजी बुकिंग में अचानक आई तेजी का कारण असल में गैस की कमी नहीं बल्कि लोगों की घबराहट है। कई जगहों पर लोगों ने जरूरत से ज्यादा सिलिंडर बुक करने शुरू कर दिए, जिससे सप्लाई पर दबाव बढ़ गया। इस स्थिति से निपटने के लिए जमाखोरी और अवैध बिक्री पर सख्ती करने के निर्देश दिए गए हैं। दिलचस्प बात यह है कि पिछले कई वर्षों से भारत में केरोसिन के इस्तेमाल को धीरे-धीरे खत्म करने की नीति पर काम चल रहा था। प्रदूषण और पेट्रोल में मिलावट जैसे कारणों की वजह से इसके उपयोग को कम किया जा रहा था। वर्ष 2014 में दिल्ली को देश का पहला केरोसिन-मुक्त शहर घोषित किया गया था।
पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति सामान्य
ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार मौजूदा वैश्विक संकट के बावजूद देश में पेट्रोल और डीजल की कोई कमी नहीं है। रिफाइनरियां पूरी क्षमता से काम कर रही हैं और कच्चे तेल की खरीद कई स्रोतों से की जा रही है। पहले भारत लगभग 27 देशों से तेल आयात करता था, लेकिन अब यह संख्या बढ़कर करीब 40 देशों तक पहुंच गई है। इसके साथ ही घरेलू एलपीजी उत्पादन भी करीब 28 प्रतिशत तक बढ़ाया गया है।
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